छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के सम्मेलन में मुख्यमंत्री साय ने किया छत्तीसगढ़ी भाषा को बढ़ावा देने का आह्वान

रायपुर। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी आत्मा को जोड़ने वाली भाषा है। वे छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के दो दिवसीय आठवें प्रांतीय सम्मेलन 2025 के शुभारंभ अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ी भाषा के सम्मान को बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है

छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य का सम्मान

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ी में उत्कृष्ट साहित्य रचा जा रहा है। इस अवसर पर भागमानी, छत्तीसगढ़ के छत्तीस भाजी, छतनार, चल उड़ रे पुचुक चिरई, एक कहानी हाना के, गंगा बारू, माटी के दीया सहित 11 पुस्तकों का विमोचन किया गया। उन्होंने यह भी घोषणा की कि छत्तीसगढ़ी साहित्यकारों की किताबें स्कूली लाइब्रेरी में भेजी जाएंगी, ताकि बच्चे अपनी मातृभाषा में अध्ययन कर सकें

राजभाषा आयोग द्वारा 1500 पुस्तकों का प्रकाशन

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग ने अब तक 1500 से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन किया है। उन्होंने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत छत्तीसगढ़ी भाषा में शिक्षा को बढ़ावा देने की भी बात कही।

वरिष्ठ साहित्यकारों का सम्मान

सम्मेलन में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. देवधर दास महंत, श्री काशीपुरी कुंदन, श्री सीताराम साहू ’श्याम’, श्री राघवेन्द्र दुबे, श्री कुबेर सिंह साहू और डॉ. दादूलाल जोशी को सम्मानित किया गया।

सम्मेलन में साहित्यकारों ने रखे विचार

सम्मेलन अध्यक्ष श्री रामेश्वर वैष्णव ने कहा कि छत्तीसगढ़ी का मानकीकरण किया जाना चाहिएसंचालक संस्कृति एवं राजभाषा श्री विवेक आचार्य ने राजभाषा आयोग के कार्यों पर प्रकाश डाला और आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार ने स्वागत भाषण दिया।

इस अवसर पर प्रदेशभर से आए गणमान्य साहित्यकार और भाषा प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।