Hasdeo जंगल पर मंडराया बड़ा संकट

Hasdeo क्षेत्र एक बार फिर कोयला खनन परियोजना को लेकर चर्चा में है। राजस्थान सरकार की बिजली उत्पादन कंपनी RVUNL ने छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले स्थित Hasdeo-Arand जंगल में 1742.6 हेक्टेयर वन भूमि डायवर्ट करने और 4.48 लाख पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव दिया है।

इस प्रस्ताव को लेकर पर्यावरणविदों, आदिवासी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गंभीर चिंता जताई है। मामले पर शुक्रवार को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की Forest Advisory Committee (FAC) विचार करेगी।

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Hasdeo में 4.48 लाख पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव

राजस्थान राज्या विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) को अक्टूबर 2015 में Kente Extension कोल ब्लॉक आवंटित किया गया था।

इस कोल ब्लॉक का उपयोग राजस्थान के छबड़ा और सूरतगढ़ बिजली संयंत्रों के लिए कोयला उपलब्ध कराने हेतु किया जाना है।

Adani Group करेगा संचालन

इस परियोजना का डेवलपर और ऑपरेटर Adani Group है।

कंपनी ने दावा किया है कि भविष्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त कोयले की आवश्यकता है। इसी आधार पर Hasdeo जंगल में नई खदान विस्तार योजना प्रस्तावित की गई है।


Hasdeo-Arand क्यों है बेहद महत्वपूर्ण

Hasdeo-Arand जंगल छत्तीसगढ़ के कोरबा, सरगुजा और सूरजपुर जिलों में फैला हुआ है। यह क्षेत्र लगभग 1.7 लाख हेक्टेयर में फैला हुआ घना वन क्षेत्र माना जाता है।

यहां घने साल जंगलों के साथ कई दुर्लभ वन्यजीव पाए जाते हैं।

वन्यजीवों का सुरक्षित आवास

Hasdeo जंगल में तेंदुआ, स्लॉथ भालू और हाथी जैसे Schedule-I वन्यजीव रहते हैं। इन्हें भारतीय वन्यजीव कानून के तहत उच्चतम सुरक्षा प्राप्त है।

यह इलाका बाघों के मूवमेंट कॉरिडोर के रूप में भी जाना जाता है।

Hasdeo नदी का मुख्य कैचमेंट क्षेत्र

यह जंगल Hasdeo नदी और बांगो बांध के जलग्रहण क्षेत्र का हिस्सा भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से जल स्रोतों और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ सकता है।

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Hasdeo में कोयला खदान विस्तार को लेकर विवाद

Hasdeo क्षेत्र में पहले से ही Parsa और PEKB ओपन कास्ट कोयला खदानें संचालित हो रही हैं।

अब Kente Extension परियोजना को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।

Chhattisgarh Bachao Andolan ने उठाए सवाल

Chhattisgarh Bachao Andolan ने FAC को भेजे गए अपने पत्र में कहा कि राजस्थान की बिजली जरूरतों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है।

संगठन का दावा है कि Central Electricity Authority ने 2035-36 तक राजस्थान की बिजली जरूरत का अनुमान पहले के 20,532 मेगावाट से घटाकर 16,561 मेगावाट कर दिया है।

ऐसे में नई खदान की जरूरत पर सवाल उठाए जा रहे हैं।


compensatory afforestation पर भी उठे सवाल

RVUNL ने 3236.08 हेक्टेयर क्षेत्र में compensatory afforestation का प्रस्ताव दिया है।

लेकिन केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने मार्च में इस पर आपत्ति जताई थी।

घने जंगलों में ही पौधारोपण का प्रस्ताव

मंत्रालय के अनुसार, जिस जमीन पर compensatory afforestation प्रस्तावित है, उसमें 1051 हेक्टेयर क्षेत्र पहले से moderately dense forest श्रेणी में आता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि घने जंगल काटकर दूसरे वन क्षेत्रों में पौधारोपण पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता।


आदिवासी समुदायों की बढ़ी चिंता

Hasdeo क्षेत्र आदिवासी समुदायों के लिए जीवनरेखा माना जाता है। यहां रहने वाले लोग जंगल पर आजीविका, जल स्रोत और संस्कृति के लिए निर्भर हैं।

स्थानीय संगठनों का कहना है कि खनन विस्तार से हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।

पर्यावरणविदों ने जताई चिंता

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार Hasdeo-Arand को कभी “No-Go Zone” घोषित करने पर विचार किया गया था क्योंकि यह उच्च संरक्षण वाला वन क्षेत्र है।

अब लगातार बढ़ती खनन परियोजनाओं से जंगल के अस्तित्व पर खतरा बढ़ रहा है।

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FAC की बैठक में होगा अहम फैसला

शुक्रवार को पर्यावरण मंत्रालय की Forest Advisory Committee इस प्रस्ताव पर विचार करेगी।

यदि मंजूरी मिलती है तो Hasdeo-Arand क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और खनन कार्य शुरू हो सकता है।

यह फैसला पर्यावरण, वन्यजीव संरक्षण और आदिवासी अधिकारों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।


Hasdeo सिर्फ एक जंगल नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की पर्यावरणीय और सांस्कृतिक धरोहर है। 4.48 लाख पेड़ों की कटाई और 1742 हेक्टेयर वन भूमि डायवर्जन का प्रस्ताव पर्यावरण और आदिवासी समुदायों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

अब सबकी नजर FAC के फैसले पर टिकी है, जो तय करेगा कि Hasdeo-Arand का भविष्य संरक्षण की ओर जाएगा या खनन विस्तार की ओर।

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