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Hasdeo Coal Block Clearance: राजस्थान को कोयले की बड़ी राहत, हसदेव अरण्य पर बढ़ी चिंता

Hasdeo Coal Block Clearance को लेकर केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य क्षेत्र में स्थित केंटे एक्सटेंशन ओपन कास्ट कोल ब्लॉक को सैद्धांतिक (स्टेज-1) वन स्वीकृति मिल गई है। इस मंजूरी के बाद राजस्थान के ताप विद्युत संयंत्रों को अतिरिक्त कोयला आपूर्ति का रास्ता साफ हो गया है।

यह स्वीकृति राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की वन सलाहकार समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रदान की गई है।

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Hasdeo Coal Block Clearance क्या है?

Hasdeo Coal Block Clearance के तहत केंटे एक्सटेंशन कोल ब्लॉक में खनन के लिए 1,742.60 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार यह खदान प्रतिवर्ष लगभग 90 लाख टन कोयला उत्पादन करने में सक्षम होगी। परियोजना की अनुमानित अवधि 33 से 36 वर्ष बताई गई है और इसे छह चरणों में विकसित किया जाएगा।

इस कोयले का उपयोग मुख्य रूप से राजस्थान के चबरा और सूरतगढ़ ताप विद्युत संयंत्रों में किया जाएगा।

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राजस्थान को कैसे होगा फायदा?

राजस्थान में लगातार बढ़ती बिजली मांग और कोयले की कमी लंबे समय से चुनौती बनी हुई है।

राज्य के ताप विद्युत संयंत्रों को हर साल लगभग 2.405 करोड़ टन कोयले की आवश्यकता होती है। वर्तमान स्रोत इस मांग को पूरा नहीं कर पा रहे हैं, जिससे लगभग 90 लाख टन की वार्षिक कमी बनी हुई है।

बिजली उत्पादन को मिलेगा सहारा

Hasdeo Coal Block Clearance के बाद मिलने वाला अतिरिक्त कोयला राजस्थान के बड़े बिजलीघरों को पूर्ण क्षमता पर संचालन में मदद करेगा।

अधिकारियों का अनुमान है कि इस खदान से निकलने वाला वार्षिक कोयला जयपुर शहर की औसत बिजली जरूरत को लगभग 14 से 17 महीनों तक पूरा करने के बराबर है।

हालांकि उत्पादित बिजली केवल जयपुर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे राजस्थान के विद्युत ग्रिड को मजबूती देगी।

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Hasdeo Coal Block Clearance और पर्यावरणीय प्रभाव

4.48 लाख से अधिक पेड़ होंगे प्रभावित

Hasdeo Coal Block Clearance का सबसे बड़ा पर्यावरणीय पहलू वन क्षेत्र पर इसका प्रभाव है।

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार परियोजना से कुल 4,48,874 पेड़ प्रभावित होंगे। इनमें लगभग 3,81,460 पेड़ों को काटने का प्रस्ताव है, जबकि 67,414 छोटे पेड़ों को स्थानांतरित (Translocation) करने की योजना बनाई गई है।

हसदेव अरण्य क्षेत्र घने साल वनों और समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है, इसलिए पर्यावरणविदों की नजर भी इस परियोजना पर बनी हुई है।

वन्यजीवों पर पड़ने वाला असर

हाथी रिजर्व के बेहद करीब खनन क्षेत्र

केंटे एक्सटेंशन कोल ब्लॉक का क्षेत्र लेमरू हाथी रिजर्व से लगभग 3.6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

हसदेव अरण्य हाथियों के अलावा तेंदुए, भालू, चीतल, लकड़बग्घा, सियार और पैंगोलिन जैसे वन्यजीवों का महत्वपूर्ण आवास माना जाता है।

इसी कारण Hasdeo Coal Block Clearance के साथ वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने संबंधी कई शर्तें भी लगाई गई हैं।

वन्यजीव प्रबंधन योजना लागू होगी

खनन अवधि के दौरान कंपनी को वन्यजीव प्रबंधन योजना लागू करनी होगी ताकि जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सके।

कंपनी पर क्या होंगी जिम्मेदारियां?

इस परियोजना के लिए RVUNL को कई वित्तीय और पर्यावरणीय दायित्व पूरे करने होंगे।

कंपनी को वन भूमि डायवर्जन के लिए नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) शुल्क जमा करना होगा। इसके अलावा 636.557 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) भी करना होगा।

करोड़ों रुपये की पर्यावरणीय योजनाएं

परियोजना के तहत लगभग 16.73 करोड़ रुपये की वन्यजीव शमन योजना और लगभग 15.01 करोड़ रुपये की मृदा एवं नमी संरक्षण योजना लागू करनी होगी।

इन योजनाओं का उद्देश्य पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम करना है।

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अंतिम मंजूरी अभी बाकी

स्टेज-1 मंजूरी, अंतिम अनुमति नहीं

महत्वपूर्ण बात यह है कि Hasdeo Coal Block Clearance अभी केवल स्टेज-1 वन स्वीकृति है। यह अंतिम खनन अनुमति नहीं मानी जाएगी।

पहले चरण में लगभग 1,001.95 हेक्टेयर वन भूमि पर अधिकतम 15 वर्षों तक खनन प्रस्तावित है।

दूसरे चरण की 740.65 हेक्टेयर भूमि पर खनन तभी संभव होगा जब पर्यावरणीय और जैव विविधता संबंधी सभी शर्तों का पालन संतोषजनक पाया जाएगा।

इसके अलावा कंपनी को अन्य सभी पर्यावरणीय स्वीकृतियां और प्रतिपूरक वनीकरण संबंधी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।

कोयला परिवहन भी बड़ी चुनौती

खनन शुरू होने के बाद कोयले को छत्तीसगढ़ से राजस्थान पहुंचाना भी एक बड़ी चुनौती होगी।

इसके लिए रेलवे कनेक्टिविटी, कोल हैंडलिंग सुविधाएं, वाशरी और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क जैसे बड़े बुनियादी ढांचे की आवश्यकता पड़ेगी।

नियमित कोयला आपूर्ति शुरू होने से पहले अतिरिक्त निवेश और कई अन्य स्वीकृतियां भी जरूरी होंगी।

Hasdeo Coal Block Clearance राजस्थान की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे राज्य को दीर्घकालिक कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है और बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ सकती है। वहीं दूसरी ओर, 4.48 लाख से अधिक पेड़ों और संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर पर्यावरणीय चिंताएं भी बनी हुई हैं। इसलिए Hasdeo Coal Block Clearance परियोजना का भविष्य पर्यावरणीय शर्तों के प्रभावी पालन और संतुलित विकास पर निर्भर करेगा।

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