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National Livestock Mission: 30 लाख की सब्सिडी से बस्तर की ग्रेसी दुग्गा ने खड़ा किया 1.12 करोड़ का आधुनिक सूकर पालन फार्म

National Livestock Mission के तहत मिली सरकारी सहायता ने छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले की एक युवा महिला को आत्मनिर्भरता की नई पहचान दिलाई है। बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड के किंजोली गांव की रहने वाली बीएससी एग्रीकल्चर स्नातक ग्रेसी दुग्गा ने केंद्र सरकार की National Livestock Mission योजना के तहत 30 लाख रुपये की सब्सिडी प्राप्त कर 1 करोड़ 12 लाख 10 हजार रुपये की लागत से आधुनिक सूकर पालन (पिग फार्म) परियोजना स्थापित की है। आज उनके फार्म में 400 से अधिक सूकर हैं और यह पूरे बस्तर क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है।


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National Livestock Mission से मिली नई उड़ान

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सूकर पालन तेजी से लाभदायक स्वरोजगार के रूप में उभर रहा है। कम लागत, तेज प्रजनन क्षमता और सूअर के मांस की लगातार बढ़ती मांग के कारण यह व्यवसाय किसानों और युवाओं के लिए आय का मजबूत माध्यम बन रहा है।

केंद्र सरकार की National Livestock Mission योजना के तहत सूकर पालन इकाइयों की स्थापना के लिए परियोजना लागत पर पात्र हितग्राहियों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी (निर्धारित सीमा के अनुसार) उपलब्ध कराई जाती है। इसी योजना का लाभ लेकर ग्रेसी दुग्गा ने आधुनिक उद्यम की शुरुआत की।


नौकरी छोड़कर चुना स्वरोजगार का रास्ता

ग्रेसी दुग्गा ने वर्ष 2023 में उत्तराखंड के देहरादून से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी की।

उच्च शिक्षा या नौकरी का विकल्प चुनने के बजाय उन्होंने अपने ज्ञान का उपयोग कृषि एवं पशुपालन आधारित उद्यम स्थापित करने में किया। बस्तर क्षेत्र में सूकर पालन की बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने आधुनिक पिग फार्म स्थापित करने का निर्णय लिया।

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National Livestock Mission के तहत मिली 30 लाख रुपये की सब्सिडी

बड़े स्तर पर फार्म स्थापित करने के लिए ग्रेसी को पशु चिकित्सा विभाग से तकनीकी मार्गदर्शन मिला।

विभाग की सहायता से 1 करोड़ 12 लाख 10 हजार रुपये की परियोजना तैयार की गई, जिसे National Livestock Mission के अंतर्गत स्वीकृति मिली।

अनुसूचित जनजाति वर्ग से पहली बार आवेदन करने पर उन्हें 30 लाख रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई।

ग्रेसी का कहना है कि यदि यह सरकारी सहायता नहीं मिलती, तो वे केवल 20-25 सूकरों के साथ छोटा व्यवसाय शुरू कर पातीं। सरकारी सहयोग ने उन्हें आधुनिक अधोसंरचना के साथ बड़े स्तर पर फार्म स्थापित करने का अवसर दिया।


वैज्ञानिक प्रबंधन से 400 से अधिक सूकर तैयार

पशुपालन विभाग और कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में तमिलनाडु से उन्नत नस्ल के सूकर लाए गए।

मई 2025 में फार्म की शुरुआत 110 प्रजनन योग्य सूकरों से हुई थी, जिनमें 100 मादा और 10 नर शामिल थे।

बेहतर पोषण, नियमित टीकाकरण और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण जून 2026 तक फार्म में 202 वयस्क प्रजनन योग्य सूकर और लगभग 206 पिगलेट तैयार हो चुके हैं। वर्तमान में इस आधुनिक फार्म में 400 से अधिक सूकर मौजूद हैं।


पहली बिक्री में ही हुई लगभग चार लाख रुपये की कमाई

ग्रेसी दुग्गा ने अब अपने फार्म से उन्नत नस्ल के पिगलेट्स की व्यावसायिक बिक्री भी शुरू कर दी है।

हाल ही में उन्होंने 65 पिगलेट्स को 6,000 रुपये प्रति पिगलेट की दर से बेचकर लगभग 3.90 लाख रुपये की आय अर्जित की।

उनके फार्म से रायपुर सहित आसपास के बाजारों में नियमित रूप से सूकरों की आपूर्ति की जा रही है।


बस्तर के युवाओं के लिए बनी प्रेरणा

ग्रेसी दुग्गा की सफलता यह साबित करती है कि यदि युवाओं को सही मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिले तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर सफल उद्यम स्थापित किए जा सकते हैं।

उनकी परियोजना न केवल आत्मनिर्भरता का उदाहरण है बल्कि बस्तर के युवाओं को कृषि एवं पशुपालन आधारित स्टार्टअप शुरू करने के लिए भी प्रेरित कर रही है।


National Livestock Mission ने बस्तर की ग्रेसी दुग्गा को एक सफल महिला उद्यमी बनने का अवसर दिया है। 30 लाख रुपये की सब्सिडी, पशुपालन विभाग के तकनीकी सहयोग और उनकी मेहनत ने एक आधुनिक सूकर पालन परियोजना को सफलता दिलाई है। National Livestock Mission जैसी योजनाएं यदि इसी तरह युवाओं तक पहुंचती रहीं तो छत्तीसगढ़ में रोजगार, उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

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