Assam Flood 2026 इस मानसून में देश की सबसे गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में से एक बनकर सामने आया है। 2 अगस्त तक उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, असम में 85 लोगों की मौत हो चुकी है और 3 लाख से अधिक लोग सात जिलों में बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। सैकड़ों गांव जलमग्न हैं और हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुंचा है।
हालांकि इस बार की बाढ़ को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि केवल अत्यधिक वर्षा ही इसकी वजह नहीं है। उनका दावा है कि असम-नागालैंड सीमा पर अवैध कोयला खनन और सिवसागर जिले में अवैध पत्थर खनन ने भी बाढ़ की गंभीरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह विशेषज्ञों की राय है और इस पर संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक जांच या निष्कर्ष अलग हो सकते हैं।
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Assam Flood 2026: क्या है मौजूदा स्थिति?
इस मानसून में असम सबसे अधिक प्रभावित राज्य रहा है। बाढ़ के कारण कई ऐसे जिले भी प्रभावित हुए हैं जो सामान्यतः मानसूनी बाढ़ से सुरक्षित माने जाते थे।
सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं—
- चराइदेव (Charaideo)
- जोरहाट (Jorhat)
- सिवसागर (Sivasagar)
इन इलाकों में अचानक आई बाढ़ ने स्थानीय लोगों और प्रशासन दोनों को चौंका दिया।
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Assam Flood 2026: विशेषज्ञों ने क्या बताया?
डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. प्रांजल प्रतिम बरगोहाईं के अनुसार, इस आपदा के पीछे मानव गतिविधियों (Anthropogenic Factors) की भी बड़ी भूमिका है।
उनका कहना है कि—
- अनियोजित शहरीकरण
- अवैध कोयला खनन
- वनों की कटाई
- प्राकृतिक जल संरक्षण क्षमता में कमी
ने बाढ़ के प्रभाव को कई गुना बढ़ा दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब मिट्टी और वनस्पति की पानी को रोकने की क्षमता कम हो जाती है, तो भारी वर्षा का पानी तेजी से निचले इलाकों में पहुंचकर बाढ़ का कारण बनता है।
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Assam Flood 2026: अवैध कोयला और पत्थर खनन का क्या असर?
डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय के एप्लाइड जियोलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रांजित कलिता ने बताया कि असम-नागालैंड सीमा, विशेषकर नागालैंड के मोन (Mon) और आसपास के क्षेत्रों में कथित अवैध कोयला खनन से मिट्टी की जल धारण क्षमता प्रभावित हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि—
- अवैध खनन से पहाड़ी क्षेत्रों की प्राकृतिक संरचना कमजोर हुई।
- वर्षा का पानी तेजी से चराइदेव, जोरहाट और सिवसागर तक पहुंचा।
- सिवसागर के बिहुबार क्षेत्र में अवैध पत्थर खनन के कारण कृत्रिम जलाशय (Man-made Lakes) बन गए, जो भारी बारिश के बाद ओवरफ्लो हो गए।
हालांकि इन दावों पर संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक निष्कर्ष जारी नहीं किया गया है।
किन नदियों ने बढ़ाई परेशानी?
रिपोर्ट के अनुसार, कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
इनमें शामिल हैं—
- दिकहो (Dikhow)
- बुरी दिहिंग (Buridihing)
- दिसांग (Disang)
- धनसिरी (Dhansiri)
- ब्रह्मपुत्र (Brahmaputra)
इन नदियों के जलस्तर में वृद्धि से कई नए इलाकों में बाढ़ की स्थिति पैदा हुई।
Assam Flood 2026: राहत और बचाव अभियान जारी
भारतीय सेना ऑपरेशन जल राहत (Operation Jal Rahat) के तहत कई जिलों में राहत एवं बचाव अभियान चला रही है।
स्थानीय प्रशासन, राज्य आपदा बल और स्वयंसेवी संगठन भी प्रभावित लोगों तक आवश्यक सामग्री पहुंचा रहे हैं।
राहत कार्यों के दौरान लोगों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं—
- खाद्य सामग्री
- गद्दे
- खाना बनाने के बर्तन
- पेयजल
- आवश्यक दवाइयां
कई स्थानीय ग्रामीणों ने भी लकड़ी और अन्य सामग्री से अस्थायी नावें बनाकर फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में मदद की।
लोगों ने दिखाई एकजुटता
डिब्रूगढ़ और लखीमपुर सहित कई जिलों से स्वयंसेवक प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री लेकर पहुंचे।
स्वयंसेवकों का कहना है कि कई गांव अब भी जलमग्न हैं और राहत कार्य लगातार जारी है। शुरुआती दौर में स्थानीय लोगों ने सरकारी सहायता पहुंचने से पहले ही एक-दूसरे की मदद शुरू कर दी थी।
Assam Flood 2026 ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या केवल भारी बारिश ही बाढ़ की वजह है या मानव गतिविधियां भी प्राकृतिक आपदाओं को और गंभीर बना रही हैं। विशेषज्ञों ने अवैध कोयला और पत्थर खनन के संभावित प्रभावों की ओर ध्यान दिलाया है, हालांकि इन दावों पर आधिकारिक जांच और निष्कर्ष आना बाकी है। फिलहाल राज्य में राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं और लाखों लोग सामान्य जीवन बहाल होने का इंतजार कर रहे हैं।
