School Toilet Protest का मामला छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के सेलूद गांव से सामने आया है। यहां स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम स्कूल के करीब 200 छात्रों ने शौचालय और बाउंड्रीवॉल की मांग को लेकर सड़क पर प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि वे करीब दो साल से इन बुनियादी सुविधाओं की कमी की समस्या झेल रहे हैं और कई बार शिकायत के बावजूद समाधान नहीं हुआ।
बुधवार सुबह करीब 9 बजे छात्रों ने पहले स्कूल के गेट पर ताला लगाया। इसके बाद वे दुर्ग-पाटन मुख्य मार्ग स्थित बजरंग चौक पहुंचे और सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।
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दो साल से शौचालय और बाउंड्रीवॉल की समस्या
छात्रों के मुताबिक स्कूल में पर्याप्त और उपयोगी शौचालय की सुविधा नहीं है। यह समस्या छात्राओं के लिए विशेष रूप से परेशानी का कारण बन रही है।
छात्रों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में कई बार अधिकारियों को शिकायत दी। इसके बावजूद करीब दो वर्षों से समस्या बनी हुई है। बाउंड्रीवॉल नहीं होने की शिकायत भी छात्रों ने उठाई।
स्कूल में कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थी पढ़ते हैं। छात्रों का कहना है कि शिक्षकों की ओर से भी अधिकारियों को समस्या के समाधान के लिए समय दिया गया था, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
School Toilet Protest में छात्राओं ने उठाया सवाल
कक्षा 8 की छात्रा किंजल कुर्रे भी प्रदर्शन में शामिल थीं। उन्होंने कहा कि शौचालय की कमी छात्राओं के लिए ज्यादा कठिनाई पैदा करती है।
छात्रा ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब लड़के खुले में जा सकते हैं तो लड़कियां आखिर कहां जाएं। उनका कहना था कि करीब 200 विद्यार्थियों के लिए एक उचित शौचालय बनाना कोई असंभव काम नहीं होना चाहिए।
कक्षा 7 की छात्रा वैशाली ने स्कूल में बाउंड्रीवॉल नहीं होने की समस्या भी बताई। छात्रों का कहना है कि उनकी मांग किसी अतिरिक्त सुविधा की नहीं, बल्कि स्कूल में जरूरी बुनियादी व्यवस्था उपलब्ध कराने की है।
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School Toilet Protest के बाद तहसीलदार पहुंचे
सड़क पर चक्काजाम की सूचना के बाद पाटन तहसीलदार रस्तोगी मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्रों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं।
तहसीलदार ने छात्रों को आश्वासन दिया कि स्कूल में शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। उन्होंने स्कूल परिसर का निरीक्षण करने और निर्माण के लिए उपयुक्त स्थान तय करने की बात भी कही।
आश्वासन मिलने के बाद छात्रों ने चक्काजाम समाप्त कर दिया और वापस स्कूल लौट गए। इसके बाद मुख्य मार्ग पर यातायात सामान्य हो गया।
हालांकि, छात्रों ने साफ किया कि वे सिर्फ आश्वासन पर निर्भर नहीं रहना चाहते। उन्होंने कहा कि वे निर्माण कार्य शुरू होने का इंतजार करेंगे और समस्या दूर नहीं होने पर दोबारा आवाज उठा सकते हैं।
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मंत्री गजेंद्र यादव ने क्या कहा?
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि दुर्ग जिले से छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव आते हैं। मंत्री ने छात्रों की शौचालय संबंधी मांग को जायज बताया।
हालांकि, उन्होंने प्रदर्शन के पीछे कांग्रेस नेताओं या स्थानीय गांव के नेताओं की कथित भूमिका होने का आरोप लगाया। यह मंत्री का राजनीतिक आरोप है।
मंत्री के अनुसार स्कूल में पहले से मौजूद शौचालय खराब रखरखाव के कारण जर्जर हो गया है। उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों को काम के लिए निर्देश दिए गए हैं और नए शौचालय का निर्माण ‘जी राम जी’ योजना के तहत कराया जाएगा।
सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं पर सवाल
सेलूद की घटना ने सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं। शिक्षा की गुणवत्ता केवल पढ़ाई और शिक्षकों तक सीमित नहीं होती।
स्कूलों में सुरक्षित भवन, स्वच्छ और उपयोगी शौचालय, छात्राओं के लिए उचित सुविधाएं, बाउंड्रीवॉल और साफ-सफाई भी शिक्षा के वातावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
खासकर किशोरियों के लिए स्कूल में सुरक्षित और स्वच्छ शौचालय की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में छात्रों की मांग को समय पर सुनना और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
School Toilet Protest से उठी बड़ी चिंता
सेलूद के छात्रों का प्रदर्शन केवल एक स्कूल की समस्या नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की निगरानी से जुड़ा सवाल भी सामने लाता है।
अब छात्रों की नजर इस बात पर रहेगी कि तहसीलदार के आश्वासन के बाद शौचालय का निर्माण वास्तव में कब शुरू होता है। साथ ही बाउंड्रीवॉल की मांग पर भी प्रशासन क्या कदम उठाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
School Toilet Protest ने दुर्ग के सेलूद गांव के सरकारी स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को सामने ला दिया है। करीब 200 छात्रों ने शौचालय और बाउंड्रीवॉल की मांग को लेकर सड़क जाम किया, जिसके बाद प्रशासन ने निर्माण का आश्वासन दिया। प्रदर्शन खत्म हो गया है, लेकिन छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब वे काम शुरू होने का इंतजार करेंगे। इस मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई ही तय करेगी कि छात्रों की वर्षों पुरानी समस्या वास्तव में कब खत्म होती है।
