Pando Tribal Education को नई दिशा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सरकार ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहल की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के अंतिम छोर तक शिक्षा, पोषण और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के संकल्प को लगातार आगे बढ़ा रही है। इसी क्रम में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले के गौरेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पूटा के आश्रित वनांचल बसाहट सांचरखुटरा में विशेष पिछड़ी पंडो जनजाति के बच्चों की शिक्षा प्रभावित होने की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से नई व्यवस्था लागू कर दी।
अब इन बच्चों को बरसात के मौसम में दुर्गम और जोखिम भरे रास्तों से विद्यालय तक नहीं जाना पड़ेगा। प्रशासन ने गांव में ही नियमित पढ़ाई और पौष्टिक मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित कर दी है। यह पहल दूरस्थ वन क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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Pando Tribal Education के लिए जिला प्रशासन की त्वरित पहल
सांचरखुटरा वनांचल क्षेत्र में रहने वाले विशेष पिछड़ी पंडो जनजाति के बच्चों को बरसात के दौरान विद्यालय पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। लगातार बारिश और दुर्गम रास्तों के कारण उनकी नियमित पढ़ाई प्रभावित होने लगी थी।
जैसे ही यह जानकारी जिला प्रशासन तक पहुंची, कलेक्टर विजय दयाराम के. ने मामले को गंभीरता से लिया और शिक्षा विभाग को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
प्रशासन का उद्देश्य स्पष्ट था कि किसी भी बच्चे की शिक्षा केवल भौगोलिक परिस्थितियों या मौसम की वजह से प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
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Pando Tribal Education के तहत गांव में ही पहुंचे शिक्षक
कलेक्टर के निर्देश के बाद शासकीय प्राथमिक शाला पूटा के दो सहायक शिक्षकों की ड्यूटी रोस्टर के आधार पर सांचरखुटरा में लगाई गई है।
इनमें—
- सहायक शिक्षक चंद्रभान सिंह उइके
- सहायक शिक्षक रणवीर सिंह बैगा
शामिल हैं।
दोनों शिक्षक पहले अपनी मूल शाला में उपस्थिति दर्ज करेंगे और उसके बाद निर्धारित रोस्टर के अनुसार प्रतिदिन एक शिक्षक सांचरखुटरा पहुंचकर बच्चों को पढ़ाएगा।
पढ़ाई के लिए गांव के सामुदायिक भवन और आंगनबाड़ी केंद्र का उपयोग किया जाएगा।
इस व्यवस्था से बच्चों की नियमित पढ़ाई बिना किसी व्यवधान के जारी रहेगी।
बरसात में अब नहीं करना होगा जोखिम भरा सफर
वनांचल क्षेत्रों में बरसात के दौरान स्कूल पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है।
सांचरखुटरा के बच्चों को भी पहले कई किलोमीटर तक कठिन रास्तों से होकर विद्यालय जाना पड़ता था। बारिश के दौरान यह रास्ता और अधिक जोखिमपूर्ण हो जाता था।
नई व्यवस्था के बाद बच्चों को गांव से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। इससे उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी और शिक्षा भी प्रभावित नहीं होगी।
Pando Tribal Education के साथ पोषण पर भी विशेष ध्यान
जिला प्रशासन ने केवल पढ़ाई तक ही व्यवस्था सीमित नहीं रखी है।
बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण को ध्यान में रखते हुए मध्यान्ह भोजन (Mid-Day Meal) की भी समुचित व्यवस्था की गई है।
क्या होगी व्यवस्था?
- शासकीय प्राथमिक शाला पूटा से आवश्यक खाद्य सामग्री नियमित रूप से सांचरखुटरा भेजी जाएगी।
- आंगनबाड़ी केंद्र में प्रतिदिन गर्म और पौष्टिक भोजन तैयार किया जाएगा।
- सभी बच्चों को नियमित रूप से मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।
इससे शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के पोषण स्तर में भी सुधार होगा।
कलेक्टर विजय दयाराम के. ने क्या कहा?
कलेक्टर विजय दयाराम के. ने स्पष्ट कहा कि जिले के दूरस्थ और विशेष पिछड़ी जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि—
- किसी भी बच्चे की पढ़ाई मौसम की चुनौती से प्रभावित नहीं होगी।
- भौगोलिक कठिनाइयों के बावजूद शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।
- प्रशासन पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।
यह संदेश दर्शाता है कि जिला प्रशासन शिक्षा को अधिकार के रूप में लागू करने की दिशा में सक्रिय है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन मॉडल की झलक
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय लगातार अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने की बात करते रहे हैं।
राज्य सरकार का लक्ष्य केवल स्कूल भवन बनाना नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि हर बच्चा शिक्षा प्राप्त कर सके।
सांचरखुटरा में की गई यह व्यवस्था मुख्यमंत्री के सुशासन, समावेशी विकास और अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं की पहुंच के संकल्प को धरातल पर उतारने का उदाहरण मानी जा रही है।
विशेष पिछड़ी पंडो जनजाति के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
पंडो जनजाति छत्तीसगढ़ की विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTG) में शामिल है।
इन समुदायों की बड़ी आबादी वनांचल और दुर्गम क्षेत्रों में निवास करती है, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सेवाओं तक पहुंच आसान नहीं होती।
ऐसे में गांव में ही शिक्षा उपलब्ध कराना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि सामाजिक समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
इससे—
- स्कूल छोड़ने की संभावना कम होगी।
- बच्चों की नियमित उपस्थिति बढ़ेगी।
- शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
- अभिभावकों का विश्वास बढ़ेगा।
- जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर मजबूत होगा।
दूरस्थ क्षेत्रों के लिए बन सकता है मॉडल
सांचरखुटरा में लागू की गई व्यवस्था भविष्य में अन्य वनांचल क्षेत्रों के लिए भी मॉडल बन सकती है।
यदि किसी गांव में मौसम, दूरी या भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बच्चे विद्यालय नहीं पहुंच पा रहे हैं तो स्थानीय स्तर पर शिक्षक और मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था प्रभावी विकल्प साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल शिक्षा के अधिकार को व्यवहारिक रूप से लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
शिक्षा और पोषण दोनों पर समान फोकस
सरकार की यह पहल केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना बच्चों के समग्र विकास के लिए आवश्यक माना जाता है।
विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा और पोषण को साथ लेकर चलने से बेहतर परिणाम मिलने की संभावना रहती है।
भविष्य में क्या हो सकता है?
यदि यह मॉडल सफल रहता है तो अन्य दूरस्थ जनजातीय बस्तियों में भी इसी प्रकार की व्यवस्था लागू की जा सकती है।
इससे—
- शिक्षा की पहुंच बढ़ेगी।
- स्कूल ड्रॉपआउट दर कम होगी।
- बच्चों का सीखने का स्तर बेहतर होगा।
- जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा संबंधी असमानता कम होगी।
Pando Tribal Education को मजबूत करने के लिए सांचरखुटरा में जिला प्रशासन द्वारा की गई यह पहल संवेदनशील शासन और समावेशी विकास का उत्कृष्ट उदाहरण है। गांव में ही शिक्षकों की तैनाती और मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था से विशेष पिछड़ी पंडो जनजाति के बच्चों की पढ़ाई अब बरसात या दुर्गम रास्तों के कारण बाधित नहीं होगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शिक्षा को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का यह प्रयास दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों के लिए एक प्रेरणादायी मॉडल बन सकता है और आने वाले समय में अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
