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Smart Meters Protest in CG: बढ़ते बिजली बिलों से जनता परेशान, प्रदेशभर में प्रदर्शन तेज

Smart Meters Protest in CG को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति और सड़कों पर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी रायपुर सहित कई जिलों में सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने स्मार्ट मीटर के विरोध में प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी राज्य सरकार को इस मुद्दे पर घेर रही हैं, जबकि सरकार और बिजली विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटर से बिजली की खपत या बिल अपने आप नहीं बढ़ते।

प्रदेश के कई उपभोक्ताओं का दावा है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनके बिजली बिल पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गए हैं। वहीं, बिजली वितरण कंपनी (CSPDCL) इन दावों को खारिज करते हुए वास्तविक बिजली खपत को इसका आधार बता रही है।


Smart Meters Protest in CG: आखिर क्यों हो रहा है विरोध?

छत्तीसगढ़ के कई जिलों में स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने बिजली बिल में भारी वृद्धि की शिकायत की है। लोगों का कहना है कि पहले जहां मासिक बिजली बिल ₹300 से ₹500 तक आता था, वहीं अब कई घरों में ₹2,500 से ₹4,000 या उससे अधिक के बिल आने लगे हैं।

कुछ उपभोक्ताओं ने लाखों रुपये तक के बिजली बिल मिलने का भी दावा किया है। इन दावों के चलते कई सामाजिक संगठन और स्थानीय नागरिक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकार स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करे और उपभोक्ताओं की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराए।

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कांग्रेस और विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

Smart Meters Protest in CG को लेकर कांग्रेस ने प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन शुरू कर दिया है। पार्टी का आरोप है कि स्मार्ट मीटर के माध्यम से आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि स्मार्ट मीटर से लोगों की परेशानी बढ़ी है। उन्होंने दावा किया कि स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य नहीं, बल्कि वैकल्पिक होना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।

प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर के कारण कई उपभोक्ताओं को अत्यधिक बिजली बिल भेजे जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से उपभोक्ताओं की शिकायतों की जांच कराने और लोगों को राहत देने की मांग की।


Smart Meters Protest in CG पर बिजली विभाग का क्या कहना है?

छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर स्वयं बिजली की खपत नहीं बढ़ाते। विभाग के अनुसार, बिल उपभोक्ता की वास्तविक बिजली खपत के आधार पर तैयार किए जाते हैं।

विभाग ने रायपुर सहित तीन शहरों में मई, जून और जुलाई 2026 की बिजली खपत का तुलनात्मक अध्ययन किया। अध्ययन के अनुसार, रायपुर शहर क्षेत्र के 3.11 लाख से अधिक घरेलू स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की कुल बिजली खपत जून की तुलना में जुलाई में लगभग 28 प्रतिशत कम दर्ज की गई।

इसी तरह 400 यूनिट से अधिक बिजली उपयोग करने वाले 1.21 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के विश्लेषण में भी लगभग 44 प्रतिशत खपत में कमी दर्ज होने का दावा किया गया है। विभाग का कहना है कि जिन घरों में स्मार्ट मीटर नहीं लगे हैं, वहां भी मौसम और उपयोग के अनुसार बिजली खपत में बदलाव देखा गया है।


मीटर रीडरों की भी बढ़ी चिंता

स्मार्ट मीटर लागू होने के बाद पारंपरिक मीटर रीडरों के सामने भी रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। राजधानी रायपुर के डंगनिया सहित कई स्थानों पर मीटर रीडरों ने भी विरोध प्रदर्शन किया है।

मीटर रीडरों का कहना है कि स्मार्ट मीटर प्रणाली लागू होने से उनका रोजगार प्रभावित हो रहा है। साथ ही कई जिलों में उनका मानदेय भी लंबे समय से लंबित है।


सरकार से क्या मांग कर रहे हैं उपभोक्ता?

प्रदर्शन कर रहे उपभोक्ताओं और सामाजिक संगठनों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—

  • स्मार्ट मीटर से जुड़े सभी विवादित मामलों की निष्पक्ष जांच।
  • जिन उपभोक्ताओं के बिल में असामान्य वृद्धि हुई है, उनकी समीक्षा।
  • पुराने मीटर दोबारा लगाने का विकल्प उपलब्ध कराया जाए।
  • यदि बिलिंग में त्रुटि पाई जाती है तो उपभोक्ताओं को राहत दी जाए।
  • बिजली बिल से संबंधित शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए।

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Smart Meters Protest in CG अब केवल बिजली बिल का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक और जनहित का विषय बन चुका है। एक ओर बड़ी संख्या में उपभोक्ता बढ़े हुए बिजली बिलों की शिकायत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बिजली विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटर से बिजली की खपत नहीं बढ़ती और बिल वास्तविक उपयोग के आधार पर बनते हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं की शिकायतों की पारदर्शी जांच और तथ्यों के आधार पर समाधान निकालना आवश्यक है, ताकि जनता का भरोसा बना रहे और Smart Meters Protest in CG का विवाद शांतिपूर्ण तरीके से सुलझ सके।

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