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Anuj Sharma Case: मॉर्फ्ड वीडियो और आपत्तिजनक पोस्ट पर हाई कोर्ट सख्त, तत्काल हटाने के दिए निर्देश

Anuj Sharma Case में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी करते हुए सोशल मीडिया पर अभिनेता और विधायक पद्मश्री अनुज शर्मा के खिलाफ साझा किए गए मॉर्फ्ड वीडियो, अश्लील कैरिकेचर और मानहानिकारक पोस्ट को तत्काल हटाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने इस मामले को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, कंटेंट क्रिएटर्स, फर्जी अकाउंट संचालकों और चैनल एडमिन को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।

यह आदेश बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में अंतिम निर्णय बाद में होगा, लेकिन फिलहाल विवादित सामग्री हटाना आवश्यक है।

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Anuj Sharma Case में हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश

Anuj Sharma Case की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ सामग्री पहली नजर में आपत्तिजनक प्रतीत होती है। इसी आधार पर कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया कि अनुज शर्मा और उनके परिवार से संबंधित कथित मॉर्फ्ड वीडियो, अश्लील कैरिकेचर, आपत्तिजनक तस्वीरें और मानहानिकारक लिंक जल्द से जल्द हटाए जाएं।

इसके साथ ही कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और संबंधित व्यक्तियों को नोटिस जारी कर निर्धारित समय के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश भी दिया है।

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Anuj Sharma Case क्या है?

याचिका के अनुसार, अनुज शर्मा ने हाई कोर्ट में आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर उन्हें और उनके परिवार को निशाना बनाकर लगातार आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट की जा रही है।

याचिका में कहा गया है कि उनकी तस्वीरों, पहचान और छवि का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया गया। साथ ही उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से मॉर्फ्ड वीडियो और अश्लील कैरिकेचर भी प्रसारित किए गए।

अनुज शर्मा ने अदालत से इस सामग्री को हटाने और संबंधित लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की।


कोर्ट ने किन पक्षों को जारी किया नोटिस?

Anuj Sharma Case में हाई कोर्ट ने केवल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ही नहीं, बल्कि कथित रूप से सामग्री साझा करने वाले अन्य पक्षों को भी नोटिस जारी किया है।

इनमें शामिल हैं—

  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म
  • कंटेंट क्रिएटर्स
  • फर्जी अकाउंट संचालक
  • चैनल एडमिन
  • बिना अनुमति तस्वीर, पहचान या आवाज का कथित रूप से उपयोग करने वाले संबंधित व्यक्ति

कोर्ट ने सभी पक्षों को निर्धारित समय के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने को कहा है।


अनुज शर्मा ने क्या कहा?

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अनुज शर्मा ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सभी नागरिकों का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार की आड़ में किसी व्यक्ति की निजता और सम्मान पर हमला स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि उनके और उनके परिवार के खिलाफ लगातार अभद्र टिप्पणियां और आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित की जा रही थी, जिससे उनकी प्रतिष्ठा और परिवार की गरिमा प्रभावित हो रही थी। इसी कारण उन्हें अपने मौलिक अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए हाई कोर्ट की शरण लेनी पड़ी।


Anuj Sharma Case में अदालत ने क्या स्पष्ट किया?

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह स्पष्ट किया कि फिलहाल यह एक अंतरिम आदेश है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आपत्तिजनक सामग्री हटाने का निर्देश दिया है।

मामले में अंतिम निर्णय संबंधित पक्षों के जवाब और आगे की सुनवाई के बाद लिया जाएगा। इसलिए इस आदेश को अंतिम फैसला नहीं माना जाएगा।


सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी का भी संदेश

यह मामला सोशल मीडिया पर साझा किए जाने वाले कंटेंट की जिम्मेदारी को भी रेखांकित करता है। अदालत ने संकेत दिया है कि यदि किसी व्यक्ति की पहचान, तस्वीर या आवाज का कथित रूप से बिना अनुमति और दुर्भावनापूर्ण तरीके से उपयोग किया जाता है, तो ऐसे मामलों की न्यायिक समीक्षा हो सकती है।


आगे क्या होगा?

अब सभी संबंधित पक्षों को अदालत में अपना पक्ष रखना होगा। उनके जवाब मिलने के बाद हाई कोर्ट मामले की अगली सुनवाई करेगा और उपलब्ध तथ्यों व कानूनी पहलुओं के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।


Anuj Sharma Case में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश सोशल मीडिया पर कथित मानहानिकारक और आपत्तिजनक सामग्री से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अदालत ने फिलहाल संबंधित सामग्री हटाने के निर्देश दिए हैं और सभी पक्षों से जवाब तलब किया है। अब इस मामले की आगे की दिशा अगली सुनवाई और पक्षकारों के जवाब पर निर्भर करेगी।

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