नई दिल्ली: स्मार्ट मीटरिंग नेशनल प्रोजेक्ट (SMNP) के तहत देश में स्मार्ट मीटर स्थापना के मामले में असम सभी राज्यों से आगे है। राज्य में अब तक 22.89 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जो कि स्वीकृत मीटरों का 36% है। वहीं, गुजरात जैसे उन्नत राज्य, जिनकी छवि पावर सेक्टर सुधारों में अग्रणी मानी जाती है, स्मार्ट मीटर स्थापना में बिहार, असम और छत्तीसगढ़ जैसे अपेक्षाकृत कम विकसित राज्यों से पीछे चल रहे हैं।
गुजरात में अब तक 2.19 लाख स्मार्ट मीटर ही लगाए गए हैं, जो राज्य में स्वीकृत 1.64 करोड़ मीटरों का केवल 1% है। इसके विपरीत, बिहार ने स्वीकृत मीटरों का 82.5% और मध्य प्रदेश ने 10.13 लाख (8%) मीटर स्थापित कर लिए हैं। छत्तीसगढ़ (5.61 लाख), आंध्र प्रदेश (3.85 लाख), महाराष्ट्र (3.55 लाख) और उत्तर प्रदेश (3.79 लाख) ने भी गुजरात की तुलना में अधिक मीटर लगाए हैं।

12 राज्यों में नहीं हुई स्मार्ट मीटर स्थापना
29 नवंबर 2024 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देशभर में स्वीकृत 19.79 करोड़ स्मार्ट मीटरों में से केवल 72.97 लाख (3.7%) मीटर ही लगाए गए हैं। इसमें 12 राज्यों, जैसे तमिलनाडु, केरल, झारखंड और पंजाब, में अब तक कोई भी मीटर स्थापित नहीं हुआ है। यहां तक कि राजस्थान, गोवा और मणिपुर जैसे बीजेपी शासित राज्यों में भी स्मार्ट मीटर स्थापना का कार्य शुरू नहीं हुआ है।
गुजरात में विरोध और सीमित स्थापना
गुजरात में स्मार्ट मीटर स्थापना को लेकर मई 2024 में बड़े पैमाने पर जनता के विरोध का सामना करना पड़ा। जनता ने शिकायत की कि स्मार्ट मीटर से उन्हें अधिक शुल्क वसूला जा रहा है। इस विरोध के बाद, गुजरात सरकार ने घोषणा की कि पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटर से “जबरन” नहीं बदला जाएगा। सरकार ने यह भी कहा कि स्मार्ट मीटर केवल नए कनेक्शनों और सोलर रूफटॉप परियोजनाओं तक ही सीमित रहेंगे।
केंद्र सरकार की योजना
जुलाई 2021 में शुरू की गई “रीवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम” (RDSS) का उद्देश्य वितरण कंपनियों (DISCOMS) की परिचालन क्षमता और वित्तीय स्थिरता को सुधारना है। इस योजना के तहत उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटरिंग एक प्रमुख पहल है।
