दुर्ग जिले के पेंड्रावन स्थित स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल में Teachers Shortage को लेकर छात्रों का गुस्सा सड़क पर दिखाई दिया। कक्षा 9वीं से 12वीं तक पढ़ने वाले करीब 400 छात्र-छात्राओं ने मंगलवार को खैरागढ़-धमधा मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन करीब 12 घंटे तक चला और रात 12 बजे के आसपास छात्रों ने इसे समाप्त किया।
Teachers Shortage पर छात्रों का 12 घंटे प्रदर्शन
छात्रों का कहना था कि स्कूल में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने के कारण उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कई विषयों की नियमित कक्षाएं नहीं लग पा रही हैं और परीक्षा की तैयारी के साथ सिलेबस पूरा करने में भी परेशानी हो रही है।
छात्रों के मुताबिक करीब 400 विद्यार्थियों के लिए स्कूल में केवल तीन शिक्षक और एक प्राचार्य की व्यवस्था थी। विद्यार्थियों का कहना था कि स्कूल की जरूरत के अनुसार कम से कम 17 शिक्षकों की आवश्यकता है।
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Teachers Shortage के खिलाफ पहले भी हुआ था प्रदर्शन
यह पहली बार नहीं था जब विद्यार्थियों ने शिक्षकों की कमी को लेकर आवाज उठाई। 21 अगस्त को भी छात्रों ने प्रदर्शन करते हुए चक्काजाम किया था।
उस समय प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्रों से बातचीत की थी। विद्यार्थियों को उम्मीद थी कि जल्द शिक्षकों की व्यवस्था होगी, लेकिन 25 अगस्त तक उनकी मुख्य मांग पूरी नहीं होने पर उन्होंने दोबारा आंदोलन शुरू कर दिया।
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शिक्षकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित
छात्रों ने विशेष रूप से आर्ट्स और कॉमर्स विषयों के शिक्षकों की कमी को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि पर्याप्त शिक्षकों के अभाव में उन्हें अपने विषयों की पढ़ाई के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
छात्रों का सवाल था कि जब 400 विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं होंगे, तो समय पर सिलेबस पूरा करने और बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कैसे होगी। इसी मांग को लेकर वे सड़क पर डटे रहे।
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Teachers Shortage पर प्रशासन का बड़ा फैसला
प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद SDOP, तहसीलदार, SDM और स्कूल शिक्षा विभाग के सहायक संचालक सहित कई अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने विद्यार्थियों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया।
हालांकि छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे। प्रदर्शनकारी कलेक्टर या शिक्षा मंत्री से सीधे बातचीत की मांग कर रहे थे। स्थिति तब बदली जब छात्रों की स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से फोन पर बातचीत कराई गई।
बातचीत के बाद छात्रों को उनकी मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। इसके बाद उन्होंने रात करीब 12 बजे प्रदर्शन समाप्त किया।
Teachers Shortage दूर करने के लिए 4 नए शिक्षक
छात्रों की मांग को देखते हुए स्कूल में चार नए शिक्षकों की व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया है। इसके बाद स्कूल में कुल सात शिक्षक उपलब्ध होंगे।
हालांकि छात्रों की मूल मांग 17 शिक्षकों की थी। विभाग की ओर से कॉमर्स विषय के एक शिक्षक की भी जल्द व्यवस्था करने का आश्वासन दिया गया है।
ओपन स्कूल व्यवस्था होगी खत्म, प्राचार्य भी बदले
छात्रों की मांग पर स्कूल में संचालित ओपन स्कूल व्यवस्था को अगले शैक्षणिक सत्र से समाप्त करने का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही मौजूदा प्राचार्य को हटाकर नए प्राचार्य की नियुक्ति की गई है।
प्रशासन का प्रयास है कि स्कूल में नियमित कक्षाएं बेहतर तरीके से संचालित हों और विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए जरूरी शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
चार दिन में मांग पूरी नहीं हुई तो फिर सड़क पर उतरेंगे छात्र
प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने स्पष्ट किया कि वे पढ़ाई छोड़कर सड़क पर बैठना नहीं चाहते। उनका कहना था कि Teachers Shortage के कारण उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।
छात्रों का कहना है कि यदि पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था नहीं हुई तो वे फिर से आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। फिलहाल विभाग ने चार नए शिक्षकों की व्यवस्था की है और कॉमर्स शिक्षक उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया है।
शिक्षा मंत्री के गृह जिले में छात्रों का प्रदर्शन
पेंड्रावन स्कूल दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र में स्थित है। दुर्ग शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का गृह जिला भी है। ऐसे में शिक्षकों की कमी को लेकर छात्रों का लगातार दो बार सड़क पर उतरना शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
दुर्ग जिले के सेलूद में भी इससे पहले विद्यार्थियों के प्रदर्शन का मामला सामने आ चुका है। इसके अलावा शिक्षक और शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी भी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते रहे हैं।
पेंड्रावन के स्वामी आत्मानंद स्कूल में Teachers Shortage को लेकर हुआ 12 घंटे का छात्र प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था की जमीनी चुनौतियों को सामने लाता है। फिलहाल चार नए शिक्षकों और नए प्राचार्य की व्यवस्था से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन विद्यार्थियों की 17 शिक्षकों की मांग पूरी करना विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। अब सबसे अहम यह होगा कि नए शैक्षणिक इंतजाम कितनी जल्दी प्रभावी होते हैं और छात्रों की पढ़ाई सुचारु रूप से कब शुरू होती है।
