E Procurement System के जरिए सरकारी खरीद को पारदर्शी और तेज बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने एक बड़ा कदम उठाया है। राजधानी रायपुर के सिविल लाइन्स स्थित न्यू सर्किट हाउस में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू हुई।
इस कार्यशाला में राज्य के विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए। उन्हें नई डिजिटल खरीद प्रणाली के उपयोग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
दरअसल सरकार का उद्देश्य सरकारी टेंडर प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। इसलिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र और चिप्स के संयुक्त प्रयास से यह पहल शुरू की गई है।
E Procurement System से सरकारी खरीद में बढ़ेगी पारदर्शिता
E Procurement System पर आयोजित इस कार्यशाला में राज्य के 50 से अधिक विभागों के नोडल अधिकारी शामिल हुए। पहले दिन लोक कल्याण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जल संसाधन विभाग, गृहनिर्माण विभाग और पर्यटन विभाग के अधिकारी प्रशिक्षण में पहुंचे।
इस प्रशिक्षण का नेतृत्व राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) नई दिल्ली की उप-महासंचालक उषा सक्सेना कर रही हैं। उनके साथ पांच सदस्यीय विशेषज्ञ दल भी रायपुर पहुंचा है।
कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रभात मलिक ने कहा कि राज्य में पिछले दस वर्षों से ई-खरीद प्रणाली काम कर रही है। हालांकि अब इसे और आधुनिक बनाने के लिए नई जेपनिक प्रोक्योरमेंट प्रणाली लागू की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इस नई प्रणाली से सरकारी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही बढ़ेगी। वहीं अधिकारी भी डिजिटल माध्यम से तेजी से टेंडर प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।
दूसरी ओर उषा सक्सेना ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की डिजिटल गवर्नेंस नीति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसी भी टेंडर प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण तत्व पारदर्शिता और समान अवसर होता है।
दरअसल जेपनिक ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली इन सभी मानकों को पूरा करती है। इसी कारण देशभर में इसे तेजी से अपनाया जा रहा है।
यह भी पढ़ें: Chhattisgarh Tourism FAM Trip 28 टूर ऑपरेटरों का शानदार अनुभव
सरकारी डिजिटल सेवाओं से जुड़ी जानकारी आधिकारिक पोर्टल
https://www.india.gov.in
और
https://pib.gov.in
पर भी उपलब्ध रहती है।

डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में बड़ा कदम
छत्तीसगढ़ सरकार पिछले कुछ वर्षों से डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है। ई-ऑफिस, डिजिटल फाइल सिस्टम और ऑनलाइन सेवाओं जैसी कई पहल पहले ही लागू हो चुकी हैं।
हालांकि सरकारी खरीद प्रणाली लंबे समय तक कागजी प्रक्रिया पर निर्भर रही। इससे टेंडर प्रक्रिया धीमी हो जाती थी और पारदर्शिता पर भी सवाल उठते थे।
इसी समस्या को दूर करने के लिए ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली विकसित की गई। यह एक केंद्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिससे सरकारी विभाग ऑनलाइन टेंडर जारी कर सकते हैं।
वर्तमान में देश के 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रणाली उपयोग में लाई जा रही है। इसलिए छत्तीसगढ़ में इसका विस्तार डिजिटल प्रशासन को और मजबूत करेगा।
Key Facts: E Procurement System
• E Procurement System पर प्रशिक्षण कार्यशाला रायपुर में 2 दिनों तक आयोजित की जा रही है।
• इस कार्यशाला में 50 से अधिक विभागों के करीब 130 नोडल अधिकारी शामिल हुए हैं।
• प्रशिक्षण में डिजिटल सिग्नेचर, ई-ऑक्शन, टेंडर प्रिपरेशन और प्राइस बिड जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है।
• राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र की उप-महासंचालक उषा सक्सेना प्रशिक्षण का नेतृत्व कर रही हैं।
• भविष्य में इस प्रणाली के माध्यम से राज्य की सभी सरकारी खरीद प्रक्रियाएं डिजिटल होंगी।
Impact & Reactions
इस कार्यशाला को प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि नई प्रणाली से सरकारी खरीद प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होगी।
दरअसल कई बार पारंपरिक टेंडर प्रक्रिया में देरी और तकनीकी समस्याएं सामने आती थीं। अब डिजिटल प्रणाली के जरिए यह प्रक्रिया काफी आसान हो जाएगी।
इसके अलावा अधिकारियों को प्रशिक्षण के दौरान कई केस स्टडी भी दिखाई गईं। इनमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस और मेट्रो रेल जैसे संस्थानों के उदाहरण शामिल थे।
इन उदाहरणों से अधिकारियों को समझाया गया कि डिजिटल प्रोक्योरमेंट सिस्टम कैसे बड़े प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने में मदद करता है।
दूसरी ओर विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रणाली से सरकारी खरीद में भ्रष्टाचार की संभावना भी कम होगी। क्योंकि हर प्रक्रिया डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज रहेगी।
E Procurement System छत्तीसगढ़ में डिजिटल सुशासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। रायपुर में आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला ने सरकारी अधिकारियों को नई तकनीक से परिचित कराया है।
अगर यह प्रणाली प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो आने वाले समय में सरकारी टेंडर प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज हो सकती है। यही कारण है कि E Procurement System को राज्य में डिजिटल प्रशासन का नया आधार माना जा रहा है।
