CGPSC Paper Leak मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व CGPSC सचिव और सेवानिवृत्त IAS अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव को बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने 5 अगस्त 2026 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
ध्रुव पर आरोप है कि उन्होंने CGPSC की वर्ष 2021 की राज्य सेवा मुख्य परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र अपने बेटे सुमित ध्रुव तक पहुंचाए। सुमित उस समय परीक्षा में अभ्यर्थी था और बाद में डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित हुआ।
छत्तीसगढ़ सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध IAS सिविल लिस्ट में जीवन किशोर ध्रुव को CGPSC सचिव के रूप में दर्ज किया गया था।
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क्या है CGPSC Paper Leak का आरोप?
अभियोजन पक्ष और CBI के अनुसार, ध्रुव जब CGPSC के सचिव थे, तब 2021 की सिविल सेवा परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र उनके पास थे। आरोप है कि उन्होंने इन प्रश्नपत्रों को अपने बेटे को उपलब्ध कराया।
जांच के दौरान ध्रुव के घर से सामान्य अध्ययन के पेपर-7 से जुड़े प्रश्न और उत्तर तथा पेपर-2 की प्रश्न-सह-उत्तर पुस्तिका बरामद होने का दावा किया गया।
CBI के मुताबिक, पेपर-7 के 47 में से 42 प्रश्न ऐसे थे, जो ध्रुव के घर से बरामद सामग्री में मौजूद प्रश्नों से मेल खाते थे। जांच एजेंसी ने यह भी कहा कि बरामद प्रश्न-सह-उत्तर पुस्तिका सुमित ध्रुव की थी।
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बेटे की परीक्षा से जुड़े अहम सबूत
जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने का दावा किया गया। सुमित ध्रुव ने चार विषयों पर निबंध का अभ्यास किया था।
इनमें क्रिप्टोकरेंसी, रूस-यूक्रेन युद्ध और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका, दंतेवाड़ा जिले का विकास तथा छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम शामिल थे।
अभियोजन के अनुसार, ये चारों विषय बाद में मुख्य परीक्षा में पूछे गए। सुमित ध्रुव का चयन इसके बाद डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये सभी आरोप और जांच में सामने आए तथ्य हैं। अंतिम आपराधिक दोषसिद्धि अदालत के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।
कोर्ट ने क्यों खारिज की जमानत?
न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की पीठ ने मामले में उपलब्ध दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और ध्रुव के आवास से बरामद सामग्री पर विचार किया।
कोर्ट ने प्रथमदृष्टया माना कि जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री आरोपी की कथित भूमिका की ओर संकेत करती है। अदालत ने इस मामले को केवल किसी एक अभ्यर्थी से जुड़ा मामला नहीं माना।
कोर्ट ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक कराने में मदद करना लाखों युवाओं के करियर और भविष्य से खिलवाड़ करने जैसा है।
अदालत ने यह भी माना कि ध्रुव की कथित भूमिका इसलिए गंभीर है क्योंकि वे परीक्षा सामग्री की गोपनीयता बनाए रखने के लिए जिम्मेदार पद पर थे।
CGPSC Paper Leak ने भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपों का असर पूरी सार्वजनिक भर्ती प्रक्रिया की पवित्रता और निष्पक्षता पर पड़ता है।
अदालत के अनुसार, ध्रुव पर अपने पद का कथित दुरुपयोग कर 2021 मुख्य परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र अपने पास रखने और उन्हें अपने बेटे को उपलब्ध कराने का आरोप है।
कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि बेटे द्वारा अभ्यास किए गए चार विषय कथित तौर पर परीक्षा में आए थे और घर से बरामद सामग्री तथा गवाहों के बयान प्रथमदृष्टया मामले में उनकी भूमिका की ओर संकेत करते हैं।
बचाव पक्ष की क्या थी दलील?
ध्रुव की ओर से अदालत में कहा गया कि उन्होंने अधिकारियों को पहले ही जानकारी दी थी कि उनके बेटे परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें परीक्षा से संबंधित गोपनीय कार्यों से अलग रखा जाए।
बचाव पक्ष ने यह तर्क भी दिया कि जांच पूरी हो चुकी है, चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और ध्रुव सितंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में हैं।
हालांकि, हाईकोर्ट इन दलीलों से जमानत देने के लिए संतुष्ट नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि इस चरण में जांच के दौरान एकत्र सामग्री उनकी कथित संलिप्तता को दिखाने के लिए पर्याप्त है।
भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल
CGPSC Paper Leak मामले में हाईकोर्ट का फैसला प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
CGPSC राज्य में विभिन्न सरकारी पदों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन करता है। ऐसे में प्रश्नपत्र की गोपनीयता और चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता सीधे लाखों अभ्यर्थियों के भरोसे से जुड़ी होती है।
ध्रुव की जमानत याचिका खारिज होने का मतलब यह नहीं है कि आरोप साबित हो चुके हैं। मामला आगे न्यायिक प्रक्रिया से गुजरेगा और आरोपों पर अंतिम फैसला साक्ष्यों और कानून के आधार पर होगा।
CGPSC Paper Leak मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह फैसला भर्ती परीक्षाओं की गोपनीयता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर संदेश देता है। अदालत ने प्रथमदृष्टया उपलब्ध सामग्री और आरोपी की कथित भूमिका को देखते हुए जमानत देने से इनकार किया है। अब मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया और जांच पर सभी की नजर रहेगी।
