4thnation

Ramgarh Mining Protest: नई खदानों के विरोध में सरगुजा में गूंजा आंदोलन

Ramgarh Mining Protest को लेकर शनिवार को सरगुजा जिले के रामगढ़ में हजारों लोगों की मौजूदगी में एक बड़ी परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में केते एक्सटेंशन खदान सहित प्रस्तावित नई खनन परियोजनाओं के विरोध में आवाज बुलंद की गई।

सभा में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे ग्रामीण शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान प्रदेशभर में खनन परियोजनाओं के विरोध में लोकतांत्रिक आंदोलन चलाने की बात कही गई।

📢 Join 4thNation WhatsApp Channel


Ramgarh Mining Protest की वजह क्या है?

परिचर्चा में शामिल लोगों का कहना है कि केते एक्सटेंशन खदान सहित नई खदानों को स्वीकृति मिलने से रामगढ़ क्षेत्र के प्राकृतिक और ऐतिहासिक अस्तित्व पर असर पड़ सकता है।

वक्ताओं ने कहा कि क्षेत्र में बढ़ती खनन गतिविधियों से जंगल, जल स्रोत और पर्यावरण पर दबाव बढ़ने की आशंका है। इसी चिंता को लेकर स्थानीय लोग और विभिन्न संगठन एक मंच पर आए हैं।


Ramgarh Mining Protest पर टीएस सिंहदेव ने क्या कहा?

पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता है और खनन परियोजनाओं को लेकर स्थानीय लोगों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पहले हसदेव क्षेत्र में सीमित खदानों को मंजूरी दी गई थी, लेकिन अब कई नई परियोजनाएं सामने आ रही हैं। उनके अनुसार, रामगढ़ क्षेत्र के संरक्षण के लिए लोगों को एकजुट होकर अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखनी चाहिए।

प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर

टीएस सिंहदेव ने कहा कि जंगल, जल स्रोत और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना जरूरी है। उन्होंने स्थानीय लोगों से पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक रहने की अपील भी की।

यह भी पढ़ें: Mahak Narwase Vice Captain: छत्तीसगढ़ की बेटी ने रचा नया इतिहास


Ramgarh Mining Protest में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज का बयान

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि प्रदेश में जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा को लेकर व्यापक जनजागरूकता की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि बस्तर से लेकर सरगुजा तक विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय समुदाय अपनी प्राकृतिक संपदाओं के संरक्षण की मांग उठा रहे हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन चलाने की बात कही।

📢 Join 4thNation WhatsApp Channel


हसदेव बचाव मंच ने रखे अपने तर्क

हसदेव बचाव मंच के प्रतिनिधि आलोक शुक्ला ने दावा किया कि प्रस्तावित खनन परियोजनाओं से बड़े क्षेत्र में पेड़ों की कटाई हो सकती है।

पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंता

उनका कहना था कि यदि भविष्य में अन्य कोल ब्लॉकों में भी खनन कार्य बढ़ता है, तो जंगल और जल स्रोतों पर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने लोगों से पर्यावरण संरक्षण के लिए एकजुट रहने की अपील की।


आंदोलन को विभिन्न संगठनों का समर्थन

कार्यक्रम में सर्व आदिवासी समाज, रामगढ़ संरक्षण एवं संवर्धन समिति और अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे।

यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी मनीष शर्मा ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग और संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है तथा स्थानीय लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण है।

बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीण

परिचर्चा में उदयपुर ब्लॉक, लखनपुर, अंबिकापुर, सीतापुर, बतौली, मैनपाट, प्रेमनगर, श्रीनगर, सूरजपुर और अन्य क्षेत्रों से बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।


जल, जंगल और जमीन पर बढ़ी बहस

खनन परियोजनाओं को लेकर एक ओर विकास और रोजगार की संभावनाओं की चर्चा होती है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय संसाधनों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि विकास परियोजनाओं में पर्यावरणीय नियमों और स्थानीय समुदायों की चिंताओं को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।


Ramgarh Mining Protest ने सरगुजा में खनन परियोजनाओं और पर्यावरण संरक्षण को लेकर नई बहस छेड़ दी है। परिचर्चा में शामिल नेताओं और सामाजिक संगठनों ने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण की बात कही, जबकि स्थानीय लोगों ने भी अपनी चिंताएं सामने रखीं।

आने वाले समय में इस मुद्दे पर प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। Ramgarh Mining Protest फिलहाल प्रदेश की प्रमुख चर्चाओं में शामिल हो गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *