Surajpur Hospital Viral Video ने छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में हलचल मचा दी है। सूरजपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लटोरी में ड्यूटी के दौरान शराब और चिकन पार्टी करने का मामला सामने आया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए फार्मासिस्ट और वार्ड बॉय को निलंबित कर दिया है। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
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Surajpur Hospital Viral Video में क्या दिखा?
वायरल वीडियो में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लटोरी के एक कमरे में अस्पताल के कर्मचारी ड्यूटी के दौरान शराब और चिकन पार्टी करते नजर आ रहे हैं।
बताया गया है कि पार्टी में अस्पताल के फार्मासिस्ट रंजीत जायसवाल, वार्ड बॉय प्रेम कुशवाहा और उनके कुछ अन्य साथी भी मौजूद थे। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
सीएमएचओ ने की तत्काल कार्रवाई
Surajpur Hospital Viral Video सामने आने के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. कपिल देव पैकरा ने मामले को गंभीरता से लिया।
उन्होंने तत्काल प्रभाव से फार्मासिस्ट रंजीत जायसवाल और वार्ड बॉय प्रेम कुशवाहा को निलंबित कर दिया। सीएमएचओ ने स्पष्ट कहा कि प्रथम दृष्टया कर्मचारियों का आचरण सेवा नियमों के विपरीत पाया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि मामले में विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
Surajpur Hospital Viral Video के बाद ग्रामीणों में आक्रोश
वीडियो वायरल होने के बाद लटोरी और आसपास के ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल मरीजों की सेवा के लिए होते हैं, लेकिन यदि ड्यूटी के दौरान कर्मचारी शराब पार्टी करेंगे तो स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है ताकि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
स्वास्थ्य विभाग ने दिए सख्त संकेत
Surajpur Hospital Viral Video के बाद स्वास्थ्य विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि सरकारी अस्पतालों में अनुशासनहीनता किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार, यदि जांच में अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सेवा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सेवा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
सरकारी अस्पतालों में अनुशासन क्यों जरूरी?
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ड्यूटी के दौरान अनुशासनहीनता से न केवल स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं, बल्कि आम जनता का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा भी कमजोर पड़ता है। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई से व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ती है।
Surajpur Hospital Viral Video ने सरकारी अस्पतालों में कार्य संस्कृति और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सीएमएचओ द्वारा दो कर्मचारियों को तत्काल निलंबित करना यह दर्शाता है कि स्वास्थ्य विभाग ऐसे मामलों में सख्त रुख अपना रहा है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद यदि अन्य तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ और भी कठोर कार्रवाई की जा सकती है।
