Skip to main content

4thnation

White Krait Rescue: दुर्ग में मिला दुर्लभ श्वेतवर्णी करैत, वन विभाग ने सुरक्षित किया रेस्क्यू

White Krait Rescue के तहत छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक बेहद दुर्लभ श्वेतवर्णी (ल्यूसिस्टिक) करैत सर्प मिलने का मामला सामने आया है। चरोदा क्षेत्र के पंचशील नगर स्थित एक घर से इस दुर्लभ सर्प का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया। वन विभाग, सर्प विशेषज्ञों और प्रशिक्षित सर्प रेस्क्यूअर की संयुक्त टीम ने सर्प को सुरक्षित बचाकर राजनांदगांव वनमंडल के प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया।

👉 हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j


White Krait Rescue: पंचशील नगर के घर से मिला दुर्लभ सर्प

वनमंडलाधिकारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार 21 जुलाई 2026 को चरोदा के पंचशील नगर स्थित एक घर में सफेद रंग के सांप के होने की सूचना वन विभाग को मिली।

सूचना मिलते ही दुर्ग वनमंडल की टीम और प्रशिक्षित सर्प रेस्क्यूअर विजय शर्मा मौके पर पहुंचे। पूरी सावधानी के साथ सर्प का रेस्क्यू किया गया। प्रारंभिक जांच में यह अत्यंत दुर्लभ श्वेतवर्णी करैत (Leucistic Krait) पाया गया।


ल्यूसिस्टिक करैत क्या होता है?

विशेषज्ञों के अनुसार इस सर्प का सफेद रंग ल्यूसिज्म (Leucism) नामक आनुवंशिक अवस्था के कारण होता है।

रंगद्रव्य की कमी से बदल जाता है रंग

ल्यूसिज्म ऐसी आनुवंशिक स्थिति है जिसमें शरीर में मेलानिन (Melanin) नामक रंगद्रव्य की कमी हो जाती है। इसी वजह से सामान्यतः काले और पीले रंग का दिखने वाला करैत सफेद रंग का दिखाई देता है।

यह स्थिति एल्बिनिज्म (Albinism) से अलग होती है। ल्यूसिस्टिक जीवों में आंखों का रंग सामान्य रह सकता है, जबकि एल्बिनो जीवों में आंखें भी प्रभावित होती हैं।

यह भी पढ़ें: Illegal Fertilizer Raid: दुर्ग में अवैध खाद-कीटनाशक कारोबार पर बड़ी कार्रवाई, दो मामलों में FIR दर्ज


White Krait Rescue: दक्षिण एशिया में बेहद दुर्लभ है यह प्रजाति

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार का श्वेतवर्णी करैत अत्यंत दुर्लभ होता है। दक्षिण एशिया में इसके बहुत कम प्रमाणित रिकॉर्ड उपलब्ध हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में अब तक महाराष्ट्र और ओडिशा के कुछ मामलों में ही ऐसे करैत मिलने की जानकारी दर्ज है। नेपाल के कुछ क्षेत्रों से भी इसके मिलने की सूचना मिल चुकी है।

दुर्ग में इस दुर्लभ सर्प का मिलना वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


विशेषज्ञों ने की पुष्टि

सर्प विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत परीक्षण के बाद पुष्टि की गई कि यह वास्तव में श्वेतवर्णी (ल्यूसिस्टिक) करैत है।

इसके बाद दुर्ग वनमंडलाधिकारी दिपेश कपिल के निर्देश पर आगे की प्रक्रिया शुरू की गई।


राजनांदगांव के प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया

23 जुलाई 2026 को दुर्ग वनमंडल के आर.ए. प्रमोद यादव, सर्प मित्र विजय शर्मा और सर्प विशेषज्ञ अविनाश मौर्या की टीम ने इस दुर्लभ सर्प को राजनांदगांव वनमंडल के आर.एफ. 549 स्थित प्राकृतिक पर्यावास में सुरक्षित छोड़ दिया।

वन विभाग ने बताया कि वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ना संरक्षण की दृष्टि से सबसे उचित कदम है।


वन विभाग की नागरिकों से अपील

वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी घर, खेत या आसपास सांप अथवा अन्य वन्यजीव दिखाई दें तो उन्हें नुकसान न पहुंचाएं।

ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित सर्प रेस्क्यूअर को सूचना दें, ताकि वन्यजीवों और लोगों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।


जैव विविधता संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण घटना

विशेषज्ञों का कहना है कि White Krait Rescue जैसी घटनाएं वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं। दुर्लभ प्रजातियों का सुरक्षित संरक्षण न केवल जैव विविधता को मजबूत करता है, बल्कि वैज्ञानिक अध्ययन के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।


White Krait Rescue दुर्ग जिले के लिए एक महत्वपूर्ण वन्यजीव संरक्षण उपलब्धि है। अत्यंत दुर्लभ श्वेतवर्णी करैत का सुरक्षित रेस्क्यू और उसे प्राकृतिक आवास में छोड़ना वन विभाग की तत्परता तथा विशेषज्ञों की दक्षता को दर्शाता है। नागरिकों की सतर्कता और वन विभाग के सहयोग से ऐसे दुर्लभ वन्यजीवों का संरक्षण संभव है। White Krait Rescue यह संदेश भी देता है कि किसी भी वन्यजीव को नुकसान पहुंचाने के बजाय उसकी सूचना संबंधित विभाग को देना ही सही कदम है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *