तमनार आमाघाट में अफीम खेती का चौंकाने वाला खुलासा — कांग्रेस ने उठाए 5 बड़े सवाल

Raigarh News — छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार इलाके में स्थित आमाघाट में अफीम की अवैध खेती का एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। जिस जमीन पर तरबूज और ककड़ी उगाने का दावा किया गया था, वहाँ प्रतिबंधित अफीम (Poppy/Opium) की फसल लहलहाती पाई गई।

यह मामला दुर्ग शहर जिला कांग्रेस कमेटी की नवनियुक्त महामंत्री निकिता मिलिंद द्वारा जारी एक प्रेस बयान के जरिए सार्वजनिक हुआ है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को प्रदेश की कानून व्यवस्था की पोल खोलने वाला करार दिया है।

Raigarh News की यह घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह दुर्ग और बलरामपुर के बाद तीसरे जिले में अफीम की अवैध खेती का खुलासा है। यह लगातार सामने आ रही घटनाएँ राज्य में संगठित नशे के कारोबार की गहरी जड़ों की ओर इशारा करती हैं।

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तरबूज-ककड़ी की आड़ में लहलहाती रही अफीम की फसल

कैसे छुपाई गई यह अवैध खेती?

Raigarh News के अनुसार, तमनार के आमाघाट इलाके में यह अवैध खेती बेहद सुनियोजित तरीके से की जा रही थी। आरोपियों ने जमीन पर तरबूज और ककड़ी की खेती का दावा करके संदेह की गुंजाइश को समाप्त करने की कोशिश की।

लेकिन जब इस जमीन की वास्तविक जाँच हुई तो वहाँ अफीम की फसल खड़ी मिली। अफीम (Opium) भारत में NDPS अधिनियम के तहत एक अत्यंत नियंत्रित और प्रतिबंधित पदार्थ है। बिना केंद्र सरकार की अनुमति के इसकी खेती, संग्रहण और व्यापार पूरी तरह अवैध है।

अफीम की खेती की गंभीरता

अफीम से हेरोइन, मॉर्फिन और स्मैक जैसे घातक नशीले पदार्थ बनते हैं जो युवाओं को बर्बाद करते हैं। इस फसल की एक-एक मात्रा का बाजार मूल्य लाखों रुपए होता है। यही कारण है कि तस्कर और नशा माफिया इसकी अवैध खेती के लिए भोले-भाले किसानों और दूरदराज की जमीन का उपयोग करते हैं।


Raigarh News: क्या प्रशासन और पुलिस को सच में नहीं थी खबर?

कांग्रेस का सीधा सवाल — “क्या अफीम रातों-रात उग आती है?”

Raigarh News के इस मामले में कांग्रेस महामंत्री निकिता मिलिंद ने प्रशासन और पुलिस पर सीधा और तीखा सवाल दागा है।

उन्होंने पूछा — “क्या अफीम रातों-रात उग आती है? क्या पुलिस और स्थानीय प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं थी?”

यह सवाल बेहद महत्वपूर्ण है। अफीम की खेती एक दिन या एक हफ्ते की प्रक्रिया नहीं होती। अफीम के पौधे 90 से 120 दिनों में तैयार होते हैं। इतने लंबे समय तक यह खेती पुलिस, राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की नजर से कैसे बची रही — यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है।

प्रशासनिक विफलता या जानबूझकर अनदेखी?

Raigarh News के परिप्रेक्ष्य में यह समझना जरूरी है कि तमनार औद्योगिक क्षेत्र है जहाँ प्रशासनिक और पुलिस तंत्र की उपस्थिति अपेक्षाकृत अधिक होती है। ऐसे में महीनों तक अफीम की खेती का पकड़ में न आना या तो प्रशासनिक लापरवाही है या फिर जानबूझकर की गई अनदेखी


दुर्ग और बलरामपुर के बाद अब रायगढ़ — यह पैटर्न क्या बताता है?

तीन जिलों में अफीम खेती का खुलासा — संगठित नेटवर्क की आशंका

Raigarh News का यह मामला एक बड़े और चिंताजनक पैटर्न का हिस्सा लगता है। निकिता मिलिंद ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि यह पहली घटना नहीं है।

इससे पहले:

  • दुर्ग जिले में अफीम की अवैध खेती का खुलासा हो चुका है।
  • बलरामपुर जिले में भी इसी तरह की घटना सामने आई थी।
  • और अब रायगढ़ जिले के तमनार (आमाघाट) में यह तीसरा मामला उजागर हुआ है।

तीन अलग-अलग जिलों में एक जैसी घटनाएँ यह संकेत देती हैं कि छत्तीसगढ़ में अफीम की अवैध खेती का एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है। इस नेटवर्क में स्थानीय भूमि मालिक, मध्यस्थ और संरक्षणकर्ता सभी शामिल हो सकते हैं।


कांग्रेस महामंत्री निकिता मिलिंद का बड़ा बयान — Raigarh News

“भाजपा सरकार की नाक के नीचे नशे का गढ़ बन रहा छत्तीसगढ़”

Raigarh News के अनुसार, निकिता मिलिंद ने अपने बयान में साय सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भाजपा सरकार की नाक के नीचे छत्तीसगढ़ धीरे-धीरे नशे का गढ़ बनता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक जिले की समस्या नहीं है — बल्कि पूरे प्रदेश में फैलते नशे के कारोबार की भयावह तस्वीर है। राज्य का युवा वर्ग इस नशे की चपेट में आ रहा है और सरकार आँखें मूँदे बैठी है।

“दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए”

निकिता मिलिंद ने अपने बयान में स्पष्ट कहा कि प्रदेश के भविष्य को नशे की आग में झोंकने वाले दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए

उन्होंने माँग की कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।


मिलीभगत का संदेह — किसके संरक्षण में पली यह खेती?

“सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि गहरे भ्रष्टाचार का संकेत”

Raigarh News के इस संवेदनशील मुद्दे पर कांग्रेस ने सीधे मिलीभगत का संदेह जताया है। निकिता मिलिंद ने कहा कि यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं है, बल्कि यह गहरे भ्रष्टाचार और ऊंचे रसूखदारों के संरक्षण का स्पष्ट संकेत है।

महीनों तक चलने वाली अफीम की खेती बिना किसी स्थानीय संरक्षण के संभव नहीं है। इसके लिए:

  • स्थानीय पुलिस की अनदेखी या मिलीभगत
  • राजस्व और पटवारी तंत्र की चुप्पी
  • नशा तस्करों का स्थानीय नेटवर्क

इन सभी की संलिप्तता की जाँच जरूरी है।


उच्चस्तरीय जांच की माँग — Raigarh News

CBI या SIT जांच की उठ रही माँग

Raigarh News के अनुसार, कांग्रेस ने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की माँग की है। निकिता मिलिंद ने साफ कहा कि जिला स्तरीय जांच से दोषियों को बचाया जा सकता है, इसलिए इस पूरे नशे के नेटवर्क की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

कांग्रेस की माँग है कि:

  1. तीनों जिलों — दुर्ग, बलरामपुर और रायगढ़ — के अफीम खेती मामलों को एक साथ जोड़कर जाँच हो।
  2. संरक्षण देने वाले अधिकारियों की पहचान और गिरफ्तारी हो।
  3. नशा तस्करी नेटवर्क के पूरे तार खंगाले जाएँ।
  4. दोषियों पर NDPS अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई हो।

NDPS अधिनियम — भारत सरकार — legislative.gov.in

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो भारत — narcoticsindia.nic.in


Raigarh News का यह खुलासा — कब जागेगी सरकार?

Raigarh News का यह मामला केवल एक जिले की खबर नहीं है — यह पूरे छत्तीसगढ़ में फैलती नशे की जड़ों का भयावह संकेत है। दुर्ग, बलरामपुर और अब रायगढ़ — तीन जिलों में अफीम की अवैध खेती का लगातार उजागर होना यह दर्शाता है कि राज्य में एक सुनियोजित नशा नेटवर्क सक्रिय है।

तरबूज और ककड़ी की आड़ में महीनों तक अफीम उगाना और पुलिस-प्रशासन का इससे बेखबर रहना — दोनों ही बातें सरकार और उसके तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। दुर्ग जिला कांग्रेस महामंत्री निकिता मिलिंद की माँग सही दिशा में है — उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जाँच ही इस मामले की सच्चाई सामने ला सकती है। Raigarh News पर इस मामले की जाँच और आगे की कार्रवाई से जुड़े हर अपडेट के लिए बने रहें।

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