Millet Chikki Scheme को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण मांगा है। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (PM Poshan Shakti Nirman) योजना के तहत 20 ग्राम मिलेट चिक्की (मिलेट बार) केवल सात जिलों के विद्यार्थियों को दिए जाने के फैसले पर अदालत ने सवाल उठाया है। हाईकोर्ट ने पूछा है कि राज्य के अन्य जिलों के बच्चों को इस अतिरिक्त पोषण लाभ से क्यों वंचित रखा गया है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मिड-डे मील योजना के क्रियान्वयन से संबंधित स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से अगली सुनवाई तक स्पष्ट जवाब देने का निर्देश दिया है।
Millet Chikki Scheme सिर्फ 7 जिलों तक सीमित क्यों?
राज्य सरकार की ओर से मुख्य सचिव द्वारा दायर हलफनामे में बताया गया कि 18 जून 2026 को राज्य स्तरीय संचालन एवं निगरानी समिति की बैठक में स्कूलों के भोजन की पोषण गुणवत्ता बढ़ाने के लिए प्रत्येक विद्यार्थी को सप्ताह में तीन दिन 20 ग्राम मिलेट चिक्की देने का निर्णय लिया गया।
हालांकि यह सुविधा फिलहाल केवल नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत आने वाले पांच जिलों तथा जशपुर और रायगढ़ सहित कुल सात जिलों तक सीमित रखी गई है।
सुनवाई के दौरान न्यायालय के एमिकस क्यूरी ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि राज्य के शेष जिलों के विद्यार्थियों को अतिरिक्त पोषण सहायता से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।
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Millet Chikki Scheme पर सरकार से मांगा गया जवाब
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस संबंध में आवश्यक निर्देश प्राप्त किए जाएंगे और योजना को अन्य जिलों तक विस्तारित करने के मुद्दे पर विचार किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए अगली सुनवाई में सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि Millet Chikki Scheme पूरे राज्य में लागू क्यों नहीं की गई।
### PM पोषण योजना के तहत सरकार के अन्य बड़े फैसले
मुख्य सचिव के हलफनामे में बताया गया कि प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कई प्रशासनिक और तकनीकी सुधारों को मंजूरी दी गई है।
इनमें प्रमुख निर्णय शामिल हैं—
- “न्योता भोजन” पहल के तहत सामुदायिक भागीदारी बढ़ाना।
- PM पोषण पोर्टल पर स्कूलों के अद्यतन आंकड़े दर्ज करना।
- कूपन आधारित खाद्यान्न वितरण प्रणाली की जगह डिजिटल आवंटन लागू करना।
- शिक्षकों द्वारा डिजिटल रसीद (Acknowledgement) की व्यवस्था शुरू करना।
- जिला एवं विकासखंड स्तर के प्रदर्शन संकेतकों को सार्वजनिक करना।
- दालों की वार्षिक आवश्यकता का वैज्ञानिक आकलन कर समय पर खरीद सुनिश्चित करना।
56 हजार से अधिक स्कूलों के लिए ₹783.92 करोड़ की कार्ययोजना
सरकार ने अदालत को बताया कि 2026-27 के लिए भौतिक एवं वित्तीय कार्ययोजना स्वीकृत की गई है।
इस योजना में शामिल हैं—
- 56,254 स्कूल
- लगभग 27.15 लाख विद्यार्थी
- 240 कार्य दिवस
- 93,420 रसोइया-सहायक
- 16,062 स्कूलों में रसोई उपकरणों का प्रतिस्थापन
- कुल ₹783.92 करोड़ का वित्तीय प्रावधान
केंद्रीकृत रसोई और LPG सुविधा पर भी जोर
राज्य सरकार ने जिला मुख्यालयों और आसपास के सुलभ विद्यालयों में केंद्रीकृत रसोई (Centralized Kitchen) स्थापित करने के सिद्धांततः निर्णय की भी जानकारी दी।
वर्तमान में रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा और धमतरी में ऐसी रसोइयां संचालित हैं, जहां से 786 स्कूलों के लगभग 1.14 लाख विद्यार्थियों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसके अलावा जिन स्कूलों में अभी तक स्वच्छ ईंधन की सुविधा नहीं है, वहां उपलब्ध राशि से LPG गैस कनेक्शन और गैस स्टोव उपलब्ध कराने की भी मंजूरी दी गई है।
महिला स्व-सहायता समूहों को मिलेगा अवसर
सरकार ने कृषि विभाग को निर्देश दिया है कि महिला स्व-सहायता समूहों को स्कूलों के लिए सब्जियां और मसालों की खेती हेतु प्रोत्साहित किया जाए। इससे एक ओर बच्चों को ताजा खाद्य सामग्री मिलेगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने जनहित याचिका को लंबित रखते हुए मामले की निगरानी जारी रखने का निर्णय लिया है।
अदालत ने 12 अक्टूबर 2026 को अगली सुनवाई तय की है, जिसमें राज्य सरकार को यह बताना होगा कि Millet Chikki Scheme को केवल सात जिलों तक सीमित रखने का औचित्य क्या है।
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Millet Chikki Scheme को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की टिप्पणी राज्य में पोषण योजनाओं के समान और व्यापक क्रियान्वयन पर महत्वपूर्ण सवाल उठाती है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि अतिरिक्त पोषण लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है, तो उसके दायरे और पात्रता के संबंध में सरकार को ठोस कारण बताने होंगे। अब सभी की नजर 12 अक्टूबर 2026 की अगली सुनवाई पर रहेगी, जहां सरकार को Millet Chikki Scheme के सीमित दायरे पर अपना पक्ष रखना होगा।
