Durg News — छत्तीसगढ़ के दुर्ग शहर से एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। नगर पालिक निगम, दुर्ग ने 15 अप्रैल 2026 को अपनी स्वच्छता व्यवस्था, कचरा निपटान प्रणाली और ₹44 करोड़ के बजट को लेकर एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है।
निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ‘मिशन क्लीन सिटी’ के अंतर्गत शहर की सफाई व्यवस्था को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है और जो भ्रांतियाँ समाज में फैली हैं, उन्हें दूर करना जरूरी है।
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दुर्ग नगर निगम का ₹44 करोड़ बजट — क्या है पूरी सच्चाई?
Durg News में यह जानना आवश्यक है कि दुर्ग नगर निगम पर अक्सर यह आरोप लगाए जाते हैं कि ₹44 करोड़ का भारी-भरकम बजट केवल कचरा फेंकने पर खर्च हो रहा है।
लेकिन निगम प्रशासन ने इस धारणा को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि यह राशि एक व्यापक और बहु-आयामी स्वच्छता अभियान पर खर्च की जा रही है।
इस बजट में हजारों सफाई कर्मचारियों के वेतन, आधुनिक मशीनों का रख-रखाव, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और भविष्य की योजनाओं के लिए निवेश शामिल है।
Durg News: मिशन क्लीन सिटी — क्या है यह योजना?
Durg News के पाठकों को बताना जरूरी है कि ‘मिशन क्लीन सिटी’ दुर्ग नगर निगम की एक महत्वाकांक्षी स्वच्छता योजना है, जिसका लक्ष्य दुर्ग शहर को एक साफ-सुथरे और स्वस्थ शहर के रूप में विकसित करना है।
इस मिशन के अंतर्गत शहर के हर वार्ड में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन, सार्वजनिक स्थानों की नियमित सफाई और कचरे के वैज्ञानिक निपटान की व्यवस्था की जा रही है।
स्वच्छ भारत मिशन से कैसे जुड़ा है यह अभियान?
यह योजना केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के अनुरूप संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य न केवल शहर को साफ रखना है, बल्कि कचरे का वैज्ञानिक पृथक्करण और पुनर्उपयोग सुनिश्चित करना भी है।
दुर्ग नगर निगम इस दिशा में जीरो वेस्ट की नीति पर काम कर रहा है, जो एक दूरदर्शी और पर्यावरण-हितैषी सोच को दर्शाता है।
SLRM सेंटर और स्वच्छता दीदियों की भूमिका
Durg News की इस महत्वपूर्ण खबर में SLRM (Solid and Liquid Resource Management) सेंटरों की भूमिका को समझना बेहद जरूरी है।
निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में सभी SLRM सेंटर पूरी तरह क्रियाशील हैं। इन केंद्रों में स्वच्छता दीदियाँ — यानी महिला सफाई कर्मी — वार्डों से एकत्रित कचरे का हाथ से पृथक्करण और निपटान करती हैं।
स्वच्छता दीदियों का अथक परिश्रम
ये स्वच्छता दीदियाँ शहर की साफ-सफाई की असली नायिकाएँ हैं। प्रतिदिन सुबह से काम शुरू कर ये महिलाएँ कचरे को गीले और सूखे दो भागों में अलग करती हैं, जिससे पुनर्चक्रण की प्रक्रिया आसान होती है।
निगम इन केंद्रों को और अधिक आधुनिक बनाने के लिए बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने और मशीनीकरण की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।
Durg News: 8 नए SLRM सेंटर और प्रोसेसिंग प्लांट की बड़ी तैयारी
यह Durg News की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण जानकारी है। दुर्ग नगर निगम ने शहर की बढ़ती जनसंख्या और कचरा प्रबंधन की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए 8 नए SLRM सेंटरों के निर्माण की योजना बनाई है।
शासन से इन 8 नए केंद्रों के निर्माण की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है, जो इस बात का प्रमाण है कि निगम केवल कागजों पर नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर भी काम कर रहा है।
3 केंद्रों का निर्माण जारी, 5 के लिए भूमि चिन्हांकन
वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:
- 3 नए SLRM सेंटर — निर्माण कार्य प्रगति पर है
- 5 नए SLRM सेंटर — भूमि चिन्हांकन की प्रक्रिया जारी है
