गोवा के Ponda तालुका से एक बेहद खूबसूरत और आध्यात्मिक संगीत समाचार सामने आया है। मशहूर गोमांतकीय गायिका डॉ. शकुंतला भरणे ने अपनी मधुर और दिल को छू लेने वाली आवाज़ में दो भक्ति गीतों को रिकॉर्ड किया है, जिन्हें हाल ही में एक भव्य समारोह में जनता के सामने प्रस्तुत किया गया।
ये भक्ति गीत मशहूर गोमांतकीय गीतकारों माधव बोरकर और माणिक राव गवणेकर की लेखनी से उपजे हैं। इन गीतों में आध्यात्मिकता, भक्ति और सांस्कृतिक परंपरा का अद्भुत समावेश है।
शकुंतला भरणे की गायकी ने इन गीतों को एक अलग ही ऊंचाई तक पहुंचा दिया है। भक्तों और संगीत प्रेमियों के बीच यह एल्बम बेहद लोकप्रिय हो रहा है।
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दो भक्ति गीत – “नाम ही जप तू” और “तू देवी महामाया”
“नाम ही जप तू” – माणिक राव गवणेकर की कलम से
पहला भक्ति गीत “नाम ही जप तू” गीतकार माणिक राव गवणेकर ने लिखा है। इस गीत का संगीत स्वयं शकुंतला भरणे ने तैयार किया है, जो उनकी संगीत प्रतिभा का एक और प्रमाण है।
इस गीत में ईश्वर के नाम की महिमा और भक्ति की शक्ति को बेहद सरल और असरदार शब्दों में पिरोया गया है। शकुंतला भरणे की आवाज़ में यह गीत सुनने वालों को एक गहरी आध्यात्मिक अनुभूति देता है।
“तू देवी महामाया” – माधव बोरकर और दत्ता दावजेकर का संगम
दूसरा भक्ति गीत “तू देवी महामाया” गीतकार माधव बोरकर ने लिखा है। इस गीत का संगीत भारतीय सिनेमा जगत के जाने-माने संगीतकार दत्ता दावजेकर ने तैयार किया है।
दत्ता दावजेकर का नाम भारतीय फ़िल्म संगीत में अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। उनके संगीत और शकुंतला भरणे की आवाज़ के संयोजन ने इस गीत को एक अद्वितीय रचना बना दिया है।
Ponda के पवित्र स्थलों पर हुई फिल्मांकन
महालक्ष्मी संस्थान और नवदुर्गा देवस्थान की दिव्य पृष्ठभूमि
इन दोनों भक्ति गीतों की शूटिंग Ponda तालुका के दो अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों पर की गई। पहला स्थल है श्री महालक्ष्मी संस्थान, बांदीवडे और दूसरा है श्री नवदुर्गा देवस्थान, कुंडई।
ये दोनों स्थान Ponda क्षेत्र में आस्था और धार्मिकता के केंद्र माने जाते हैं। इन पवित्र स्थलों के दिव्य वातावरण ने गीतों की भक्तिमय भावना को और भी प्रभावशाली और गहरा बना दिया।
सैंडी सरदेसाई का सिनेमाई कैमरा वर्क
मशहूर कैमरामैन सैंडी सरदेसाई ने इन गीतों को एक खूबसूरत सिनेमाई अंदाज़ में कैमरे में कैद किया है। उनके कुशल कैमरा वर्क ने Ponda के इन पवित्र स्थलों की सुंदरता और पवित्रता को दर्शकों तक बखूबी पहुंचाया है।
हर फ्रेम में भक्ति की भावना और गोवा की सांस्कृतिक विरासत की झलक साफ़ दिखती है। यह तकनीकी और कलात्मक संयोजन इस एल्बम को एक विशेष दर्जा देता है।
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करण समर्थ का कलात्मक निर्देशन
हॉलीवुड अनुभव से सजाया भक्ति गीतों को
इन दोनों भक्ति गीतों को हॉलीवुड फ़िल्म के अनुभवी निर्देशक करण समर्थ ने कलात्मक रूप से निर्देशित किया है। करण समर्थ के हॉलीवुड के अनुभव और भारतीय भक्ति परंपरा का यह अनूठा संगम इन गीतों को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रस्तुति देता है।
