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Antariksh Sangwari: जशपुर के बच्चों के लिए अंतरिक्ष का सपना

Antariksh Sangwari पहल के जरिए छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल जशपुर जिले के स्कूली बच्चों को अंतरिक्ष विज्ञान और अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण की दुनिया से जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 27 अगस्त 2026 को इस पहल का शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के साथ उन्हें स्पेस साइंस, स्पेस ट्रैवल और एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग से परिचित कराना है।

यह कार्यक्रम जशपुर जिला प्रशासन और IDYM Foundation के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। इसमें जिले के सभी आठ विकासखंडों के कक्षा 8वीं से 12वीं तक के करीब 10 हजार विद्यार्थियों को स्क्रीनिंग प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।

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Antariksh Sangwari में 10 हजार छात्रों की होगी स्क्रीनिंग

इस पहल की सबसे खास बात इसका बड़ा चयन दायरा है। जशपुर के सभी आठ विकासखंडों से कक्षा 8वीं से 12वीं तक के लगभग 10 हजार विद्यार्थियों को स्क्रीनिंग के लिए शामिल किया जाएगा।

स्क्रीनिंग के बाद परीक्षा, मूल्यांकन और इंटरव्यू के अलग-अलग चरणों के जरिए अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि और क्षमता रखने वाले विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। चयनित छात्रों को आगे विशेष प्रशिक्षण और अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़ा व्यावहारिक अनुभव दिया जाएगा।

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Antariksh Sangwari की चयन प्रक्रिया

कार्यक्रम के लिए विद्यार्थियों के पंजीकरण की अंतिम तारीख 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। इसके बाद 26 सितंबर को परीक्षा आयोजित होगी।

परीक्षा के बाद 27 से 29 सितंबर तक मूल्यांकन और साक्षात्कार की प्रक्रिया चलेगी। इन चरणों के आधार पर प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा।

यह प्रक्रिया खास तौर पर उन विद्यार्थियों को अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिन्हें महानगरों में उपलब्ध विज्ञान और तकनीक से जुड़े संसाधनों तक आसानी से पहुंच नहीं मिल पाती।

चयनित छात्रों को रायपुर में मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

चयनित विद्यार्थियों के लिए 1 से 7 अक्टूबर 2026 तक रायपुर में एक सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण प्रस्तावित है। इस दौरान उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान, अंतरिक्ष यात्रा और अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण से संबंधित विषयों से परिचित कराया जाएगा।

इस पहल का मकसद केवल किताबों तक सीमित विज्ञान शिक्षा से आगे बढ़कर विद्यार्थियों को वास्तविक अनुभव और विशेषज्ञों से संवाद का अवसर देना है। इससे छात्रों को स्पेस सेक्टर में उपलब्ध संभावित करियर विकल्पों की बेहतर समझ मिल सकती है।

Antariksh Sangwari में बेंगलुरु यात्रा भी खास

रायपुर प्रशिक्षण के बाद चयनित विद्यार्थियों के लिए 15 अक्टूबर 2026 से बेंगलुरु यात्रा प्रस्तावित है। वहां विद्यार्थियों को अंतरिक्ष और विज्ञान से जुड़े संस्थानों तथा गतिविधियों को करीब से समझने का अवसर मिलने की योजना है।

बेंगलुरु देश के प्रमुख विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्रों में से एक है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए यह यात्रा कक्षा में पढ़े गए वैज्ञानिक सिद्धांतों को वास्तविक संस्थानों और गतिविधियों से जोड़ने का अवसर बन सकती है।

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शुभांशु शुक्ला से मिलेंगे जशपुर के छात्र

इस पहल को भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला का सहयोग प्राप्त है। चयनित विद्यार्थियों के उनके साथ संवाद करने और अंतरिक्ष यात्रा के अनुभवों को समझने की योजना है।

शुभांशु शुक्ला ने 2025 में Axiom-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा की थी। ISRO के अनुसार, उन्होंने मिशन के दौरान सात माइक्रोग्रैविटी प्रयोग पूरे किए और 18 दिन की वैज्ञानिक अंतरिक्ष यात्रा के बाद पृथ्वी पर लौटे।

इसलिए जशपुर के विद्यार्थियों के लिए किसी वास्तविक अंतरिक्ष यात्री से सीधे बातचीत करना इस कार्यक्रम का सबसे प्रेरक हिस्सा हो सकता है।

आदिवासी क्षेत्र के बच्चों के लिए क्यों खास है पहल?

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि सरकार का प्रयास दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों को विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना है।

जशपुर जैसे क्षेत्र के विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों, प्रशिक्षण और संस्थानों का अनुभव मिलने से उनके सामने करियर के नए विकल्प खुल सकते हैं। इससे STEM यानी विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित के प्रति उनकी रुचि बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

Antariksh Sangwari की पूरी टाइमलाइन

  • 27 अगस्त 2026: पहल का शुभारंभ
  • 15 सितंबर 2026: पंजीकरण की अंतिम तारीख
  • 26 सितंबर 2026: परीक्षा
  • 27-29 सितंबर: मूल्यांकन और साक्षात्कार
  • 1-7 अक्टूबर: रायपुर में विशेष प्रशिक्षण
  • 15 अक्टूबर से: बेंगलुरु यात्रा प्रस्तावित
  • 26 अक्टूबर: पुरस्कार समारोह

विज्ञान से अंतरिक्ष तक नई उड़ान

Antariksh Sangwari केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि दूरस्थ क्षेत्र के विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान की संभावनाओं से जोड़ने की कोशिश है। करीब 10 हजार बच्चों की स्क्रीनिंग से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की पहचान करने और उन्हें आगे विशेषज्ञ प्रशिक्षण देने का अवसर मिलेगा।

ISRO के अनुसार, भारत का मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम लगातार आगे बढ़ रहा है और शुभांशु शुक्ला की Axiom-4 मिशन में भागीदारी ने भारतीय मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण अनुभव उपलब्ध कराया है।

Antariksh Sangwari के जरिए जशपुर के करीब 10 हजार स्कूली बच्चों को अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया से जुड़ने का अवसर मिलने जा रहा है। स्क्रीनिंग से लेकर रायपुर प्रशिक्षण और प्रस्तावित बेंगलुरु यात्रा तक, यह पहल छात्रों को किताबों से बाहर निकलकर विज्ञान को अनुभव करने का मौका देगी। सबसे खास बात यह है कि चयनित विद्यार्थी अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला से भी संवाद कर सकेंगे। ऐसे प्रयास जशपुर के बच्चों को बड़े सपने देखने और भविष्य में विज्ञान एवं अंतरिक्ष क्षेत्र में करियर बनाने की दिशा में प्रेरित कर सकते हैं।

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