06 अगस्त 2026 | ग्वालियर
Gwalior Court TI Uniform Case बुधवार को मध्य प्रदेश के ग्वालियर की एक अदालत में चर्चा का विषय बन गया। विशेष न्यायाधीश सुनील दंडोतिया की अदालत में विश्वविद्यालय थाना प्रभारी रविंद्र कुमार कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद पुलिस वर्दी पहनकर पहुंच गए। अदालत ने इसे आदेश की अवहेलना मानते हुए कड़ी नाराजगी जताई, उन्हें वापस जाकर सिविल ड्रेस में आने का निर्देश दिया और बाद में देर शाम तक कटघरे में खड़ा रखा। इस पूरे मामले की जड़ एक जब्त देसी कट्टे के गायब होने से जुड़ी है।
Gwalior Court TI Uniform Case: बिना वर्दी बुलाया, फिर भी वर्दी में पहुंचे TI
विशेष न्यायाधीश सुनील दंडोतिया ने एक आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय थाना प्रभारी रविंद्र कुमार को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया था।
आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि थाना प्रभारी को बिना पुलिस वर्दी के अदालत में पेश होना है। इसके बावजूद वह पुलिस वर्दी पहनकर अदालत पहुंचे। इसे न्यायालय ने अपने आदेश की अनदेखी माना।
कोर्ट ने तत्काल उन्हें वापस भेजते हुए निर्देश दिया कि वे सिविल ड्रेस पहनकर ही दोबारा अदालत में उपस्थित हों।
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Gwalior Court TI Uniform Case: कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी
जब थाना प्रभारी दोबारा सिविल ड्रेस में अदालत पहुंचे तो न्यायालय ने उन्हें देर शाम तक कटघरे में उपस्थित रहने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा कि यदि इसी समय जेल भेजने की नौबत आ जाए तो क्या वे वर्दी में ही जाएंगे। कोर्ट का कहना था कि जब आदेश स्पष्ट था, तो उसका पालन हर हाल में होना चाहिए था।
इस दौरान थाना प्रभारी ने अपना पक्ष रखा और अदालत से क्षमा भी मांगी, लेकिन न्यायालय ने मामले को गंभीर मानते हुए सख्ती बरती।
देसी कट्टे की जब्ती से जुड़ा है पूरा मामला
Gwalior Court TI Uniform Case की पृष्ठभूमि एक देसी कट्टे की जब्ती से जुड़े मामले में है।
अदालत ने पहले पुलिस को जब्त हथियार कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया था, लेकिन पुलिस ऐसा नहीं कर सकी। इसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह को पत्र लिखकर थाना प्रभारी की व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
अदालत ने यह भी कहा था कि यदि अधिकारी उपस्थित नहीं होते हैं, तो यह माना जाएगा कि उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है या वरिष्ठ अधिकारियों का अधीनस्थों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं है।
TI ने कोर्ट से मांगी माफी
सुनवाई के दौरान थाना प्रभारी रविंद्र कुमार ने अदालत से माफी मांगते हुए कहा कि मामले में हुई चूक एक ऐसे पुलिसकर्मी से जुड़ी है जो अब सेवानिवृत्त हो चुका है।
उन्होंने यह भी बताया कि रिकॉर्ड में जब्त माल दर्ज होने के बावजूद वह मालखाने में उपलब्ध नहीं मिला। चार्ज हैंडओवर के समय भी संबंधित सामग्री उन्हें नहीं सौंपी गई थी।
हालांकि अदालत ने इस स्पष्टीकरण को पर्याप्त नहीं माना।
Gwalior Court TI Uniform Case: 15 दिन में जांच और FIR के निर्देश
मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने थाना प्रभारी को 15 दिनों के भीतर पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराने का आदेश दिया।
इसके साथ ही दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जब्त माल का गायब होना बेहद गंभीर विषय है और ऐसे मामलों में जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल
अदालत ने आश्चर्य जताया कि जब्त माल के गायब होने जैसी गंभीर घटना के बावजूद अब तक न तो विस्तृत जांच हुई और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की गई।
न्यायालय ने इस लापरवाही पर चिंता व्यक्त करते हुए पुलिस प्रशासन से जवाब-तलब किया और समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश जारी किए।
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Gwalior Court TI Uniform Case यह दर्शाता है कि न्यायालय अपने आदेशों की अवहेलना को गंभीरता से लेता है। चाहे मामला अदालत में वर्दी पहनकर पहुंचने का हो या जब्त माल के गायब होने का, दोनों ही स्थितियों में जवाबदेही तय करना न्याय व्यवस्था की प्राथमिकता है। अब 15 दिनों के भीतर जांच और संभावित एफआईआर की कार्रवाई इस मामले की अगली महत्वपूर्ण कड़ी होगी।