उनकी निर्देशन शैली में भक्ति की गहराई और आधुनिक सिनेमाई सौंदर्यशास्त्र का बेहतरीन मेल देखने को मिलता है। इस एल्बम के हर फ्रेम में उनकी कलात्मक दृष्टि स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
दिल्ली में व्यस्त – समारोह में नहीं आ सके करण
हालांकि निर्देशक करण समर्थ देवार्पण समारोह में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, क्योंकि वे उस समय दिल्ली में अपनी अगली फ़िल्म की शूटिंग में व्यस्त थे। इसके बावजूद कार्यक्रम में उपस्थित भक्तों और प्रशंसकों ने उनके निर्देशन की खूब सराहना की।
देवार्पण समारोह – Ponda के महालक्ष्मी मंदिर में भव्य कार्यक्रम
महाभारत के कोंकणी अनुवाद के साथ हुआ विशेष आयोजन
इन भक्ति गीतों का देवार्पण समारोह Ponda के बंदोडा स्थित महालक्ष्मी मंदिर के सभागार में आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम महाभारत के माणिक गवणेकर द्वारा किए गए कोंकणी अनुवाद की किताब के रिलीज़ प्रोग्राम का हिस्सा था।
यह आयोजन दोहरे महत्व का था — एक ओर जहाँ भक्ति संगीत की प्रस्तुति थी, वहीं दूसरी ओर कोंकणी साहित्य की एक महत्वपूर्ण कृति का लोकार्पण भी हुआ। इस संयोजन ने कार्यक्रम को और भी यादगार बना दिया।
भक्तों और प्रशंसकों की उमड़ी भीड़
समारोह में बड़ी संख्या में भक्तों, संगीत प्रेमियों और Ponda क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। शकुंतला भरणे के गीत सुनकर श्रोता भाव-विभोर हो गए और भक्ति की एक अलग ही अनुभूति में डूब गए।
क्लासिकल गायकी, भक्ति, आस्था और परंपरा का यह खूबसूरत मेल दर्शकों को बेहद पसंद आया और गीत सोशल मीडिया पर भी तेज़ी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
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शकुंतला भरणे – एक परिचय
गोवा की प्रतिष्ठित शास्त्रीय गायिका
डॉ. शकुंतला भरणे गोमांतकीय संगीत जगत की एक अत्यंत प्रतिष्ठित और सम्मानित गायिका हैं। उनकी शास्त्रीय गायकी, भक्ति संगीत और कोंकणी लोकगीतों में गहरी पकड़ उन्हें अपने समकालीनों से अलग करती है।
शकुंतला भरणे न केवल एक कुशल गायिका हैं, बल्कि वे एक प्रतिभाशाली संगीतकार भी हैं, जैसा कि “नाम ही जप तू” गीत के संगीत से स्पष्ट होता है। उनकी बहुमुखी प्रतिभा उन्हें गोवा के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक विशेष स्थान दिलाती है।
Ponda की धरती से उठी भक्ति की आवाज़
Ponda की पावन धरती से उठी यह भक्ति की आवाज़ अब दूर-दूर तक अपनी गूँज फैला रही है। डॉ. शकुंतला भरणे, माधव बोरकर, माणिक राव गवणेकर, दत्ता दावजेकर और करण समर्थ जैसी प्रतिभाओं के संयुक्त प्रयास से बने ये दोनों भक्ति गीत गोवा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का अनमोल हिस्सा बन गए हैं।
Ponda के महालक्ष्मी मंदिर और नवदुर्गा देवस्थान की पवित्र पृष्ठभूमि में फिल्माए गए ये गीत न केवल धार्मिक आस्था को बल देते हैं, बल्कि गोवा की समृद्ध संगीत परंपरा को भी आगे बढ़ाते हैं। यह एल्बम आने वाली पीढ़ियों के लिए भक्ति और संस्कृति का एक अमूल्य उपहार है।
