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Chhattisgarh Road Accidents: एक साल में 6,967 मौतें, हाईकोर्ट ने पुलिस और प्रशासन को लगाई कड़ी फटकार

Chhattisgarh Road Accidents को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, पुलिस और संबंधित विभागों पर कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों और मौतों पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने गंभीर नाराजगी जताई। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल ने पूछा कि “क्या पुलिसकर्मियों का काम सिर्फ मवेशी हांकना है या व्यवस्था बनाना?” अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को 10 दिनों के भीतर शपथपत्र के साथ विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।


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Chhattisgarh Road Accidents: कोर्ट में पेश हुए चौंकाने वाले आंकड़े

सड़क सुरक्षा से जुड़े जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त कोर्ट कमिश्नर ने विभिन्न जिलों से जुटाए गए अधिकृत आंकड़े अदालत के सामने पेश किए।

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में छत्तीसगढ़ में कुल 15,484 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों में 6,967 लोगों की मौत हुई, जबकि 13,156 लोग घायल हुए।

वहीं, 1 जनवरी से 31 मई 2026 तक केवल पांच महीनों में 6,891 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 3,170 लोगों की जान चली गई। इन आंकड़ों ने अदालत की चिंता और बढ़ा दी।

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Chhattisgarh Road Accidents: सड़क सुरक्षा समितियों की बैठकों पर सवाल

कोर्ट कमिश्नर ने बताया कि सड़क सुरक्षा के लिए गठित जिला सड़क सुरक्षा समितियां अपने दायित्वों का सही तरीके से पालन नहीं कर रही हैं।

नियमों के अनुसार प्रत्येक महीने बैठक आयोजित की जानी चाहिए, लेकिन कई जिलों में पूरे साल केवल एक बैठक हुई।

सरगुजा और कांकेर का उदाहरण

  • सरगुजा जिले में वर्ष 2025 के दौरान सड़क हादसों में 300 से अधिक लोगों की मौत हुई। इसके बावजूद पूरे वर्ष में सड़क सुरक्षा समिति की सिर्फ एक बैठक आयोजित की गई।
  • कांकेर जिले में भी पूरे साल केवल एक बैठक हुई।

हाईकोर्ट ने इसे प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए जवाब तलब किया।


बारिश में हाईवे पर बैठे मवेशियों पर हाईकोर्ट की नाराजगी

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने कहा कि बारिश के मौसम में राष्ट्रीय राजमार्गों और मुख्य सड़कों पर आवारा मवेशियों का बैठना गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है।

उन्होंने कहा कि दिन में स्थिति कुछ हद तक नियंत्रित रहती है, लेकिन रात में वाहन चालकों के लिए यह बेहद खतरनाक हो जाती है।

इसी दौरान उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की कि “क्या पुलिसकर्मियों का काम सिर्फ मवेशी हांकना है या व्यवस्था बनाना?”


Chhattisgarh Road Accidents: रायपुर बना सबसे बड़ा डेथ जोन

हाईकोर्ट में प्रदेश के 10 सबसे खतरनाक ब्लैक स्पॉट्स की सूची भी प्रस्तुत की गई।

इनमें से 7 ब्लैक स्पॉट अकेले रायपुर जिले में स्थित हैं।

प्रमुख ब्लैक स्पॉट्स में शामिल हैं—

  • धरसींवा के सिलतरा से निको गेट के बीच एक वर्ष में 19 लोगों की मौत
  • कोरबा के पाली-गझरा नाला मार्ग पर 22 दुर्घटनाओं में 17 लोगों की जान गई
  • रायपुर के तेलीबांधा, नेवरा, आरंग और खरोरा क्षेत्र भी गंभीर दुर्घटना संभावित स्थानों में शामिल हैं।

ओवरलोडिंग और अवैध पार्किंग पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर भारी वाहनों की अवैध पार्किंग दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बन रही है।

उन्होंने कहा कि 10 टन क्षमता वाले ट्रकों में 22 से 25 टन तक माल लादा जा रहा है, जबकि वजन जांचने वाली मशीनें कई स्थानों पर बंद पड़ी हैं।

कोर्ट ने कहा कि मुख्य सड़कों पर खड़े भारी वाहन दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं।


हाईकोर्ट ने सरकार से इन बिंदुओं पर मांगा जवाब

अदालत ने राज्य सरकार, एनएचएआई और संबंधित विभागों से 10 दिनों के भीतर शपथपत्र के साथ जवाब मांगा है।

मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं—

  • सड़क सुरक्षा समिति की नियमित बैठकें क्यों नहीं हुईं?
  • ओवरलोडिंग और अवैध पार्किंग रोकने के लिए क्या कार्रवाई की गई?
  • चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स को सुरक्षित बनाने के लिए क्या कदम उठाए गए?
  • एनएचएआई के क्षेत्रीय और प्रशासनिक अधिकारियों की रिपोर्ट।
  • सड़क सुरक्षा सुधारने की समयबद्ध कार्ययोजना।

Chhattisgarh Road Accidents के बढ़ते मामलों ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। एक वर्ष में 6,967 मौतें और 2026 के शुरुआती पांच महीनों में 3,170 मौतों के आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी और राज्य सरकार से मांगी गई जवाबदेही यह संकेत देती है कि अब सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ठोस और समयबद्ध कदम उठाना आवश्यक है। यदि प्रशासन प्रभावी कार्रवाई नहीं करता, तो Chhattisgarh Road Accidents का आंकड़ा आने वाले समय में और गंभीर रूप ले सकता है।

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