Bhilai News — छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर से एक अत्यंत प्रेरणादायक और सामाजिक चेतना जगाने वाली खबर सामने आई है। नेहरू नगर स्थित ज्येष्ठ नागरिक मंच ने देहदान, नेत्रदान एवं त्वचादान के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यशाला का सफल आयोजन किया।
इस कार्यशाला में लगभग 200 से अधिक वरिष्ठ नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने की दिशा में एक नई पहल की शुरुआत हुई।
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भिलाई में अंगदान जागरूकता कार्यशाला का आयोजन
Bhilai News के तहत यह जानना जरूरी है कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य समाज में अंगदान के महत्व को रेखांकित करना और उससे जुड़ी गलतफहमियों को दूर करना था।
आज भी हमारे समाज में अंगदान को लेकर कई प्रकार की भ्रांतियाँ प्रचलित हैं। बहुत से लोग यह मानते हैं कि मृत्यु के बाद शरीर को पूर्ण रूप से दफनाया या जलाया जाना आवश्यक है, और अंगदान से इस प्रक्रिया में बाधा आती है।
ऐसी सोच को बदलने और लोगों को सही जानकारी देने के लिए नवदृष्टि फाउंडेशन ने ज्येष्ठ नागरिक मंच के साथ मिलकर यह महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की।
कार्यशाला का उद्देश्य और महत्व
इस कार्यशाला के माध्यम से तीन प्रमुख विषयों पर चर्चा की गई:
- देहदान — मृत्यु के उपरांत पूरे शरीर को चिकित्सा शिक्षा हेतु दान करना
- नेत्रदान — आँखों की पुतलियाँ दान कर किसी दृष्टिहीन को रोशनी देना
- त्वचादान — त्वचा दान कर जले हुए या घायल रोगियों की सहायता करना
यह तीनों दान मिलकर समाज में एक नई जिंदगी की उम्मीद जगाते हैं।
नवदृष्टि फाउंडेशन के विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी
Bhilai News से जुड़ी इस खबर में नवदृष्टि फाउंडेशन के तीन प्रमुख विशेषज्ञों — कुलवंत भाटिया, राजेश पारख एवं हरमन दुलई — ने उपस्थित सदस्यों को विस्तृत जानकारी प्रदान की।
कुलवंत भाटिया — नेत्रदान पर विशेष जानकारी
कुलवंत भाटिया ने नेत्रदान की पूरी प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बताया कि नेत्रदान मृत्यु के कुछ ही घंटों के भीतर किया जाना चाहिए और इसके लिए परिवार की सहमति आवश्यक होती है।
उन्होंने समाज में प्रचलित इस भ्रांति को भी दूर किया कि नेत्रदान से व्यक्ति के चेहरे पर कोई विकृति आती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया पूरी तरह सम्मानजनक तरीके से संपन्न होती है।
हरमन दुलई — देहदान की अहमियत
हरमन दुलई ने देहदान की महत्ता को बेहद आसान और भावनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि मेडिकल छात्र देहदान से मिले शरीर पर अभ्यास कर अपनी कुशलता बढ़ाते हैं, जिससे भविष्य में लाखों मरीजों को बेहतर उपचार मिल सकता है।
देहदान एक ऐसा महादान है जो मृत्यु के बाद भी इंसान को जिंदा रखता है — दूसरों की सेवा के माध्यम से।
राजेश पारख — त्वचादान की उपयोगिता
राजेश पारख ने त्वचादान की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जलने या गंभीर चोट के शिकार मरीजों के लिए दान की गई त्वचा किसी वरदान से कम नहीं होती।
