Snakebite Compensation Scam ने छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सरकारी मुआवजा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने सांप के काटने से मौत के फर्जी मामले तैयार कर सरकारी राहत राशि हड़पने वाले एक संगठित गिरोह का खुलासा किया है। इस मामले में डॉक्टर, वकील, होमगार्ड, बैंक कर्मचारी और सरकारी कर्मियों सहित 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में अब तक 16 फर्जी मामलों के जरिए लगभग 64 लाख रुपये की सरकारी सहायता राशि का दुरुपयोग सामने आया है।
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Snakebite Compensation Scam क्या है?
बिलासपुर पुलिस के अनुसार, यह गिरोह राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) 6-4 के तहत मिलने वाले सरकारी मुआवजे का गलत लाभ उठाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। सांप के काटने से मौत होने पर राज्य सरकार की ओर से राहत राशि दी जाती है। इसी योजना का दुरुपयोग करते हुए आरोपियों ने कई मामलों में मौत का वास्तविक कारण बदलकर उसे सर्पदंश (Snakebite) दिखाया और सरकारी मुआवजा हासिल किया।
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Snakebite Compensation Scam में 19 गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में 19 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें शामिल हैं—
- एक डॉक्टर
- दो होमगार्ड
- एक वकील
- बैंक कर्मचारी
- राजस्व विभाग से जुड़े कर्मचारी
- अन्य सहयोगी
पुलिस के अनुसार, गिरोह के प्रत्येक सदस्य की अलग-अलग भूमिका थी। कोई फर्जी मेडिकल दस्तावेज तैयार करता था, कोई सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर करता था, जबकि अन्य आरोपी मुआवजा स्वीकृत कराने और राशि निकालने में मदद करते थे।
फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से किया जाता था खेल
जांच में सामने आया है कि कई मामलों में मौत का वास्तविक कारण बीमारी, आत्महत्या, हार्ट अटैक या अन्य कारण था। लेकिन आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाणपत्र और पंचनामा तैयार कर मौत का कारण सांप का काटना दर्शाया।
पुलिस के मुताबिक, कुछ मामलों में सरकारी अधिकारियों और डॉक्टरों की फर्जी मुहर और हस्ताक्षर भी तैयार किए गए ताकि दस्तावेज असली दिखाई दें।
Snakebite Compensation Scam में ₹64 लाख कैसे हड़पे गए?
पुलिस जांच में अब तक 16 फर्जी मुआवजा दावों का पता चला है, जिनके जरिए लगभग ₹64 लाख की सरकारी सहायता राशि निकाली गई।
जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रत्येक मामले में मृतक के परिजनों को कथित रूप से लगभग ₹50 हजार दिए जाते थे, जबकि शेष राशि गिरोह के सदस्यों में बांट दी जाती थी। पूरे नेटवर्क ने 2019 से 2024 के बीच सुनियोजित तरीके से इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया।
पुलिस को जांच में क्या मिला?
छापेमारी और जांच के दौरान पुलिस ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और सामान बरामद किए हैं, जिनमें शामिल हैं—
- फर्जी सरकारी मुहरें
- नकली पोस्टमार्टम रिपोर्ट
- मृत्यु प्रमाणपत्र
- बैंक पासबुक
- आधार कार्ड
- कंप्यूटर और प्रिंटर
- नकदी और अन्य दस्तावेज
पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तथा लाभार्थियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
आगे क्या होगी कार्रवाई?
बिलासपुर पुलिस ने मामले में विभिन्न थानों में 16 एफआईआर दर्ज की हैं। जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि अन्य सरकारी कर्मचारियों या अधिकारियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्वीकृत हुए अन्य मुआवजा मामलों में कहीं इसी तरह की धोखाधड़ी तो नहीं हुई।
Snakebite Compensation Scam ने सरकारी मुआवजा व्यवस्था में दस्तावेजों की जांच और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिलासपुर में सामने आए इस मामले में डॉक्टर, वकील, होमगार्ड और सरकारी कर्मचारियों समेत 19 लोगों की गिरफ्तारी बताती है कि यह एक संगठित नेटवर्क के रूप में काम कर रहा था। पुलिस की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस Snakebite Compensation Scam से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
