रायपुर/भुवनेश्वर। NEET Paper Leak Protest के बाद अब इसका राजनीतिक असर छत्तीसगढ़ और ओडिशा में भी दिखाई देने लगा है। विपक्षी दलों, छात्रों और सामाजिक संगठनों ने दोनों राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। यह मांग उस समय उठी है, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने देशभर में हुए युवा प्रदर्शनों और NEET प्रश्नपत्र लीक विवाद के बीच शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
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NEET Paper Leak Protest के बाद राज्यों में बढ़ी राजनीतिक गर्मी
NEET Paper Leak Protest केवल केंद्र सरकार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब राज्यों की राजनीति में भी इसका असर दिख रहा है।
छात्र संगठनों और विपक्षी दलों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। उनका आरोप है कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है।
इसी मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा में विपक्ष ने राज्य के शिक्षा मंत्रियों की जवाबदेही तय करने की मांग शुरू कर दी है।
NEET Paper Leak Protest में ओडिशा में बीजद और कांग्रेस सक्रिय
ओडिशा में यह मुद्दा अधिक संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इसी राज्य से आते हैं।
उनके इस्तीफे के बाद ओडिशा में विपक्षी दल बीजू जनता दल (BJD) और कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है।
विपक्ष का कहना है कि जब राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को भी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए जवाब देना चाहिए।
ओडिशा में विपक्ष ने राज्य के स्कूल एवं जनशिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई है।
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छत्तीसगढ़ में भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
NEET Paper Leak Protest का असर छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिल रहा है।
राज्य में विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और कार्यकर्ताओं ने शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में अनियमितताओं से मेहनत करने वाले छात्रों के साथ अन्याय होता है।
उन्होंने राज्य सरकार से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग की है।
छात्रों की नाराजगी और भविष्य को लेकर चिंता
NEET परीक्षा देशभर में मेडिकल प्रवेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं में से एक है। लाखों विद्यार्थी हर साल इसमें शामिल होते हैं।
NEET Paper Leak Protest के दौरान छात्रों ने परीक्षा की विश्वसनीयता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए हैं।
छात्र संगठनों का कहना है कि एक छोटी सी अनियमितता भी मेहनती विद्यार्थियों के वर्षों के प्रयास को प्रभावित कर सकती है।
उनकी मांग है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए।
केंद्र में शिक्षा मंत्री बदलाव के बाद बढ़ा विवाद
धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से हटने के बाद विपक्ष को सरकार पर हमला करने का नया मौका मिला है।
विपक्षी दलों का कहना है कि यदि केंद्र स्तर पर जिम्मेदारी तय की जा सकती है तो राज्यों में भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
हालांकि, सरकार की ओर से इस मामले में संबंधित राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के इस्तीफे को लेकर कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
परीक्षा सुधार और पारदर्शिता पर जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में विश्वास बनाए रखने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक सुधार जरूरी हैं।
परीक्षा केंद्रों की निगरानी, प्रश्नपत्र सुरक्षा, डिजिटल सिस्टम और जांच प्रक्रिया को मजबूत करने की जरूरत बताई जा रही है।
NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखना लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा विषय है।
NEET Paper Leak Protest ने देश में परीक्षा व्यवस्था, जवाबदेही और शिक्षा प्रशासन को लेकर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विमर्श खड़ा कर दिया है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा में शिक्षा मंत्रियों के इस्तीफे की मांग के बीच अब सभी की नजर सरकारों के अगले कदम पर है। छात्रों का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली ही युवाओं के विश्वास को मजबूत कर सकती है।
