CGPSC Scam मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में OSD रहे और वर्तमान में बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में पदस्थ एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने 6 दिनों की ED रिमांड मंजूर की है।
यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, पैसों के लेन-देन और प्रभावशाली लोगों को फायदा पहुंचाने के आरोपों से जुड़ी जांच को और गंभीर बनाती है।
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चेतन बोरघरिया की गिरफ्तारी से बढ़ी हलचल
चेतन बोरघरिया का नाम CGPSC भर्ती मामले में पहले भी चर्चा में रहा है। सितंबर की शुरुआत में ED ने उनके ठिकानों पर कार्रवाई की थी। इसके बाद जांच एजेंसी की पूछताछ और जांच आगे बढ़ी और अब गिरफ्तारी की कार्रवाई सामने आई है।
बोरघरिया पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के OSD के रूप में भी काम कर चुके हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद इस मामले की जांच का राजनीतिक और प्रशासनिक असर भी चर्चा में आ गया है।
CGPSC Scam में WhatsApp Chat बनी अहम कड़ी
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक ED को चेतन बोरघरिया और मामले में आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर के बीच हुई कथित WhatsApp Chat मिली है। बताया जा रहा है कि इसी चैट को जांच की महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक माना जा रहा है।
ED अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दोनों के बीच किस तरह का संपर्क था और बातचीत का संबंध भर्ती प्रक्रिया, अभ्यर्थियों के चयन या कथित वित्तीय लेन-देन से था या नहीं।
इस पहलू की जांच इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एजेंसी CGPSC भर्ती में कथित भ्रष्टाचार के साथ-साथ पैसों के प्रवाह और उससे जुड़े लोगों की भूमिका को भी खंगाल रही है।
पूछताछ में खुल सकते हैं बड़े राज
6 दिन की ED रिमांड के दौरान चेतन बोरघरिया से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पूछताछ किए जाने की संभावना है। एजेंसी कथित लेन-देन, भर्ती प्रक्रिया में प्रभाव और संबंधित लोगों के बीच संपर्कों की जानकारी जुटा सकती है।
जांच का एक अहम सवाल यह है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी तरह का अनुचित प्रभाव या आर्थिक लेन-देन हुआ था, तो उसके पीछे कौन लोग थे और पैसा किस माध्यम से पहुंचा।
ED की जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में जुड़े अन्य अधिकारियों, बिचौलियों या प्रभावशाली लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। हालांकि किसी व्यक्ति की भूमिका या दोष सिद्ध होना अदालत के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।
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क्या है CGPSC भर्ती घोटाला?
CGPSC भर्ती घोटाला छत्तीसगढ़ की सबसे चर्चित भर्ती अनियमितता के मामलों में से एक है। मामला राज्य लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, प्रश्नपत्र लीक, भ्रष्टाचार और चयन प्रक्रिया में प्रभाव के आरोपों से जुड़ा है।
यह मामला 2021 और 2022 की राज्य सेवा परीक्षा तथा 171 पदों पर हुई भर्ती प्रक्रिया से संबंधित बताया गया है। उस समय राज्य में कांग्रेस की सरकार थी और भूपेश बघेल मुख्यमंत्री थे। टामन सिंह सोनवानी CGPSC के अध्यक्ष थे।
जांच एजेंसियां इस पूरे मामले में यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित अनियमितताओं का वास्तविक नेटवर्क कितना बड़ा था और भर्ती प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही।
युवाओं के आरोप और जांच का बढ़ता दायरा
CGPSC Scam को लेकर प्रदेश के युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों में लंबे समय से नाराजगी रही है। आरोप लगाया जाता रहा है कि योग्य उम्मीदवारों के बजाय प्रभावशाली लोगों से जुड़े अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया गया।
हालांकि ऐसे आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकलेगा। जांच एजेंसियों की कार्रवाई का उद्देश्य कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय लेन-देन की पूरी कड़ी को सामने लाना है।
सितंबर 2026 में ED पहले ही CGPSC भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामले में कार्रवाई कर चुकी है। एजेंसी ने रायपुर, दुर्ग और जशपुर में तलाशी अभियान चलाकर दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज जब्त किए थे।
आगे क्या होगा?
चेतन बोरघरिया की 6 दिन की ED रिमांड इस मामले की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब पूछताछ के दौरान कथित WhatsApp Chat, वित्तीय लेन-देन और अन्य दस्तावेजों को सामने रखकर सवाल किए जा सकते हैं।
अगर पूछताछ में नई कड़ियां सामने आती हैं तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि CGPSC भर्ती में कथित अनियमितताओं के पीछे वास्तविक नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
CGPSC Scam में चेतन बोरघरिया की गिरफ्तारी और 6 दिन की ED रिमांड ने मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। कथित WhatsApp Chat और वित्तीय लेन-देन की जांच से आने वाले दिनों में कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। अब सबकी नजर ED की पूछताछ और अदालत में सामने आने वाली जानकारी पर है। मामले में आरोपों की अंतिम सच्चाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
