रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ठंड की शुरुआत होते ही बाहरी चोर गिरोह सक्रिय हो जाते हैं। ये प्रोफेशनल चोर गिरोह चोरी की घटनाओं को अंजाम देने से पहले घरों की रेकी करते हैं। फेरी वाले, सर्वे या मार्केटिंग कर्मी बनकर यह गिरोह उन घरों की पहचान करते हैं, जहां ताले लगे हों या लाइट बंद हो।
बाहरी चोर गिरोह केवल खुले इलाकों को ही नहीं, बल्कि कवर्ड कैंपस वाली कॉलोनियों को भी आसानी से निशाना बनाते हैं। कम गश्त और ठंड के कारण रात में आवाजाही कम होने से इन्हें चोरी करने का मौका मिलता है।

सालाना 500 से ज्यादा चोरियां, कई मामले अनसुलझे
रायपुर में हर साल 500 से अधिक घरों और मकानों के ताले टूटते हैं। इनमें से अधिकांश मामलों में चोरों का पता नहीं चल पाता है। चोरी का माल भी बरामद नहीं होता। इस साल चोरी और नकबजनी के मामलों की संख्या 1,000 से अधिक पहुंच गई है।
बाहरी चोर गिरोह मुख्य रूप से सोना-चांदी और नकदी पर ध्यान केंद्रित करते हैं। दूसरी ओर, लोकल चोर गिरोह अन्य घरेलू सामान भी चुराते हैं।
ग्रामीण इलाकों में ज्यादा चोरियां
शहर के ग्रामीण इलाकों में चोरी का खतरा अधिक है। मकानों की दूरी, स्ट्रीट लाइट की कमी और मेन रोड पर लाइट बंद रहने से चोरों को आसानी होती है। आउटर इलाकों जैसे विधानसभा, तिल्दा नेवरा, आरंग, खरोरा और सेजबहार में गैती गैंग ने हाल ही में 25 चोरियों को अंजाम दिया।
बढ़ती चोरी की घटनाएं रायपुर पुलिस के लिए चुनौती बन गई हैं। पुलिस को गश्त बढ़ाने और ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा के लिए विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता है।
