Organic Farming Workshop के दौरान छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि यदि आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य देना है तो रासायनिक खादों की अंधी दौड़ से बाहर निकलना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि धरती की उर्वरा शक्ति को बचाने और मानव स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी माध्यम जैविक और प्राकृतिक खेती है।
बलौदाबाजार के भाटापारा स्थित शासकीय गजानंद अग्रवाल स्नातकोत्तर महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित जिला स्तरीय तिलहन मेला सह जैविक कृषि कार्यशाला में यह बातें कही गईं। कार्यक्रम में राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा और रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल भी मौजूद रहे।
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Organic Farming Workshop में कृषि मंत्री का बड़ा संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर देशभर में 1 जून से 30 जून तक “खेत चलो अभियान” संचालित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक और प्राकृतिक खेती की ओर वापस लाना है। छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” बताते हुए उन्होंने कहा कि अधिक उत्पादन की होड़ में रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग बढ़ा है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
रासायनिक खादों से मिट्टी और स्वास्थ्य दोनों को नुकसान
कृषि मंत्री ने कहा कि रासायनिक खादों का अत्यधिक उपयोग अल्पकालिक लाभ तो देता है, लेकिन लंबे समय में यह मिट्टी की उर्वरता कम कर देता है।
उन्होंने किसानों से जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन और बकरी पालन को अपनाकर अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित करने की अपील की।
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Organic Farming Workshop में किसानों के लिए बड़ी घोषणा
कार्यक्रम में किसानों के लिए सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी भी साझा की गई।
कृषि मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में “कृषक उन्नति योजना” का दायरा बढ़ाया गया है।
दलहन और तिलहन किसानों को मिलेगा लाभ
उन्होंने घोषणा की कि खरीफ सीजन में धान के स्थान पर दलहन और तिलहन की खेती करने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
यह योजना किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित करेगी और उनकी आय बढ़ाने में मदद करेगी।
पशुधन आधारित खेती से बढ़ेगी समृद्धि
राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य जैविक खेती और पशुधन आधारित कृषि मॉडल से ही संभव है।
उन्होंने कहा कि पहले कृषि व्यवस्था का आधार पशुधन हुआ करता था, जिससे पर्यावरण और भूमि दोनों सुरक्षित रहते थे।
जैविक खेती से सुधरेगी जमीन की सेहत
मंत्री ने कहा कि आज रासायनिक उर्वरकों के कारण पानी, हवा और भोजन तक प्रदूषित हो रहे हैं। यदि मिट्टी की सेहत सुधरेगी तो ही शुद्ध अन्न उत्पादन संभव होगा।
हितग्राहियों को मिला योजनाओं का लाभ
Organic Farming Workshop केवल चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि किसानों और मछुआरों को सीधे लाभ भी पहुंचाया गया।
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों द्वारा 5 किसानों को अरहर बीज किट और 5 किसानों को नैनो यूरिया वितरित किया गया।
मछुआ समितियों को मिला आधुनिक उपकरण
दो मछुआ समितियों को आधुनिक महाजाल और आइस बॉक्स प्रदान किए गए ताकि उनकी उत्पादकता और आय में वृद्धि हो सके।
इसके अलावा पीएम किसान सम्मान निधि और पीएम आशा योजना के तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 10 किसानों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
Organic Farming Workshop से किसानों को मिलेगा नया मार्ग
विशेषज्ञों का मानना है कि जैविक खेती न केवल उत्पादन लागत कम करती है बल्कि मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इस तरह के आयोजन किसानों को नई तकनीकों, योजनाओं और टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ने में मदद करते हैं।
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Organic Farming Workshop ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि कृषि का भविष्य जैविक और प्राकृतिक खेती में ही निहित है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम द्वारा किसानों को दी गई सलाह और दलहन-तिलहन खेती पर घोषित प्रोत्साहन राशि राज्य के कृषि क्षेत्र को नई दिशा दे सकती है। यदि किसान जैविक खेती की ओर बढ़ते हैं तो इससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी बल्कि मिट्टी, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहेगा। यही कारण है कि Organic Farming Workshop जैसे आयोजन आज की आवश्यकता बन चुके हैं।
