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PESA Act: छत्तीसगढ़ में ग्राम स्वशासन को मिलेगा नया आधार, CM विष्णु देव साय ने दिए अहम निर्देश

06 अगस्त 2026 | रायपुर। PESA Act के प्रभावी क्रियान्वयन और वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act-FRA) के बेहतर समन्वय को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में महानदी मंत्रालय भवन में गठित टास्क फोर्स की शीर्ष समिति की पहली बैठक आयोजित की गई। बैठक में अनुसूचित क्षेत्रों के समग्र विकास, ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए विस्तृत रणनीति पर चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि PESA Act का क्रियान्वयन केवल प्रशासनिक प्रक्रिया न होकर ग्राम स्वशासन को मजबूत करने और आदिवासी समुदायों की भागीदारी बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बने।

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PESA Act और FRA के समन्वय पर सरकार का विशेष फोकस

बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि PESA Act और Forest Rights Act (FRA) दोनों कानूनों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित किए बिना अनुसूचित क्षेत्रों में अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं किए जा सकते।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि दोनों कानूनों के प्रावधानों को एकीकृत दृष्टिकोण से लागू किया जाए, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और आदिवासी समुदायों को उनके अधिकार समय पर मिल सकें।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ की लगभग एक-तिहाई आबादी आदिवासी समाज से जुड़ी है। इसलिए उनकी परंपराओं, अधिकारों और विकास को ध्यान में रखते हुए PESA Act का आदर्श मॉडल विकसित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

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PESA Act से ग्राम स्वशासन और स्थानीय विकास को मिलेगा बल

मुख्यमंत्री ने कहा कि PESA Act अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं की भूमिका को मजबूत करता है और स्थानीय संसाधनों के संरक्षण में समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करता है।

PESA Act के प्रमुख उद्देश्य

  • ग्राम स्वशासन को सशक्त बनाना
  • प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देना
  • स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाना
  • रोजगार के नए अवसर विकसित करना
  • संतुलित एवं सतत विकास सुनिश्चित करना
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना

उन्होंने अधिकारियों से जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने और कानून से जुड़े भ्रमों का तथ्यात्मक निराकरण करने को भी कहा।

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वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन की भी हुई समीक्षा

बैठक में Forest Rights Act, 2006 के अंतर्गत—

  • प्राप्त दावों
  • निराकृत दावों
  • लंबित व्यक्तिगत एवं सामुदायिक दावों
  • Community Forest Resource Rights (CFRR) की मान्यता
  • संरक्षण एवं प्रबंधन
  • वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में बदलने की प्रक्रिया

की विस्तृत समीक्षा की गई।

सरकार ने इन सभी मामलों में समयबद्ध कार्रवाई और विभागीय समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया।


PESA Act के लिए बनेगी राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने घोषणा की कि PESA Act के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा बनाए गए नियमों और प्रक्रियाओं के बेहतर समन्वय के लिए राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति का गठन किया जाएगा।

समिति की प्रमुख जिम्मेदारियां

  • विभिन्न विभागों के नियमों का समन्वय
  • अभिसरण सुनिश्चित करना
  • समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करना
  • क्रियान्वयन की नियमित निगरानी
  • विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना

इसके अलावा वर्तमान जिला स्तरीय PESA निगरानी समितियों को भी सक्रिय करने के निर्देश दिए गए ताकि ग्राम सभाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।


बैठक में कई मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम, विधायक नीलकंठ नेताम सहित विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के विषय विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

इसके अलावा मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, सचिव शम्मी आबदी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण पाण्डेय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की संचालक प्रियंका ऋचा महोबिया सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में भाग लिया।


PESA Act और Forest Rights Act के बेहतर समन्वय की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई यह पहली टास्क फोर्स बैठक अनुसूचित क्षेत्रों के विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। ग्राम स्वशासन को मजबूत करने, आदिवासी अधिकारों की रक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और विभागीय समन्वय बढ़ाने के लिए सरकार की नई रणनीति राज्य में समावेशी विकास को गति दे सकती है। यदि तय कार्ययोजना समयबद्ध तरीके से लागू होती है, तो PESA Act छत्तीसगढ़ में आदिवासी क्षेत्रों के सतत और सहभागी विकास का मजबूत मॉडल बन सकता है।

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