नई दिल्ली, 3 अप्रैल 2025। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा घोषित नए टैरिफ ने वैश्विक व्यापार को झकझोर कर रख दिया है। हालांकि, कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत के लिए एक नया अवसर भी हो सकता है।
भारत पर बढ़ा टैरिफ, लेकिन चीन-बांग्लादेश को झटका
9 अप्रैल से भारतीय वस्तुओं पर 27% तक का टैरिफ लगाया जाएगा, जबकि इससे पहले यह दर औसतन 3.3% थी। हालाँकि, चीन (54%), वियतनाम (46%), थाईलैंड (36%) और बांग्लादेश (37%) पर इससे भी ज्यादा शुल्क लगाया गया है। दिल्ली स्थित ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी जैसे सेक्टरों में भारत को अमेरिका में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।

टेक्सटाइल सेक्टर में भारत के लिए संभावनाएं
- बांग्लादेश पर उच्च टैरिफ लगने से अमेरिकी बाजार में भारतीय वस्त्र उद्योग को फिर से मजबूती मिल सकती है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत पैकेजिंग, टेस्टिंग और कम लागत वाले चिप निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
- मशीनरी, ऑटोमोबाइल और खिलौना उद्योग में भी भारत को निवेश आकर्षित करने और अमेरिका को निर्यात बढ़ाने का मौका मिल सकता है।
क्या भारत इन अवसरों का लाभ उठा पाएगा?
हालांकि, भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में बाधाएं बनी हुई हैं।
- उच्च उत्पादन लागत और कमजोर लॉजिस्टिक्स के चलते भारत की निर्यात क्षमता सीमित है।
- भारत का वैश्विक निर्यात में केवल 1.5% का योगदान है और देश अभी भी एक बड़ा व्यापार घाटा झेल रहा है।
- ट्रम्प पहले भी भारत को “टैरिफ किंग” और “व्यापार का बड़ा दुरुपयोगकर्ता” कह चुके हैं।
अमेरिका को मनाने की भारत की रणनीति
भारत ने ट्रम्प प्रशासन को समर्थन जीतने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं:
- $25 बिलियन की अमेरिकी ऊर्जा आयात की प्रतिबद्धता।
- बॉर्बन व्हिस्की पर आयात शुल्क घटाकर 100% किया गया (पहले 150% था)।
- लग्जरी कारों और सोलर सेल्स पर शुल्क में कटौती।
- 6% डिजिटल विज्ञापन कर हटाया।
- एफ-35 फाइटर जेट डील और स्टारलिंक की स्वीकृति पर बातचीत।
विशेषज्ञों की राय – अवसर का लाभ उठाने के लिए क्या जरूरी?
GTRI के अजय श्रीवास्तव का मानना है कि यह भारत के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का प्रमुख हिस्सा बनने का अवसर हो सकता है। लेकिन इसके लिए भारत को –
✔ व्यवसाय करने की सुगमता में सुधार करना होगा।
✔ बेहतर लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करना होगा।
✔ नीतिगत स्थिरता बनाए रखनी होगी।
हालांकि, बिस्वजीत धर (काउंसिल फॉर सोशल डेवलपमेंट) का मानना है कि मलेशिया और इंडोनेशिया भारत से बेहतर स्थिति में हो सकते हैं। अगर भारत ने कपड़ा उद्योग को फिर से मजबूत नहीं किया, तो यह अवसर भी हाथ से निकल सकता है।
क्या भारत को चिंता होनी चाहिए?
भारत को उम्मीद थी कि चल रही व्यापार वार्ताओं के कारण वह इन टैरिफ से बच सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। डब्ल्यूटीओ विशेषज्ञ अभिजीत दास के अनुसार, यह भारत के लिए एक बड़ा झटका है।
अब सवाल यह है कि भारत इन नई परिस्थितियों का कितना लाभ उठा सकता है – क्या भारत अपने व्यापारिक अवसरों को मजबूत कर पाएगा, या फिर यह एक और चुनौती बनकर सामने आएगा?
