Environmental Performance Index 2026 में भारत का प्रदर्शन चिंता बढ़ाने वाला रहा है। येल यूनिवर्सिटी (Yale University) और कोलंबिया यूनिवर्सिटी (Columbia University) द्वारा जारी इस वैश्विक पर्यावरण रिपोर्ट में भारत 177 देशों में 176वें स्थान पर रहा। भारत का कुल EPI स्कोर 22.46 दर्ज किया गया, जबकि सूची में केवल लाओस (Laos) भारत से नीचे रहा। इस साल एस्टोनिया (Estonia) ने 74.79 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया।
यह रिपोर्ट देशों के पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, स्वच्छता और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के आधार पर तैयार की जाती है।
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Environmental Performance Index 2026 क्या है?
Environmental Performance Index 2026 (EPI) दुनिया के देशों के पर्यावरणीय प्रदर्शन का मूल्यांकन करने वाला एक वैश्विक सूचकांक है। इसे Yale University और Columbia University द्वारा विकसित किया जाता है।
इस रिपोर्ट में देशों का मूल्यांकन कई मानकों पर किया जाता है, जिनमें प्रमुख हैं—
- वायु गुणवत्ता (Air Quality)
- जलवायु परिवर्तन (Climate Change)
- जैव विविधता (Biodiversity)
- प्राकृतिक आवास संरक्षण (Habitat)
- स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन
- पर्यावरणीय नीतियां
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Environmental Performance Index 2026 में भारत की रैंकिंग
रिपोर्ट के अनुसार भारत का प्रदर्शन इस प्रकार रहा—
- वैश्विक रैंक: 176/177
- कुल स्कोर: 22.46/100
- दक्षिण एशिया क्षेत्रीय रैंक: 8
- क्षेत्रीय औसत स्कोर: 31.81
भारत इस सूची में केवल लाओस से ऊपर रहा, जबकि बांग्लादेश 175वें स्थान पर रहा।
Environmental Performance Index 2026: किन क्षेत्रों में भारत पिछड़ा?
रिपोर्ट में भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता वायु गुणवत्ता और जैव विविधता संरक्षण को बताया गया है।
वायु गुणवत्ता (Air Quality)
भारत को इस श्रेणी में 174वां स्थान मिला।
रिपोर्ट के अनुसार इसके प्रमुख कारण हैं—
- औद्योगिक प्रदूषण
- वाहनों से निकलने वाला धुआं
- निर्माण कार्यों से धूल
- शहरी क्षेत्रों में बढ़ता प्रदूषण
जैव विविधता और प्राकृतिक आवास
इस श्रेणी में भी भारत 174वें स्थान पर रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक—
- जंगलों का घटता क्षेत्र
- प्राकृतिक आवास का विखंडन
- वृक्षों की कटाई
- पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ता दबाव
इस प्रदर्शन के प्रमुख कारण रहे।
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Environmental Performance Index 2026 में भारत की सकारात्मक उपलब्धियां
हालांकि कुल रैंकिंग कमजोर रही, लेकिन कुछ क्षेत्रों में भारत ने सुधार भी दर्ज किया।
जलवायु परिवर्तन (Climate Change)
भारत को इस श्रेणी में 130वां स्थान मिला।
रिपोर्ट के अनुसार—
- नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) का विस्तार
- ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) से जुड़े नियम
- स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश
ने इस क्षेत्र में प्रदर्शन बेहतर किया।
अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता
इस श्रेणी में भारत 141वें स्थान पर रहा।
स्वच्छता अभियान, घरेलू शौचालय निर्माण और कचरा प्रबंधन से जुड़े कार्यक्रमों को इसके पीछे प्रमुख कारण बताया गया है।
Environmental Performance Index 2026: दुनिया के टॉप 10 देश
रिपोर्ट के अनुसार शीर्ष 10 देश इस प्रकार हैं—
- एस्टोनिया
- लक्ज़मबर्ग
- यूनाइटेड किंगडम
- फिनलैंड
- नीदरलैंड
- जर्मनी
- फ्रांस
- नॉर्वे
- स्वीडन
- ऑस्ट्रिया
इन देशों ने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा और प्रदूषण नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया।
भारत के लिए आगे की चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपनी रैंकिंग सुधारने के लिए—
- वायु प्रदूषण पर सख्त नियंत्रण
- हरित ऊर्जा का विस्तार
- जंगलों का संरक्षण
- जैव विविधता को बढ़ावा
- शहरी कचरा प्रबंधन में सुधार
जैसे क्षेत्रों पर तेजी से काम करने की जरूरत है।
Environmental Performance Index 2026 में भारत का 176वां स्थान पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में गंभीर चुनौतियों की ओर संकेत करता है। हालांकि जलवायु परिवर्तन और स्वच्छता जैसे क्षेत्रों में कुछ सुधार दर्ज किए गए हैं, लेकिन वायु गुणवत्ता और जैव विविधता में कमजोर प्रदर्शन चिंता का विषय बना हुआ है। आने वाले वर्षों में यदि प्रदूषण नियंत्रण, हरित ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर प्रभावी कदम उठाए जाते हैं, तो भारत अपनी वैश्विक रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार कर सकता है।
