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Crop Diversification Chhattisgarh: महासमुंद में 6,139 हेक्टेयर में धान की जगह बोई गईं वैकल्पिक फसलें

Crop Diversification Chhattisgarh अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और जल संरक्षण आधारित बनाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। महासमुंद जिले में धान की अधिक जल खपत वाली खेती के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का, रागी, कपास और अन्य वैकल्पिक फसलों को अपनाने की पहल का सकारात्मक असर दिखाई देने लगा है। अब तक जिले में 6,139 हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों ने धान की जगह दूसरी फसलों की बुवाई कर दी है।

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Crop Diversification Chhattisgarh: खेती को बनाया जा रहा अधिक लाभकारी

राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप महासमुंद जिले में कलेक्टर विनय लंगेह के निर्देशन में खरीफ सीजन के दौरान जनभागीदारी के साथ फसल विविधीकरण अभियान चलाया जा रहा है।

वर्ष 2026-27 के लिए जिले में 15,150 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की जगह दलहन, तिलहन और अन्य वैकल्पिक फसलों का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य तय किया गया है। प्रशासन का कहना है कि अब तक की प्रगति उत्साहजनक है और किसान नई खेती को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।


विकासखंडवार तय किए गए लक्ष्य

Crop Diversification Chhattisgarh अभियान के तहत सभी विकासखंडों के लिए अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

  • महासमुंद – 2,560 हेक्टेयर
  • बागबाहरा – 3,500 हेक्टेयर
  • पिथौरा – 2,890 हेक्टेयर
  • बसना – 2,980 हेक्टेयर
  • सरायपाली – 3,220 हेक्टेयर

कृषि विभाग इन क्षेत्रों में किसानों को फसल विविधीकरण के लाभ और वैज्ञानिक खेती की जानकारी लगातार दे रहा है।


Crop Diversification Chhattisgarh में किसानों को मिल रहा अनुदान

अभियान को सफल बनाने के लिए कृषि विभाग गांव-गांव में जागरूकता शिविर आयोजित कर रहा है। किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता, जल उपलब्धता और बाजार की मांग के आधार पर उपयुक्त फसल चुनने की सलाह दी जा रही है।

राज्य सरकार किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए—

  • सामान्य भूमि में दलहन और तिलहन की खेती पर ₹15,000 प्रति एकड़ का अनुदान दे रही है।
  • ऊंची एवं असिंचित भूमि में दलहन, तिलहन, रागी और कपास की खेती पर ₹10,000 प्रति एकड़ की विशेष सहायता प्रदान की जा रही है।

इस आर्थिक सहयोग से किसानों का भरोसा बढ़ रहा है और वे धान के विकल्प अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं।


मॉडल प्लॉट से दिखाई जा रही आधुनिक खेती

कृषि उपसंचालक एफ.आर. कश्यप ने बताया कि किसानों को गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। साथ ही विभिन्न गांवों में मॉडल प्लॉट विकसित कर यह दिखाया जा रहा है कि वैकल्पिक फसलें किस तरह बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ दे सकती हैं।

ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी किसानों के संपर्क में रहकर बीज उपचार, उर्वरक प्रबंधन, फसल चयन और वैज्ञानिक खेती से जुड़ी तकनीकी जानकारी भी उपलब्ध करा रहे हैं।


जल संरक्षण और आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

जिला प्रशासन का मानना है कि ऊंची भूमि में धान की तुलना में दलहन और तिलहन जैसी फसलें कम पानी में बेहतर उत्पादन देती हैं। इससे—

  • भूजल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
  • सिंचाई लागत कम होगी।
  • मिट्टी की उर्वरता में सुधार होगा।
  • किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार दलहनी फसलें भूमि में नाइट्रोजन स्थिरीकरण कर मिट्टी की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाती हैं, जिससे अगली फसल को भी लाभ मिलता है।


गांवों में दिखने लगा अभियान का असर

Crop Diversification Chhattisgarh अभियान का प्रभाव अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है।

महासमुंद जिले के ग्राम कस्तुरबोड़ के किसान चैन सिंह मरार ने एक हेक्टेयर भूमि में धान की जगह मक्का की खेती शुरू की है। वहीं दाबपाली, चपिया, जमदरहा, पुरुषोत्तमपुर और बोदानवापाली सहित कई गांवों में किसान दलहन, तिलहन और अन्य वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ रहे हैं।

प्रशासन का मानना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो निर्धारित लक्ष्य समय पर पूरा किया जा सकेगा।


Crop Diversification Chhattisgarh अभियान महासमुंद जिले में किसानों के लिए नई संभावनाएं लेकर आया है। धान की अधिक जल खपत वाली खेती से हटकर दलहन, तिलहन, मक्का, रागी और अन्य वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ते कदम न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेंगे, बल्कि जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता और टिकाऊ कृषि को भी मजबूती देंगे। सरकार की अनुदान योजनाएं और कृषि विभाग की तकनीकी सहायता इस अभियान को और प्रभावी बना रही हैं।