बीजापुर, 02 अप्रैल 2025 – वर्षों तक नक्सलवाद के अंधेरे में डूबे धरमारम गांव में अब विकास की रोशनी पहुंचने लगी है। आज़ादी के 77 साल बाद यहां पहली बार किसी परिवार को पक्के मकान में रहने का सौभाग्य मिला है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला श्रीमती गुंडी बुचमा का पक्का मकान बनकर तैयार हो गया है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण इस गांव में अब तक सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पा रहा था। डर और आतंक के माहौल में ग्रामीण झोपड़ियों में रहने को मजबूर थे। लेकिन सुरक्षा कैंप लगने के बाद हालात बदलने लगे। अब यहां प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलना शुरू हुआ और श्रीमती गुंडी बुचमा इस योजना से लाभान्वित होने वाली पहली महिला बनीं।

आतंक के साए में भी शिक्षा से जोड़ा बेटा
पति की मृत्यु के बाद भी श्रीमती गुंडी बुचमा ने हिम्मत नहीं हारी। खेती-बाड़ी कर अपने बेटे का पालन-पोषण किया और उसे दूसरे पंचायत में भेजकर 12वीं तक की शिक्षा दिलाई। यह उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि रही।
श्रीमती गुंडी बुचमा के पुत्र ने कहा, “माओवाद के डर से हमारा जीवन झोपड़ी में बिना बिजली, सड़क और पानी के कट रहा था। लेकिन अब हमारा पक्का मकान बन गया है। सुरक्षा कैंप लगने के बाद धीरे-धीरे हालात बदल रहे हैं। मैं शासन-प्रशासन का धन्यवाद करता हूं।”
ग्राम पंचायत के अधिकारियों के अनुसार, “गांव में अब विकास की नई राह खुल रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब और भी लोगों को पक्के मकान दिए जाएंगे, जिससे ग्रामीणों का जीवन स्तर सुधरेगा।”
धरमारम गांव में यह पक्का आवास सच्ची आज़ादी का प्रतीक बनकर उभरा है। वर्षों बाद ग्रामीणों को यह एहसास हो रहा है कि अब उनका गांव भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ने जा रहा है।
