Chhattisgarh Student Protest के तहत रविवार को राजधानी रायपुर के अंबेडकर चौक पर बड़ी संख्या में छात्र एकत्र हुए और राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने राज्य के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के इस्तीफे की मांग करते हुए शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं पर जवाबदेही तय करने की मांग की। साथ ही जगदलपुर की छात्रा हरिका राव नायडू की मौत के मामले में न्याय की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल की तैनाती रही, हालांकि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। छात्र तिरंगा, संविधान की प्रतियां, गुलाब के फूल और विभिन्न संदेश लिखे पोस्टर लेकर पहुंचे तथा अपनी मांगों को मीडिया और प्रशासन के सामने रखा।
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Chhattisgarh Student Protest: क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें?
Chhattisgarh Student Protest में शामिल छात्र नेताओं ने कहा कि उनका आंदोलन गैर-राजनीतिक है और अब इसका दूसरा चरण शुरू हो चुका है। उनका कहना है कि अब आंदोलन का केंद्र छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दे हैं।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार रहीं—
- राज्य के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का इस्तीफा।
- शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं की जांच।
- भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
- सरकारी परीक्षाओं में ऑनलाइन नकल और गड़बड़ियों पर रोक।
- स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों की व्यवस्थाओं में सुधार।
छात्रों ने कहा कि लगातार सामने आ रहे विवादों से विद्यार्थियों का सरकारी संस्थानों पर भरोसा प्रभावित हुआ है।
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हरिका राव नायडू मामले में न्याय की मांग
प्रदर्शन का एक प्रमुख मुद्दा जगदलपुर की 20 वर्षीय छात्रा हरिका राव नायडू का मामला रहा।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, हरिका राव नायडू ने 16 जुलाई को NEET पुनर्परीक्षा में कम अंक आने के बाद कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी। बताया गया कि यह उनका तीसरा प्रयास था।
छात्रों ने इस मामले में—
- परिवार को उचित मुआवजा,
- परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी,
- तथा मामले के लिए जिम्मेदार माने जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई
की मांग की।
Chhattisgarh Student Protest में शिक्षा सुधार पर जोर
छात्र नेताओं ने कहा कि आंदोलन केवल एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग को लेकर किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि—
- भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताएं,
- सरकारी परीक्षाओं में ऑनलाइन नकल,
- स्कूलों के प्रबंधन से जुड़ी समस्याएं,
- उच्च शिक्षा संस्थानों में कमियां
जैसे मुद्दों पर राज्य सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।
उनका कहना है कि शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की आवश्यकता है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का भी किया उल्लेख
प्रदर्शन के दौरान छात्र नेताओं ने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का भी उल्लेख किया।
उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में कई सप्ताह तक चले छात्र आंदोलन के बाद यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अब उनका आंदोलन छत्तीसगढ़ में शिक्षा सुधार और राज्य स्तर के मुद्दों पर केंद्रित रहेगा।
बिलासपुर सहित कई जिलों से पहुंचे छात्र
रायपुर में आयोजित प्रदर्शन में बिलासपुर सहित राज्य के कई जिलों से छात्र शामिल हुए।
छात्रों ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध के लिए नहीं, बल्कि प्रदेश के विद्यार्थियों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के उद्देश्य से किया जा रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
आगे क्या होगा?
फिलहाल प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगें सार्वजनिक रूप से रखी हैं। राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर छात्रों की अगली रणनीति निर्भर करेगी।
छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक शिक्षा व्यवस्था में सुधार और उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
Chhattisgarh Student Protest ने एक बार फिर राज्य की शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। रायपुर में हुए इस प्रदर्शन में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, शिक्षा सुधार और हरिका राव नायडू मामले में न्याय की मांग प्रमुख रही। अब सभी की नजर राज्य सरकार की आगामी प्रतिक्रिया और इस आंदोलन की अगली दिशा पर टिकी है।
