Bastar Flood Alert के बीच बस्तर संभाग में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से कई इलाकों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति बन गई है। नदी-नाले उफान पर हैं और कई प्रमुख संपर्क मार्गों पर आवागमन प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है।
बंगाल की खाड़ी में बना मौसम सिस्टम 23-24 सितंबर की रात उत्तर आंध्र प्रदेश के पास तट पार कर जमीन की ओर बढ़ा था। IMD-आधारित रिपोर्टों के अनुसार यह सिस्टम डीप डिप्रेशन के रूप में आगे बढ़ा और बाद में कमजोर होने लगा, लेकिन इसके कारण कई राज्यों में भारी बारिश का प्रभाव जारी रहा।
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9 राहत शिविरों में 350 से ज्यादा लोग
बस्तर जिले में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए कुल 9 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं। प्रशासन के अनुसार इन शिविरों में अब तक 350 से अधिक प्रभावित लोगों को सुरक्षित आश्रय दिया गया है।
जगदलपुर शहर में बाढ़ का असर अधिक दिखाई दिया, जहां चार राहत शिविरों में करीब 175 लोगों को रखा गया है। शहीद भगत सिंह स्कूल में 100 से अधिक प्रभावितों के भोजन और ठहरने की व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा नगरनार क्षेत्र के नदी बोड़ना राहत शिविर में करीब 40, बस्तर तहसील के भैंसगांव शिविर में 77 और बकावंड के बेलगांव राहत केंद्र में 35 लोगों को आश्रय दिया गया है।
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Bastar Flood Alert में रेस्क्यू ऑपरेशन
नगरनार क्षेत्र में नदी बोड़ना के बाढ़ के पानी में फंसे करीब 40 लोगों को बचाव दल ने नावों की मदद से सुरक्षित निकाला। इसके बाद उन्हें ग्राम पंचायत भवन में बनाए गए अस्थायी राहत शिविर में पहुंचाया गया।
तोकापाल के घाट धनोरा क्षेत्र से भी 25 परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। पलवा और लोहंडीगुड़ा के भेजा क्षेत्र के निचले इलाकों में पानी भरने के बाद प्रभावित परिवारों को पंचायत भवन और अन्य सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया।
Bastar Flood Alert के बीच कलेक्टर-SP ने किया निरीक्षण
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने प्रभावित तथा संवेदनशील क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया।
अधिकारियों ने जगदलपुर के गंगामुंडा पारा, महादेव घाट, खड़कघाट, मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल डिमरापाल के आसपास के क्षेत्रों और नगरनार-भेजापदर मार्ग पर नदी बोड़ना समेत जलभराव वाले स्थानों का जायजा लिया।
इस दौरान अधिकारियों ने प्रभावित परिवारों से बातचीत कर उनकी स्थिति जानी। राहत शिविरों में भोजन, पेयजल, सुरक्षित ठहरने और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई।
मैदानी अमले को संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
इंद्रावती नदी का बढ़ा जलस्तर
लगातार बारिश के कारण इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे नदी किनारे और निचले इलाकों में सतर्कता बढ़ाई गई है।
दिए गए प्रशासनिक विवरण के अनुसार, ओडिशा में इंद्रावती नदी पर बने खातीगुड़ा बांध के तीन और मुरान बांध के दो गेट खोलकर अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है। इसके मद्देनजर नदी के आसपास बसे गांवों में निगरानी बढ़ाई गई है।
मन्धोता और बकावंड के बेलगांव सहित पानी से घिरे क्षेत्रों में बचाव दल नावों और जरूरी उपकरणों के साथ तैनात हैं। कंट्रोल रूम और मैदानी अमले के जरिए स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है।
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Bastar Flood Alert: लोगों से प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने लोगों से उफनते नदी-नालों और जलमग्न पुल-पुलियों को पार नहीं करने की अपील की है। भारी बारिश के दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी जान जोखिम में डाल सकती है।
प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर भरोसा नहीं करने और किसी भी आपात स्थिति में बाढ़ नियंत्रण कक्ष या संबंधित राजस्व अधिकारियों को सूचना देने को कहा है।
मौसम सिस्टम के तट पार करने के बाद भी भारी बारिश का खतरा तुरंत समाप्त नहीं होता। IMD-आधारित रिपोर्टों में छत्तीसगढ़ समेत मध्य भारत के कुछ हिस्सों में बारिश जारी रहने की संभावना बताई गई थी।
Bastar Flood Alert के बीच प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और राहत शिविरों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। 9 राहत शिविरों में 350 से अधिक लोगों को आश्रय और अलग-अलग इलाकों में नावों से रेस्क्यू ऑपरेशन इस अभियान का हिस्सा हैं। लोगों के लिए सबसे जरूरी है कि वे उफनते जलस्रोतों और जलमग्न रास्तों से दूरी बनाए रखें तथा प्रशासन की सुरक्षा अपील का पालन करें।
