नई दिल्ली, 3 अप्रैल 2025। वक्फ संशोधन विधेयक पर तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) जैसी धर्मनिरपेक्ष पार्टियों के समर्थन ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। इन दलों का मुस्लिम समुदाय पर मजबूत जनाधार होने के बावजूद भाजपा के इस विधेयक का समर्थन करना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
भाजपा ने कैसे बदला समीकरण?
परंपरागत रूप से टीडीपी और जेडीयू मुस्लिमों से जुड़े मुद्दों पर भाजपा से अलग रुख अपनाते रहे हैं, खासकर समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे विषयों पर। लेकिन भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने इन दलों को पर्दे के पीछे चल रही चर्चाओं के माध्यम से समर्थन देने के लिए राजी कर लिया।

सूत्रों के अनुसार, विधेयक लाने से पहले भाजपा के वरिष्ठ मंत्रियों ने टीडीपी, जेडीयू, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) और जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के नेताओं से गहन विचार-विमर्श किया। उन्हें बताया गया कि यह विधेयक मुस्लिम हितों की रक्षा और महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए लाया जा रहा है, न कि जैसा विपक्ष दावा कर रहा है कि इससे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण होगा।
विधेयक में सहयोगी दलों के सुझाव शामिल
टीडीपी और जेडीयू समेत अन्य सहयोगी दलों की कुछ चिंताएं थीं, खासकर वक्फ संपत्तियों पर असर और राज्य सरकारों के अधिकारों पर संभावित अतिक्रमण को लेकर। इस पर चर्चा के बाद विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा गया, जिसने 14 संशोधन किए, जिनमें से कई जेडीयू और टीडीपी द्वारा सुझाए गए थे।
जेडीयू की प्रमुख सिफारिशें:
- नए कानून को पिछली तारीखों से लागू न किया जाए, ताकि मौजूदा मस्जिदों, दरगाहों और अन्य धार्मिक स्थलों पर असर न पड़े।
- राज्यों से परामर्श अनिवार्य किया जाए, क्योंकि भूमि राज्य का विषय है।
टीडीपी की प्रमुख सिफारिशें:
- राज्यों की स्वायत्तता बनाए रखी जाए।
- विवाद समाधान के लिए जिला कलेक्टर से ऊपर के स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति की जाए।
- वक्फ से जुड़े दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड करने की समयसीमा बढ़ाई जाए।
संशोधित विधेयक में इन सुझावों को शामिल किया गया, जिसके बाद इसे मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल गई।
भाजपा सहयोगियों ने क्यों किया समर्थन?
लोकसभा में इस विधेयक पर बहस के दौरान जेडीयू नेता ललन सिंह ने इसे पूरी तरह से मुस्लिम हितैषी बताया और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा मुस्लिम समुदाय के लिए उठाए गए कदमों का हवाला दिया। बिहार चुनावों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने इस मुद्दे को कई बार दोहराया।
इसी तरह, टीडीपी के केपी तेननेटी ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू द्वारा मुस्लिम महिलाओं, युवाओं और हाशिए पर खड़े समुदायों के लिए लिए गए फैसलों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक है।
भाजपा के अन्य सहयोगियों, जैसे एलजेपी, हिंदुस्तान आवाम मोर्चा और आरएलडी ने भी इस विधेयक का समर्थन किया।
मोदी सरकार की गठबंधन प्रबंधन रणनीति
इस विधेयक पर सहयोगी दलों को एकजुट करना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गठबंधन प्रबंधन रणनीति का एक और उदाहरण माना जा रहा है। भाजपा ने अपने दूसरे कार्यकाल से तीसरे कार्यकाल तक इस नीति को जारी रखा है, जिससे यह साफ हो गया है कि सरकार विवादित मुद्दों पर भी सहयोगियों का समर्थन सुनिश्चित करने में सक्षम है।