- 1 नया प्रोसेसिंग प्लांट — निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में
यह प्रोसेसिंग प्लांट शहर के कचरे को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस करने में सक्षम होगा, जिससे डंपिंग यार्ड पर दबाव कम होगा।
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डंपिंग यार्ड में आग — निगम ने दिया चौंकाने वाला स्पष्टीकरण
Durg News में यह मुद्दा भी काफी चर्चा में रहा है। डंपिंग यार्ड में बार-बार आग लगने की घटनाओं को लेकर नगर निगम पर गंभीर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
निगम प्रशासन ने अब इस पर विस्तृत स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि डंपिंग यार्ड में आग लगने की घटनाएं मुख्यतः दो कारणों से होती हैं:
आग लगने के दो प्रमुख कारण
पहला कारण: कचरे में मौजूद ज्वलनशील पदार्थ — जैसे प्लास्टिक, केमिकल युक्त सामग्री और गैसीय पदार्थ — जो गर्मी में स्वतः प्रज्वलित हो सकते हैं।
दूसरा कारण: बाहरी तत्वों की शरारत — कुछ असामाजिक तत्व जानबूझकर डंपिंग यार्ड में आग लगा देते हैं।
निगम ने स्पष्ट किया कि इसे निगम की लापरवाही मानना उचित नहीं है। निगम जीरो वेस्ट की नीति पर काम कर रहा है और डंपिंग यार्ड में कचरे का भंडारण कम से कम करने की दिशा में प्रयासरत है।
Durg News: ₹44 करोड़ बजट का सही उपयोग — पूरा हिसाब-किताब
Durg News पाठकों के लिए यह समझना जरूरी है कि ₹44 करोड़ का बजट आखिर कहाँ-कहाँ खर्च होता है। निगम ने इसका विस्तृत विवरण इस प्रकार दिया है:
बजट के प्रमुख उपयोग
1. सफाई कर्मचारियों का वेतन शहर में हजारों सफाई कर्मी कार्यरत हैं। इनके मासिक वेतन का भुगतान बजट का एक बड़ा हिस्सा है। यह कर्मी ही शहर की स्वच्छता की रीढ़ हैं।
2. डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन हर घर से कचरा उठाने की व्यवस्था के लिए वाहन, चालक और कर्मी — सभी का खर्च इसी बजट से निकलता है।
3. मशीनों का रख-रखाव सफाई वाहनों, कचरा उठाने की मशीनों और SLRM सेंटरों के उपकरणों की मरम्मत और रख-रखाव पर भी बड़ी राशि खर्च होती है।
4. वेस्ट-टू-कम्पोस्ट प्लांट भविष्य में प्रस्तावित वेस्ट-टू-कम्पोस्ट प्लांट के लिए निवेश और योजना निर्माण पर भी बजट का उपयोग हो रहा है। यह प्लांट कचरे को खाद में बदलेगा, जो किसानों के लिए उपयोगी होगी।
5. बुनियादी ढाँचे का विस्तार नए SLRM सेंटरों के निर्माण, बिजली आपूर्ति और मशीनीकरण पर भी बजट का बड़ा हिस्सा खर्च किया जा रहा है।
जीरो वेस्ट नीति — भविष्य की दिशा
दुर्ग नगर निगम की जीरो वेस्ट नीति एक अत्यंत महत्वाकांक्षी और पर्यावरण-हितैषी लक्ष्य है।
इस नीति के अंतर्गत शहर में उत्पन्न होने वाले कचरे का शत-प्रतिशत वैज्ञानिक रूप से प्रबंधन किया जाएगा। गीला कचरा खाद बनेगा, सूखा कचरा रिसाइकिल होगा और शेष को प्रोसेसिंग प्लांट में ट्रीट किया जाएगा।
वेस्ट-टू-कम्पोस्ट प्लांट — किसानों के लिए वरदान
प्रस्तावित वेस्ट-टू-कम्पोस्ट प्लांट न केवल शहर को साफ रखेगा, बल्कि इससे तैयार होने वाली जैविक खाद क्षेत्र के किसानों के लिए भी उपयोगी होगी।
यह एक सर्कुलर इकोनॉमी का बेहतरीन उदाहरण होगा — जहाँ शहर का कचरा ही ग्रामीण खेतों की उर्वरता बढ़ाएगा।
Durg News: स्वच्छ दुर्ग की दिशा में ऐतिहासिक कदम
Durg News की यह खबर स्पष्ट करती है कि दुर्ग नगर निगम केवल आरोपों का जवाब देने तक सीमित नहीं है, बल्कि ठोस जमीनी कार्य भी कर रहा है।
₹44 करोड़ का बजट, 8 नए SLRM सेंटर, प्रोसेसिंग प्लांट की निविदा और जीरो वेस्ट नीति — ये सब मिलकर दुर्ग को एक स्वच्छ और आधुनिक शहर बनाने की दिशा में मजबूत कदम हैं।
नागरिकों का भी यह दायित्व है कि वे कचरे का सही तरीके से पृथक्करण करें, डोर-टू-डोर कलेक्शन में सहयोग करें और मिशन क्लीन सिटी को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाएँ। Durg News पाठकों से अपील है कि वे इस अभियान का हिस्सा बनें और अपने शहर को साफ रखने में सहयोग दें।
