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Coforge Chairman Exit की पूरी कहानी

Coforge Chairman Exit ने देश की प्रमुख IT सर्विस कंपनियों में से एक Coforge के कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर और चेयरमैन O.P. Bhatt ने 8 सितंबर 2026 को तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। यह घटनाक्रम एक इंटरनल ऑडिट के बाद सामने आया, जिसमें बोर्ड इवैल्यूएशन प्रक्रिया और उससे जुड़ी रिपोर्ट की हैंडलिंग को लेकर चिंताएं सामने आई थीं।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ ही सप्ताह पहले कंपनी के AGM में शेयरधारकों ने Bhatt की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी थी। Coforge के सबसे बड़े शेयरधारकों में शामिल Advent International ने भी उनके पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया था।

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Coforge Chairman Exit और बोर्ड इवैल्यूएशन विवाद

Coforge की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक, 2026-27 की दूसरी तिमाही के इंटरनल ऑडिट प्लान के तहत बोर्ड इवैल्यूएशन एक्सरसाइज और उससे तैयार Board Evaluation Report (BER) की समीक्षा की गई थी।

ऑडिट में रिपोर्ट की प्रक्रिया और जानकारी के disclosure से जुड़े कुछ मुद्दे सामने आए। रिपोर्ट में बोर्ड को उपलब्ध कराई गई जानकारी में Bhatt के प्रदर्शन से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं के पूर्ण disclosure को लेकर भी सवाल उठे।

इसके बाद बोर्ड ने Bhatt के सामने अपनी चिंताएं रखीं और उनसे स्पष्टीकरण मांगा। Bhatt ने अपना जवाब दिया था, लेकिन बोर्ड उनके जवाब का मूल्यांकन कर ही रहा था कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि ऑडिट की चिंताएं अकेले उनके इस्तीफे का कारण थीं।

Advent International का वोट क्यों अहम?

Coforge Chairman Exit की चर्चा में Advent International की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक बन गई है। 24 अगस्त 2026 को हुई AGM में Bhatt की मई 2027 से आगे पुनर्नियुक्ति को लेकर शेयरधारकों के सामने प्रस्ताव रखा गया था।

इस प्रस्ताव को जरूरी समर्थन नहीं मिला और Advent ने भी इसके खिलाफ मतदान किया। रिपोर्टों के अनुसार, Advent के पास Coforge में करीब 20 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

दिलचस्प बात यह है कि Advent का एक प्रतिनिधि उस प्रक्रिया से जुड़े पैनल में था जिसने पहले Bhatt के कार्यकाल को आगे बढ़ाने का समर्थन किया था। इसके बाद AGM में वोट का रुख बदलने से कंपनी के बोर्ड में संभावित मतभेदों को लेकर सवाल और गहरे हुए।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि Bhatt और Advent के बीच किसी रणनीतिक या नीतिगत विवाद के कारण ही इस्तीफा हुआ। यह फिलहाल बाजार और कॉरपोरेट गवर्नेंस विशेषज्ञों की चर्चा का विषय है।

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Coforge में अब अंतरिम चेयरमैन कौन?

Bhatt के इस्तीफे के बाद Coforge ने Vivek Sharma, जो कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर हैं, को अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया है। वह 31 जनवरी 2027 तक इस जिम्मेदारी को संभालेंगे।

Bhatt ने चेयरमैन पद के साथ-साथ बोर्ड की विभिन्न समितियों से भी इस्तीफा दे दिया है। वह Coforge के चेयरमैन के रूप में जून 2024 में नियुक्त हुए थे। कंपनी के आधिकारिक रिकॉर्ड में उनकी नियुक्ति को 2024 में स्वतंत्र निदेशक और बाद में बोर्ड चेयरपर्सन के रूप में दर्ज किया गया है।

Coforge शेयरों पर पड़ा असर

Coforge Chairman Exit का तत्काल असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला। 9 सितंबर को Coforge के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई और BSE पर शेयर करीब 5.25 प्रतिशत गिरकर ₹1,847 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान इससे भी बड़ी गिरावट देखने को मिली थी।

हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि चेयरमैन के जाने से कंपनी के मूल कारोबार पर तत्काल बड़ा असर जरूरी नहीं है। Coforge ने हाल में मजबूत कारोबारी प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी के अनुसार, जून 2026 को समाप्त पहली तिमाही में राजस्व सालाना आधार पर 49 प्रतिशत और PAT 110 प्रतिशत बढ़ा था।

क्या Coforge के कारोबार पर पड़ेगा असर?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर है। निवेशक यह देखेंगे कि बोर्ड इस घटनाक्रम के बाद किस तरह पारदर्शिता और governance framework को मजबूत करता है।

कंपनी की आधिकारिक investor-relations वेबसाइट पर regulatory disclosures लगातार उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे निवेशकों को आगे के फैसलों और बोर्ड से जुड़े बदलावों पर नजर रखने में मदद मिल सकती है।

Coforge Chairman Exit सिर्फ एक वरिष्ठ चेयरमैन के अचानक इस्तीफे की खबर नहीं है, बल्कि इससे बोर्ड इवैल्यूएशन प्रक्रिया, शेयरधारकों की भूमिका और कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े हुए हैं। इंटरनल ऑडिट की चिंताओं और Advent International के विरोधी वोट ने इस घटनाक्रम को और ज्यादा महत्वपूर्ण बना दिया है। हालांकि, संभावित अंदरूनी मतभेदों की वास्तविक वजह को लेकर अभी अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। आने वाले बोर्ड फैसले और कंपनी के regulatory disclosures इस पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट कर सकते हैं।

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