Jan Sanskriti Manch Raipur की इकाई द्वारा विगत दिनों सामाजिक कार्यकर्ता एवं लेखक आलोक विमल के निवास पर शायरी और कविता पाठ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के कई नामचीन कवियों और शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर साहित्यिक माहौल को जीवंत बना दिया।
कार्यक्रम में गजल, कविता, व्यंग्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं की प्रस्तुति हुई। रचनाकारों ने अपने-अपने अंदाज में वर्तमान समय, सामाजिक विसंगतियों, अन्याय और मानवीय संवेदनाओं को शब्द दिए।
देश-दुनिया और अपराध जगत की ताजा खबरों के लिए 4thnation WhatsApp Channel से जुड़ें
Jan Sanskriti Manch Raipur की महफिल में गूंजा साहित्य
मशहूर शायर सुखनवर हुसैन रायपुरी ने अपनी सधी हुई आवाज में जीवन और मृत्यु की सच्चाई को बयां करने वाली रचनाएं सुनाईं। उनकी पंक्तियों में इंसान की सीमाओं और सामाजिक व्यवहार पर गहरी टिप्पणी देखने को मिली।
नामचीन शायर आलिम नकवी ने भी अपनी धारदार गजलों से श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। उन्होंने अन्याय के सामने झुकने से इनकार और अपने आत्मसम्मान को कायम रखने की भावना को अपनी रचनाओं में प्रभावी ढंग से सामने रखा।
आलिम नकवी की एक अन्य गजल में गजल की रचनात्मकता और दिल से निकली अभिव्यक्ति को केंद्र में रखा गया, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
यह भी पढ़ें: दुर्ग में चावल महोत्सव के साथ Durg Rojgar Diwas का आयोजन
युवा शायरों की रचनाओं ने बांधा समां
युवा शायर मीसम हैदरी ने भारतीय रेलगाड़ी को हिन्दुस्तान की आत्मा के रूप में प्रस्तुत करते हुए रचना सुनाई। उनकी व्यंग्य रचनाओं ने कार्यक्रम में हास्य का रंग भी भरा।
शायर इमरान अब्बास ने जानदार गजलों की प्रस्तुति दी। उनकी रचनाओं में व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े सवालों को प्रभावशाली तरीके से उठाया गया।
युवा रचनाकार अल्तमश ने फैज अहमद फैज, मदन मोहन दानिश और राहत इंदौरी की रचनाओं का पाठ किया। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में साहित्यिक विविधता को और समृद्ध किया।
Jan Sanskriti Manch Raipur में सामाजिक सरोकारों पर जोर
वरिष्ठ शायर आरडी अहिरवार ने समय और समाज की विसंगतियों को उजागर करने वाली रचनाएं प्रस्तुत कीं। जेन-जी पीढ़ी को केंद्र में रखकर लिखी गई उनकी रचना को भी श्रोताओं ने पसंद किया।
सफाई कामगारों के मुद्दों पर काम करने वाले संजीव खुदशाह ने ‘दोगले सीरीज’ पर आधारित कई रचनाएं सुनाईं। उनकी कविताओं में सामाजिक असमानता और मनुवादी चरित्रों पर सवाल उठाए गए।
डॉ. पूनम संजू ने बस्तर की एक आदिवासी युवती के अनुभवों और अस्तित्व को केंद्र में रखकर संवेदनशील रचना का पाठ किया। उनकी कविता ने आदिवासी जीवन की वास्तविकताओं और उससे जुड़े अनुभवों को भावपूर्ण तरीके से सामने रखा।
जेन-जी कवयित्री ने व्यवस्था पर उठाए सवाल
युवा कवयित्री सिमरन भगत ने भी व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली रचनाएं प्रस्तुत कीं। उनकी कविताओं में चुनाव, भाषण और न्याय व्यवस्था के बीच दिखाई देने वाले विरोधाभासों पर तीखा व्यंग्य देखने को मिला।
उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था में मौजूद विसंगतियों पर सवाल खड़े किए, जिसे उपस्थित श्रोताओं ने गंभीरता से सुना।
साहित्यिक महफिल में गीत और गजल की प्रस्तुतियां
संस्कृतिकर्मी राजकुमार सोनी ने ‘मुड़ा-तुड़ा नोट’ और ‘जरूरी काम’ शीर्षक से कविताओं का पाठ किया। वहीं कवि भागीरथी वर्मा ने सरल शब्दों में मजदूरों के शोषण के खिलाफ अपनी कविता के जरिए आवाज उठाई।
वर्षा बोपचे ने ‘अगर हो सकें तो कोई शमां जलाइए’ गीत प्रस्तुत किया। इसके अलावा उन्होंने आलिम नकवी की गजल ‘मैं ऐसे ख्वाब क्यों कर देखता हूं’ का भी प्रभावी पाठ किया।
समीक्षा नायर ने शलभ श्रीराम सिंह की चर्चित रचना ‘नफस-नफस कदम-कदम’ को शानदार ढंग से प्रस्तुत किया।
युवा शायर मोहम्मद मुसय्यब ने भी अपनी धारदार गजल सुनाकर श्रोताओं की सराहना हासिल की। उनकी रचनाओं में सामाजिक चुप्पी, अन्याय और देश के प्रति जुड़ाव जैसे विषय प्रमुख रहे।
देश-दुनिया और अपराध जगत की ताजा खबरों के लिए 4thnation WhatsApp Channel से जुड़ें
Jan Sanskriti Manch Raipur के अध्यक्ष ने रखे विचार
जन संस्कृति मंच छत्तीसगढ़ की अध्यक्ष रूपेंद्र तिवारी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में वर्तमान समय की चिंताओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एक अच्छा रचनाकार अपने समय से जूझता है और समाज की विसंगतियों के खिलाफ अपना हस्तक्षेप दर्ज करता है।
उन्होंने अपनी गजल का पाठ भी किया, जिसे कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने सराहा। उनके वक्तव्य में साहित्य की सामाजिक जिम्मेदारी और रचनाकार की भूमिका पर विशेष जोर रहा।
कार्यक्रम के अंत में जसम रायपुर के सचिव इंद्रकुमार राठौर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन आलोक विमल ने किया।
Jan Sanskriti Manch Raipur के इस साहित्यिक आयोजन में कविता, गजल, गीत और व्यंग्य के जरिए समाज और वर्तमान समय के विभिन्न पहलुओं को सामने रखा गया। वरिष्ठ और युवा रचनाकारों की विविध प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को खास बनाया। आयोजन में साहित्य को सामाजिक सरोकारों और वर्तमान चुनौतियों से जोड़ने की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
