Gauhar Raza Saroj Samman 2026 के तहत देश के प्रसिद्ध कवि, लेखक, वैज्ञानिक और फिल्मकार गौहर रज़ा को जनकवि मुकुट बिहारी सरोज की जन्म शताब्दी वर्ष में प्रतिष्ठित सरोज सम्मान 2026 से सम्मानित किया गया। यह सम्मान समारोह 26 जुलाई को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जनकवि मुकुट बिहारी सरोज स्मृति न्यास द्वारा आयोजित किया गया, जहां देशभर के साहित्यकारों, कवियों और रचनाकारों ने भाग लिया।
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Gauhar Raza Saroj Samman 2026 में गौहर रज़ा हुए सम्मानित
जनकवि मुकुट बिहारी सरोज की शताब्दी वर्ष पर आयोजित इस प्रतिष्ठित समारोह में गौहर रज़ा को सरोज सम्मान 2026 प्रदान किया गया।
गौहर रज़ा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के निवासी हैं। वे वैज्ञानिक होने के साथ-साथ चर्चित कवि, लेखक और फिल्मकार भी हैं। कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों में योगदान देने के बाद वर्तमान में वे दिल्ली में रहकर साहित्य और रचनात्मक कार्यों में सक्रिय हैं।
Gauhar Raza Saroj Samman 2026 में कविता की भूमिका पर रखा पक्ष
सम्मान प्राप्त करने के बाद गौहर रज़ा ने कहा कि देश ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां पिछली पीढ़ियों के कई सपने बिखरते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे समय में साहित्य और कविता समाज को दिशा देने का कार्य करती है।
उन्होंने कहा कि छोटी-सी कविता या लेख भी सत्ता के लिए चुनौती बन सकता है और इतिहास इस बात का साक्षी रहा है। उन्होंने अपने वक्तव्य में जर्मनी के मार्टिन नीमोलर (Pastor Martin Niemöller) तथा उर्दू शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की प्रसिद्ध रचनाओं का उल्लेख करते हुए संघर्ष की परंपरा को याद किया।
समारोह में साहित्यकारों ने प्रस्तुत कीं रचनाएं
समारोह की अध्यक्षता वर्ष 2024 के सरोज सम्मान से सम्मानित कवि यश मालवीय ने की।
कार्यक्रम की शुरुआत में जनकवि मुकुट बिहारी सरोज स्मृति न्यास की सचिव मान्यता सरोज ने बताया कि यह सम्मान उन साहित्यकारों को समर्पित है जो मानवता, समाज और जनहित के मुद्दों को अपनी रचनाओं के माध्यम से सामने लाते हैं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 से अब तक 23 साहित्यकारों को यह सम्मान प्रदान किया जा चुका है।
साहित्यिक गोष्ठी में गूंजे जनसरोकारों के स्वर
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में देशभर से आए कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।
गौहर रज़ा ने अपनी चर्चित कविताओं का पाठ किया। वहीं यश मालवीय, मालिनी गौतम, मंजुल मयंक, महेश कटारे ‘सुगम’, महेंद्र मिहोनवी और शेफाली शर्मा ने भी समकालीन सामाजिक और मानवीय सरोकारों पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत कीं।
इस अवसर पर वरिष्ठ गीतकार मोहन अंबर के गीतों पर आधारित पत्रिका ‘लोकमंगल’ के विशेषांक का भी विमोचन किया गया।
सरोज सम्मान का इतिहास और पहचान
जनकवि मुकुट बिहारी सरोज स्मृति सम्मान वर्ष 2005 से लगातार प्रदान किया जा रहा है। इस सम्मान से सबसे पहले बुंदेली के प्रसिद्ध कवि सीता किशोर खरे को सम्मानित किया गया था।
इसके बाद निर्मला पुतुल, निदा फ़ाज़ली, अदम गोंडवी, नरेश सक्सेना, राजेश जोशी, कात्यायनी, विष्णु नागर, जसिंता केरकेट्टा, कविता कर्मकार, यश मालवीय सहित अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों को यह सम्मान मिल चुका है।
आर्थिक सीमाओं के बावजूद यह आयोजन निरंतर जारी है और आज यह देश के प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में अपनी अलग पहचान बना चुका है।
Gauhar Raza Saroj Samman 2026 केवल एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि साहित्य, जनसरोकार और सामाजिक चेतना का उत्सव है। जनकवि मुकुट बिहारी सरोज की शताब्दी वर्ष में गौहर रज़ा का सम्मान साहित्य की उस परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रतीक है, जो समाज में संवाद, संवेदना और परिवर्तन की प्रेरणा देती है। यह आयोजन भारतीय साहित्य जगत की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
