Durg News — छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है। 22 मार्च 2026 को उल्लास साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान आंकलन परीक्षा का सफल आयोजन किया गया, जिसने पूरे जिले में एक नई उम्मीद और उत्साह की लहर पैदा कर दी। यह परीक्षा न केवल शिक्षा के प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह उन लाखों लोगों के सपनों को साकार करने की कोशिश है जो किसी कारणवश औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए।
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परीक्षा का शुभारंभ और महत्व
उल्लास साक्षरता कार्यक्रम भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका उद्देश्य 18 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के उन नागरिकों को साक्षर बनाना है, जो अब तक पढ़ने-लिखने में असमर्थ थे।
दुर्ग जिले में इस कार्यक्रम के तहत स्वयंसेवी शिक्षकों के माध्यम से इन शिक्षार्थियों को 200 घंटे का अध्यापन कराया गया। इसके बाद 22 मार्च 2026 को उनकी परीक्षा आयोजित की गई।
Durg News की रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा का समय प्रातः 10 बजे से शाम 5 बजे तक रखा गया, जिसमें प्रत्येक शिक्षार्थी को 3 घंटे का समय आवंटित था। यह समयसीमा शिक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए निर्धारित की गई थी।
राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट → https://www.nios.ac.in

316 केंद्रों पर उल्लासमय माहौल
तीनों विकासखंडों में उत्साह का सैलाब
Durg News के अनुसार, जिले के तीनों विकासखंडों — धमधा, पाटन और दुर्ग — में परीक्षा हेतु कुल 316 केंद्र बनाए गए।
हर केंद्र का माहौल किसी उत्सव से कम नहीं था। परीक्षार्थियों का स्वागत किया गया:
- तिलक लगाकर — परंपरागत भारतीय अभिवादन के साथ
- फूल-माला पहनाकर — सम्मान और प्रोत्साहन का प्रतीक
- बैंड-बाजे के साथ — उत्सव जैसा वातावरण बनाकर
यह नज़ारा यह बताता है कि साक्षरता केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह एक सामाजिक आंदोलन बनता जा रहा है।
Ministry of Education, Govt. of India → https://ullas.education.gov.in
80 वर्षीय बुजुर्गों का उत्साह — प्रेरणादायक नज़ारा
उम्र नहीं रोक सकी सीखने की ललक
Durg News में सबसे दिल को छूने वाली खबर यह रही कि परीक्षा केंद्रों में 18 से लेकर 80-85 वर्ष तक के बुजुर्ग भी बड़ी गंभीरता और लगन के साथ प्रश्न पत्र हल करते देखे गए।
परिवारों ने मिलकर दी परीक्षा
कुछ केंद्रों पर और भी मनोरम दृश्य देखने को मिले:
- पति-पत्नी एक साथ बैठकर परीक्षा देते हुए
- सास-बहू कंधे से कंधा मिलाकर प्रश्न हल करते हुए
- माँ अपने बच्चे को गोद में बैठाकर परीक्षा देते हुए
ये दृश्य यह संदेश देते हैं कि शिक्षा की कोई उम्र नहीं होती और यह पूरे परिवार को एक सूत्र में बाँध सकती है।
घर-घर संपर्क और अनूठे आमंत्रण
परीक्षा को बनाया उत्सव
परीक्षा से पहले शिक्षार्थियों को तैयार करने और उन्हें केंद्र तक लाने के लिए अनोखे तरीकों का इस्तेमाल किया गया।
Durg News के अनुसार घर-घर संपर्क अभियान के तहत:
- कहीं पीले चावल देकर परीक्षा के लिए आमंत्रित किया गया — यह छत्तीसगढ़ की परंपरागत शुभ परंपरा है
- कहीं विद्यार्थियों ने खुद हाथ से आमंत्रण कार्ड बनाकर शिक्षार्थियों को बुलाया
- कहीं तिलक लगाकर परीक्षा तिथि की याद दिलाई गई
यह समुदायिक सहभागिता इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी ताकत है।
मॉनिटरिंग और जिला अधिकारियों की भूमिका
हर केंद्र पर रही कड़ी निगरानी
परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए जिला, विकासखंड एवं संकुल स्तर पर मॉनिटरिंग दल गठित किए गए।
Durg News की रिपोर्ट के अनुसार निम्नलिखित अधिकारियों ने विभिन्न केंद्रों का निरीक्षण किया:
| अधिकारी | पद | निरीक्षण क्षेत्र |
|---|---|---|
| श्री अरविंद कुमार मिश्रा | जिला शिक्षा अधिकारी | विकासखंड धमधा |
| डॉ. पुष्पा पुरुषोत्तम | जिला नोडल अधिकारी | विकासखंड पाटन |
| श्री विनोद सिन्हा | जिला मिशन समन्वयक | विकासखंड दुर्ग |
| डॉ. विश्वनाथ पाणिग्रही | ब्रांड एंबेसडर, उल्लास | विभिन्न केंद्र |
सभी स्तर के अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी ने परीक्षा को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया।
NIOS प्रमाण पत्र और परीक्षा का प्रारूप
राष्ट्रीय मान्यता मिलेगी साक्षरता को
यह परीक्षा NIOS — National Institute of Open Schooling (राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान) द्वारा आयोजित की जाती है।
Durg News के पाठकों को बता दें कि परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले शिक्षार्थियों को NIOS द्वारा साक्षरता प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा — यह एक राष्ट्रीय स्तर की मान्यता है।
परीक्षा का प्रारूप — तीन खंड
प्रश्न पत्र में तीन खंड होते हैं:
- पढ़ना — अक्षर, शब्द और वाक्य पहचानने की क्षमता
- लिखना — अपना नाम, सरल शब्द और वाक्य लिखना
- गणितीय कौशल — बुनियादी जोड़-घटाव और अंकों की पहचान
यह प्रारूप यह सुनिश्चित करता है कि साक्षरता केवल नाम लिखने तक सीमित न रहे, बल्कि व्यावहारिक जीवन में उपयोगी हो।
निष्कर्ष — दुर्ग जिले की साक्षरता में नई उड़ान
Durg News में आज की यह खबर सिर्फ एक परीक्षा की रिपोर्ट नहीं है — यह उन हजारों लोगों के संघर्ष और जीत की कहानी है जिन्होंने उम्र, परिस्थिति और सामाजिक बाधाओं को पार कर ज्ञान का दामन थामा।
316 केंद्रों पर उल्लासमय वातावरण, 80 वर्षीय बुजुर्गों का जोश, माँ का गोद में बच्चे को लेकर परीक्षा देना — ये सब दृश्य यह साबित करते हैं कि दुर्ग जिला साक्षरता की दिशा में एक मिसाल कायम कर रहा है।
उल्लास साक्षरता कार्यक्रम और NIOS के संयुक्त प्रयासों से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि भारत के हर नागरिक को पढ़ने-लिखने का अधिकार मिले। दुर्ग न्यूज़ ऐसे सकारात्मक बदलावों को आगे लाता रहेगा।
