bonded labour के एक गंभीर मामले में छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले से बैगा आदिवासी समुदाय के 13 बच्चों को मुक्त कराया गया है। इस मामले में पुलिस ने 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बच्चों को कथित रूप से मवेशी पालन केंद्रों में बंधुआ मजदूरी के लिए रखा गया था।
यह कार्रवाई कबीरधाम पुलिस, चाइल्डलाइन, महिला एवं बाल विकास विभाग और बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था AVA द्वारा संयुक्त रूप से की गई।
कबीरधाम में bonded labour का बड़ा खुलासा
पुलिस के अनुसार, rescued किए गए बच्चों की उम्र 8 से 15 वर्ष के बीच है। ये सभी बच्चे दूरस्थ वन क्षेत्रों के बैगा आदिवासी गांवों से लाए गए थे। आरोप है कि बच्चों के परिवारों को पैसे और बेहतर जीवन का लालच देकर उन्हें यहां भेजा गया।
जांच में सामने आया कि बच्चों को पिछले 7 से 8 महीनों से मवेशी पालन इकाइयों में काम कराया जा रहा था। ये केंद्र कान्हा नेशनल पार्क क्षेत्र के आसपास स्थित थे।
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बच्चों से कराया जाता था खतरनाक काम
जानकारी के मुताबिक बच्चों से प्रतिदिन 10 घंटे से अधिक काम कराया जाता था। इसके बदले उन्हें मात्र 1000 से 2000 रुपये प्रतिमाह दिए जाते थे।
अधिकारियों ने बताया कि बच्चों को बेहद खराब और शोषणकारी परिस्थितियों में रखा गया था।
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पुलिस और AVA की संयुक्त कार्रवाई
AVA संस्था ने करीब दो सप्ताह तक आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी। इसके बाद संस्था ने पुलिस को महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
कबीरधाम के पुलिस अधीक्षक Dharmendra Singh ने बताया कि सूचना मिलते ही टीमों को सक्रिय किया गया।
SP ने कहा कि पहले एक मवेशी पालन केंद्र से 4 बच्चों को मुक्त कराया गया। बाद में बच्चों से मिली जानकारी के आधार पर जिले के चार अन्य स्थानों पर छापेमारी की गई।
bonded labour नेटवर्क की जांच तेज
पुलिस ने बताया कि मामले में मानव तस्करी, bonded labour, बाल श्रम और किशोर न्याय अधिनियम के तहत FIR दर्ज की गई है।
अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
AVA ने जताई चिंता
AVA के वरिष्ठ निदेशक Manish Sharma ने कहा कि आदिवासी और गरीब समुदायों के बच्चे तेजी से मानव तस्करी गिरोहों के निशाने पर आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अत्यधिक गरीबी और दूरस्थ इलाकों का फायदा उठाकर बच्चों को bonded labour में धकेला जा रहा है।
छोटे बच्चों का हो रहा शोषण
AVA के अनुसार, 8 साल तक के बच्चों से खतरनाक परिस्थितियों में काम कराया जा रहा था। संस्था ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की।
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बच्चों का पुनर्वास शुरू
सभी rescued बच्चों को फिलहाल बाल संरक्षण गृहों में भेजा गया है। अधिकारियों ने बताया कि बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।
इसके बाद पुनर्वास, शिक्षा और कानूनी सहायता की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
bonded labour रोकने की चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि छत्तीसगढ़ के दूरदराज आदिवासी क्षेत्रों में bonded labour और बाल तस्करी रोकना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
सरकार और प्रशासन को गांव स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने और गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता देने की जरूरत है।
कबीरधाम में सामने आया यह bonded labour मामला बेहद चिंताजनक है। 13 मासूम आदिवासी बच्चों को जिस तरह बंधुआ मजदूरी में धकेला गया, उसने मानव तस्करी और बाल शोषण के गंभीर खतरे को उजागर किया है।
हालांकि पुलिस और सामाजिक संगठनों की त्वरित कार्रवाई से बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन bonded labour जैसे अपराधों को पूरी तरह खत्म करने के लिए लगातार सख्त कार्रवाई और जागरूकता जरूरी है।
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