Nursing College Recruitment मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 100% महिला आरक्षण को पहले ही असंवैधानिक घोषित कर रद्द किया जा चुका है, लेकिन करीब तीन वर्ष बाद भी पुरुष अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया। इस पर हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के सचिव डी. राहुल वेंकट को अवमानना नोटिस जारी किया है।
हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई पांच सप्ताह बाद होगी।
Nursing College Recruitment में क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 8 दिसंबर 2021 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) ने सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में डिमॉन्स्ट्रेटर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर सीधी भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था।
भर्ती नियम-2013 के तहत जारी इस विज्ञापन में केवल महिला अभ्यर्थियों को आवेदन करने की अनुमति दी गई थी। पुरुष अभ्यर्थियों को आवेदन से पूरी तरह बाहर रखा गया था।
100% महिला आरक्षण को हाईकोर्ट में दी गई चुनौती
Nursing College Recruitment के इस नियम को अभय कुमार किस्पोट्टा, डॉ. अजय त्रिपाठी, एलयुस एक्का और आदित्य सिंह ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि जब बीएससी नर्सिंग और एमएससी नर्सिंग पाठ्यक्रमों में पुरुष और महिला दोनों को समान रूप से प्रवेश मिलता है, तो शिक्षण पदों पर केवल महिलाओं को अवसर देना संविधान के समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
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सरकार ने कोर्ट में क्या दलील दी थी?
राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा था कि अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और नर्सिंग सेवाओं में महिलाओं की भूमिका अधिक होती है।
सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 15(3) का हवाला देते हुए कहा कि महिलाओं और बच्चों के हित में विशेष प्रावधान करना राज्य का अधिकार है। इसलिए इन पदों पर केवल महिला अभ्यर्थियों को अवसर देना उचित है।
Nursing College Recruitment में हाईकोर्ट का फैसला
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 100% महिला आरक्षण को असंवैधानिक घोषित करते हुए इसे रद्द कर दिया था।
कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि भर्ती प्रक्रिया में पुरुष अभ्यर्थियों को भी शामिल किया जाए और भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन किए जाएं।
Nursing College Recruitment पर तीन साल बाद भी नहीं हुआ आदेश का पालन
हाईकोर्ट के फैसले के लगभग तीन वर्ष बाद भी स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने संशोधित भर्ती विज्ञापन जारी नहीं किया।
हाईकोर्ट के निर्णय के 15 मार्च 2023 को मात्र छह दिन बाद CGPSC के उप सचिव ने चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर संशोधित मांगपत्र और नए भर्ती नियम भेजने का अनुरोध किया था, ताकि नियमित भर्ती पूरी की जा सके।
इसके बावजूद विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अभ्यर्थियों ने 1 जून 2023 को भी आवेदन देकर नियमों में संशोधन की मांग की, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
नियमित भर्ती रुकी, संविदा भर्ती का विज्ञापन जारी
इस बीच 22 जून 2026 को चिकित्सा शिक्षा आयुक्त ने सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और डिमॉन्स्ट्रेटर के पदों पर संविदा भर्ती का नया विज्ञापन जारी कर दिया।
याचिकाकर्ताओं ने इसे हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना बताते हुए अवमानना याचिका दायर की। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया और CGPSC सचिव डी. राहुल वेंकट को अवमानना नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया।
अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों से निर्धारित समय में जवाब दाखिल करने को कहा है। अगली सुनवाई पांच सप्ताह बाद होगी, जिसमें यह देखा जाएगा कि कोर्ट के पूर्व आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया और भर्ती प्रक्रिया में संशोधन अब तक लंबित क्यों है।
यदि अदालत को जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
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Nursing College Recruitment मामला अब केवल भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह न्यायालय के आदेशों के पालन और प्रशासनिक जवाबदेही का भी विषय बन गया है। हाईकोर्ट पहले ही 100% महिला आरक्षण को असंवैधानिक घोषित कर चुका है। अब अवमानना नोटिस के बाद सभी की नजर अगली सुनवाई पर रहेगी, जहां यह स्पष्ट होगा कि सरकार अदालत के आदेशों का पालन कब और किस तरह करेगी। Nursing College Recruitment से जुड़े हजारों अभ्यर्थी भी इस मामले के अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।
