Lokjatan Samman 2026 के तहत मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित एक गरिमामय समारोह में देश के वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र शर्मा (नई दिल्ली) को सम्मानित किया गया। 24 जुलाई 2026 की शाम दुष्यंत कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय में आयोजित इस कार्यक्रम में पत्रकारिता, मीडिया की वर्तमान चुनौतियों और समाज में फिल्मों की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
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Lokjatan Samman 2026: राजेंद्र शर्मा को मिला सम्मान
Lokjatan Samman 2026 समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ व्यंग्यकार एवं कवि वीरेन्द्र जैन ने की। इस अवसर पर प्रदेश के वरिष्ठ संपादकों में से एक डॉ. राम विद्रोही ने राजेंद्र शर्मा को सम्मान पत्र प्रदान किया।
राजेंद्र शर्मा वर्ष 1979 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से शिक्षा पूरी करने के बाद से जनपक्षधर और परिवर्तनकामी पत्रकारिता से जुड़े रहे हैं। वे कई पुस्तकों के लेखक, अनेक समाचार पत्रों के स्तंभकार, विभिन्न प्रकाशनों के संपादक तथा ‘लोकलहर’ के संपादक हैं। उन्होंने अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत भी इसी अखबार से की थी।
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मीडिया की वर्तमान स्थिति पर जताई चिंता
Lokjatan Samman 2026 में अपने संबोधन के दौरान राजेंद्र शर्मा ने मीडिया की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के समय भारतीय मीडिया ने देश को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उस दौर में कई प्रमुख नेता स्वयं समाचार पत्रों का संपादन करते थे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मीडिया के एक बड़े हिस्से को जनता के विरोध और अविश्वास का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में मुख्यधारा के मीडिया की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।
राजेंद्र शर्मा ने यह भी कहा कि बड़े पूंजी समूहों के प्रभाव और बदलते राजनीतिक-सामाजिक माहौल ने मीडिया की स्वतंत्रता को प्रभावित किया है। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद कई स्वतंत्र पत्रकार, डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म और युवा पत्रकार जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठा रहे हैं।
कमल शुक्ला ने जनपक्षधर पत्रकारिता पर रखा जोर
समारोह में वर्ष 2020 के लोकजतन सम्मान से सम्मानित छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला को भी सम्मान पत्र प्रदान किया गया।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पत्रकारिता केवल समाचार लिखने का माध्यम नहीं, बल्कि जनता से जुड़ाव और सामाजिक जिम्मेदारी का भी दायित्व है।
कमल शुक्ला ने कहा कि सच्ची पत्रकारिता वही है जो समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज़ को सामने लाने का प्रयास करे।
लोकजतन सम्मान की परंपरा क्या है?
लोकजतन के संपादक बादल सरोज ने बताया कि यह सम्मान हर वर्ष लोकजतन के संस्थापक-संपादक शैलेन्द्र शैली की जयंती 24 जुलाई को प्रदान किया जाता है।
उन्होंने बताया कि यह सम्मान उन पत्रकारों को दिया जाता है जिन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता दी है।
इस सम्मान से अब तक डॉ. राम विद्रोही, कमल शुक्ला, लज्जा शंकर हरदेनिया, अनुराग द्वारी, राकेश अचल, पलाश सुरजन और दिवंगत पत्रकार मुकेश चंद्राकर सहित कई पत्रकार सम्मानित हो चुके हैं।
Lokjatan Samman 2026 के साथ शुरू हुई शैली स्मृति व्याख्यानमाला
समारोह के साथ ही शैलेन्द्र शैली स्मृति व्याख्यानमाला-2026 की शुरुआत भी हुई।
इस श्रृंखला का पहला व्याख्यान प्रख्यात फिल्म समीक्षक और कला-संस्कृति अध्येता जवरीमल्ल पारख ने दिया।
फिल्मों के प्रभाव पर जवरीमल्ल पारख के विचार
अपने व्याख्यान में जवरीमल्ल पारख ने कहा कि फिल्मों का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है और उनका उपयोग सकारात्मक या नकारात्मक दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कुछ फिल्मों के माध्यम से इतिहास और सामाजिक विषयों की अलग-अलग व्याख्याएं प्रस्तुत की जाती हैं। साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कई फिल्में आज भी सामाजिक सरोकारों और संवेदनशील मुद्दों को प्रभावी ढंग से सामने ला रही हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सिनेमा को समाज में संवाद और जागरूकता का माध्यम बने रहना चाहिए।
7 अगस्त तक चलेगी व्याख्यान श्रृंखला
आयोजकों के अनुसार शैली स्मृति व्याख्यानमाला अब 7 अगस्त 2026 तक चलेगी।
इस दौरान मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में तीन दर्जन से अधिक सेमिनार, संवाद और व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता पूषण भट्टाचार्य के परिचयात्मक संबोधन से हुई, जबकि मंच पर वंदना शर्मा भी उपस्थित रहीं।
Lokjatan Samman 2026 केवल सम्मान समारोह नहीं बल्कि पत्रकारिता, मीडिया की विश्वसनीयता, जनपक्षधर लेखन और समाज में सिनेमा की भूमिका पर गंभीर विमर्श का मंच भी बना। वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र शर्मा का सम्मान, कमल शुक्ला के विचार और जवरीमल्ल पारख का व्याख्यान इस आयोजन की प्रमुख विशेषताएं रहीं। ऐसे कार्यक्रम पत्रकारिता और सामाजिक संवाद को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
