Eye Donation की एक प्रेरणादायक मिसाल छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में सामने आई है। वर्धमान हाइट्स निवासी स्वर्गीय हेमराज भाई वाघेला की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनके परिवार ने उनके निधन के बाद नेत्रदान और देहदान का निर्णय लिया। इस मानवीय पहल से जहां दो नेत्रहीन लोगों को नई दृष्टि मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ, वहीं मेडिकल छात्रों के अध्ययन एवं शोध कार्यों में भी सहायता मिलेगी।
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Eye Donation की मिसाल बनी वाघेला परिवार की पहल
जानकारी के अनुसार लगभग तीन वर्ष पहले हेमराज भाई वाघेला और उनकी पत्नी ने नवदृष्टि फाउंडेशन को अपने नेत्रदान एवं देहदान की वसीयत सौंपी थी। 27 जुलाई 2026 को उनके निधन के बाद परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा को पूरा करने का संकल्प लिया।
देर रात लगभग 2 बजे परिवार ने नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी कराई। इसके बाद सुबह उनके पार्थिव शरीर को श्री शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज को देहदान के लिए सौंप दिया गया।
Eye Donation के साथ देहदान से समाज को मिला बड़ा संदेश
हेमराज भाई वाघेला की पत्नी वनिता वाघेला, पुत्र कृष्णा वाघेला, पुत्री तरुणा सोलंकी, वधु शीतल वाघेला, महक वाघेला और अन्य परिजनों की सहमति से यह प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हुई।
परिवार ने गहरे शोक के बावजूद समाजहित को प्राथमिकता देते हुए ऐसा निर्णय लिया, जिसकी हर ओर सराहना हो रही है। यह Eye Donation केवल दो लोगों की आंखों की रोशनी लौटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में अंगदान के प्रति सकारात्मक संदेश भी देता है।
मध्यरात्रि में पूरी हुई नेत्रदान की प्रक्रिया
नेत्रदान की प्रक्रिया को पूरा कराने के लिए नवदृष्टि फाउंडेशन के राज आढ़तिया, कुलवंत भाटिया, मंगल अग्रवाल, रितेश जैन, मुकेश राठी और जितेंद्र कारिया रात में ही वाघेला निवास पहुंचे।
वहीं शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज की टीम में डॉ. श्रेया पंजवानी, डॉ. प्रतीक लकड़ा तथा नेत्र प्रभारी विवेक कसार ने समय पर पहुंचकर कॉर्निया सुरक्षित संकलित किए।
देहदान से मेडिकल छात्रों को मिलेगा लाभ
नेत्रदान के बाद पार्थिव शरीर को मेडिकल शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज को सौंपा गया।
कॉलेज के एनाटॉमी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजलि वंजारी के निर्देशन में संदीप रिशबुड, दीपक रवानी और दयाराम की टीम ने देहदान की पूरी प्रक्रिया संपन्न कराई।
विशेषज्ञों के अनुसार देहदान से मेडिकल विद्यार्थियों को शरीर रचना विज्ञान (Anatomy) की पढ़ाई और शोध कार्यों में महत्वपूर्ण सहायता मिलती है।
परिवार ने कहा- पिता की अंतिम इच्छा पूरी होने का संतोष
स्वर्गीय हेमराज भाई वाघेला के पुत्र कृष्णा वाघेला ने कहा कि पिता के निधन से पूरा परिवार गहरे दुख में है, लेकिन उनकी अंतिम इच्छा पूरी करने का संतोष भी है।
उन्होंने कहा कि उनके पिता के नेत्र अब दो जरूरतमंद लोगों के जीवन में नई रोशनी लेकर आएंगे, जबकि उनकी देह मेडिकल छात्रों के अध्ययन एवं रिसर्च में उपयोगी होगी। इससे पूरे परिवार को आत्मिक शांति मिली है।
नवदृष्टि फाउंडेशन ने बताया प्रेरणादायक उदाहरण
नवदृष्टि फाउंडेशन के राज आढ़तिया ने कहा कि वाघेला परिवार का यह निर्णय समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि Eye Donation और देहदान जैसे महादान के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए ऐसे प्रेरक कार्य बेहद महत्वपूर्ण हैं। संस्था को विश्वास है कि इस घटना से अधिक लोग अंगदान के लिए आगे आएंगे।
Eye Donation केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवाओं में से एक है। दुर्ग के वाघेला परिवार ने अपने दुख की घड़ी में भी समाजहित को सर्वोच्च स्थान देकर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। स्वर्गीय हेमराज भाई वाघेला का नेत्रदान दो लोगों के जीवन में नई रोशनी लाएगा, जबकि उनका देहदान भविष्य के चिकित्सकों के ज्ञान और शोध को समृद्ध करेगा। यह पहल समाज को अंगदान और देहदान के प्रति जागरूक करने वाली एक महत्वपूर्ण मिसाल है।
