हैदराबाद: सुप्रीम कोर्ट ने लगाया ब्रेक, ‘आईटी पार्क’ के नाम पर जंगल की कटाई पर रोक

हैदराबाद के यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद (UoH) के पास स्थित कांचा गच्चीबोवली क्षेत्र में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सख्त रुख अपनाते हुए तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच जिसमें न्यायमूर्ति बी आर गवई और ए जी मसीह शामिल थे, ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि, “अगले आदेश तक राज्य सरकार कोई भी गतिविधि न करे, सिवाय पहले से मौजूद पेड़ों की सुरक्षा के।”

तेलंगाना सरकार ने रविवार से इस हरित क्षेत्र में लगभग 400 एकड़ ज़मीन को समतल करने के लिए भारी मशीनरी और अर्थमूवर्स तैनात किए थे। यह ज़मीन जैव विविधता से भरपूर है, जहाँ मोर, हिरण और कई अन्य वन्य जीव निवास करते हैं। राज्य सरकार की योजना इस ज़मीन को आईटी पार्क के लिए नीलाम करने की थी, जिसे लेकर UoH के छात्र लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

गुरुवार को जब मामले की दोबारा सुनवाई हुई, तब हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार (न्यायिक) की रिपोर्ट और मौके से आई तस्वीरों ने कोर्ट को हैरान कर दिया। कोर्ट ने कहा, “वहाँ पेड़ों की भारी संख्या में कटाई हो रही है और बड़ी मशीनरी लगी है। यह अत्यंत चिंताजनक स्थिति है।”

न्यायालय ने यह भी कहा कि राज्य ने 15 मार्च को वन भूमि पहचान के लिए समिति बनाई, लेकिन उस समिति की रिपोर्ट आने से पहले ही पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई, जो दर्शाता है कि सरकार में कोई असामान्य जल्दीबाजी थी।

जब सरकार की तरफ से वरिष्ठ वकील गौरव अग्रवाल ने कहा कि वह क्षेत्र ‘वन’ नहीं है, तब न्यायमूर्ति गवई ने तीखा सवाल करते हुए पूछा, “चाहे वन हो या नहीं, क्या पेड़ काटने की जरूरी अनुमति ली गई थी?”

उन्होंने आगे कहा, “2-3 दिनों में 100 एकड़ ज़मीन साफ करना मामूली बात नहीं है। याद रखिए — कोई कितना भी ऊँचा हो, कानून से ऊपर नहीं हो सकता।”

सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना के मुख्य सचिव से हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा है कि ऐसी कौन सी ‘जरूरी परिस्थिति’ थी जिससे पेड़ों की कटाई तत्काल शुरू करनी पड़ी। साथ ही उन अधिकारियों की मौजूदगी पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है, जिनका उस स्थान पर कोई कार्य नहीं था।

कोर्ट ने इस मामले में सुओ मोटो केस दर्ज करने का आदेश भी दिया है और चेतावनी दी है कि यदि इसके किसी भी निर्देश का उल्लंघन हुआ, तो राज्य के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा।

यह हस्तक्षेप सुप्रीम कोर्ट ने तब किया जब वरिष्ठ वकील के. परमेश्वर, जो इस मामले में एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) हैं, ने पेड़ों की कटाई का मुद्दा कोर्ट के सामने उठाया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *