Sushant Singh’s Ex-Manager Case में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार को FIR दर्ज कर बड़ी कार्रवाई की है। यह मामला दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत से जुड़ा है। CBI की FIR में हत्या, गैंगरेप, आपराधिक साजिश, सबूत नष्ट करने और गलत जानकारी देने से जुड़ी धाराएं शामिल की गई हैं।
FIR में महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे और शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे समेत अभिनेता डिनो मोरिया, सूरज पंचोली और अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती के नाम उन लोगों में शामिल हैं, जिनकी भूमिका की जांच की आवश्यकता बताई गई है।
हालांकि, FIR में किसी व्यक्ति का नाम होना अपने आप में अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं है। आरोपों की सच्चाई और संबंधित लोगों की भूमिका का निर्धारण CBI की जांच के बाद ही होगा।
Sushant Singh’s Ex-Manager Case में किन लोगों के नाम?
CBI की FIR के अनुसार आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली और रिया चक्रवर्ती सहित कुछ डॉक्टरों तथा पोस्टमार्टम में कथित देरी से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
FIR में तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और अन्य लोगों पर कथित साजिश तथा बाद में मामले को दबाने के आरोपों की भी जांच की बात कही गई है। इसमें संबंधित सरकारी कर्मचारियों और पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच की संभावना भी जताई गई है।
CBI दस्तावेजों में केस से जुड़े रिकॉर्ड, फाइलों और अन्य सरकारी दस्तावेजों को कथित रूप से नष्ट या दबाने, रिकॉर्ड में हेरफेर तथा सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग जैसे आरोपों की जांच की बात सामने आई है।
Disha Salian की मौत का पूरा मामला
दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक रिहायशी इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने के बाद हुई थी। उनकी मौत सुशांत सिंह राजपूत की मौत से कुछ दिन पहले हुई थी।
मुंबई पुलिस ने उस समय दिशा सालियान की मौत को लेकर Accidental Death Report (ADR) दर्ज की थी। बाद में पुलिस की जांच में इसे आत्महत्या का मामला बताया गया।
लेकिन दिशा के पिता सतीश सालियान ने इस निष्कर्ष पर सवाल उठाते हुए पिछले साल बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने अपनी याचिका में बेटी के साथ गैंगरेप और हत्या किए जाने का आरोप लगाया था।
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Bombay High Court के आदेश के बाद जांच
Sushant Singh’s Ex-Manager Case में CBI जांच का रास्ता बॉम्बे हाई कोर्ट के 2 सितंबर के आदेश के बाद साफ हुआ। कोर्ट ने दिशा सालियान के पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुंबई पुलिस की जांच में कई खामियों की ओर इशारा किया।
अदालत ने कहा था कि पुलिस की जांच कई सवालों को सुलझाने के बजाय और अधिक सवाल खड़े करती है। कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि छह साल बीत जाने के बावजूद दिशा के परिवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट और ADR की प्रतियां उपलब्ध नहीं कराई गई थीं।
इसके बाद केंद्रीय एजेंसी ने मुंबई पुलिस से दिशा सालियान की मौत से जुड़े सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड मांगे, ताकि मामले की विस्तृत जांच शुरू की जा सके।
परिवार के बयान से जांच को मिला नया मोड़
पिछले सप्ताह दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने CBI के सामने अपना बयान दर्ज कराया। उन्होंने कई लोगों के खिलाफ कथित साजिश और उसके बाद मामले को दबाने के आरोप लगाए।
उनके आरोपों में पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे और अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। अब CBI इन आरोपों, पुराने पुलिस रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों की स्वतंत्र रूप से जांच करेगी।
यह मामला सुशांत सिंह राजपूत की मौत से इसलिए भी जुड़ा हुआ है क्योंकि दिशा सालियान की मृत्यु के कुछ ही दिनों बाद सुशांत सिंह राजपूत 14 जून 2020 को मुंबई स्थित अपने बांद्रा फ्लैट में मृत पाए गए थे।
अब CBI जांच में क्या होगा?
Sushant Singh’s Ex-Manager Case में CBI के सामने सबसे बड़ी चुनौती वर्ष 2020 से जुड़े सभी रिकॉर्ड और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की दोबारा जांच करना होगी। एजेंसी पुलिस रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम दस्तावेज, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध सामग्री की जांच कर सकती है।
CBI यह भी देख सकती है कि दिशा सालियान की मौत के संबंध में पहले की जांच में कोई महत्वपूर्ण तथ्य छूटा था या नहीं। इसके साथ ही FIR में जिन लोगों की भूमिका जांच के लिए बताई गई है, उनसे पूछताछ भी जांच का हिस्सा बन सकती है।
यह भी महत्वपूर्ण है कि अभी सामने आए आरोपों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। CBI की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और मामले में आगे कौन-सी कानूनी कार्रवाई होती है।
Sushant Singh’s Ex-Manager Case में CBI की FIR ने करीब छह साल पुराने दिशा सालियान मौत मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है। हत्या, गैंगरेप, साजिश और सबूत मिटाने जैसे गंभीर आरोपों की जांच अब केंद्रीय एजेंसी करेगी। हालांकि, FIR में दर्ज आरोपों और नामों को दोष साबित होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। आने वाले समय में CBI की जांच और अदालत में सामने आने वाले तथ्यों से ही इस मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी।