उन्होंने कहा कि इस आयु वर्ग में भी अंगदान के प्रति इतनी जागरूकता और जिज्ञासा वास्तव में सराहनीय है। इससे न केवल वर्तमान पीढ़ी बल्कि आने वाली पीढ़ियाँ भी प्रेरणा लेंगी।
Bhilai News: अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने साझा किया अपना अनुभव
इस कार्यक्रम में ज्येष्ठ नागरिक मंच के अध्यक्ष श्री प्रदीप गुप्ता ने अपना एक बेहद प्रेरणादायक व्यक्तिगत अनुभव साझा किया।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1992 में उन्होंने अपने पिता का नेत्रदान करवाया था, जो उनके जीवन का एक अत्यंत भावनापूर्ण और गर्व का क्षण था।
माता के नेत्रदान का प्रयास
उन्होंने यह भी बताया कि बाद में उन्होंने अपनी माता के नेत्रदान का प्रयास किया, परंतु तकनीकी कारणों से वह संभव नहीं हो सका। इस अनुभव ने उन्हें और अधिक जागरूक बनाया।
श्री प्रदीप गुप्ता ने नवदृष्टि फाउंडेशन से आग्रह किया कि ज्येष्ठ नागरिक मंच के सदस्यों को देहदान, नेत्रदान एवं त्वचादान से जुड़े सभी तकनीकी पहलुओं और आवश्यक सावधानियों की विस्तृत जानकारी दी जाए, ताकि भविष्य में इस अभियान को और अधिक गति मिल सके।
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200 से अधिक सदस्यों की सक्रिय भागीदारी
Bhilai News में यह कार्यशाला इसलिए भी विशेष रही क्योंकि इसमें 200 से अधिक वरिष्ठ नागरिकों ने भाग लिया — जो अपने आप में एक रिकॉर्ड भागीदारी है।
कार्यक्रम में निम्नलिखित प्रमुख सदस्यों ने भागीदारी की:
- श्री एस. एन. मोदी
- श्री डी. के. रॉय
- दीपशिखा प्रसाद
- बी. एस. खनूजा
- एच. एस. रेखी
- श्री आर. आर. गर्ग
- श्री आर. आर. बाजपेई
- श्री सुनील सोनी
- श्री विजय क्षीरसागर
प्रतिभागियों ने पूछे महत्वपूर्ण प्रश्न
सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने अनुभव साझा किए और विशेषज्ञों से अपने सवालों के जवाब प्राप्त किए। यह एक इंटरेक्टिव और ज्ञानवर्धक सत्र रहा जिसने उपस्थित सभी लोगों को गहराई से प्रभावित किया।
Bhilai News: युवा पीढ़ी को भी मिलेगी प्रेरणा
राजेश पारख ने इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण बात कही जो Bhilai News पाठकों के लिए विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
उन्होंने कहा कि जब बुजुर्ग पीढ़ी अंगदान जैसे महान कार्य के प्रति इतनी जागरूक और उत्साहित है, तो इससे युवा पीढ़ी को भी प्रेरणा मिलेगी।
यह आंदोलन केवल एक कार्यशाला तक सीमित नहीं है — यह एक सामाजिक क्रांति की शुरुआत है। जब घर के बुजुर्ग स्वयं अंगदान का संकल्प लेते हैं, तो परिवार के अन्य सदस्य भी स्वाभाविक रूप से प्रेरित होते हैं।
अंगदान — एक राष्ट्रीय आवश्यकता
भारत में हर साल लाखों लोग अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा में अपनी जान गँवा देते हैं। राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) के अनुसार, देश में अंगदाताओं की संख्या में अभी भी भारी कमी है।
ऐसे में भिलाई जैसे शहरों से उठने वाली यह जागरूकता की आवाज़ पूरे राष्ट्र के लिए एक मिसाल बन सकती है।
नवदृष्टि फाउंडेशन की टीम का योगदान
इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में नवदृष्टि फाउंडेशन की एक बड़ी और समर्पित टीम ने अथक परिश्रम किया। फाउंडेशन की ओर से निम्नलिखित सदस्यों ने ज्येष्ठ नागरिक मंच के प्रति आभार व्यक्त किया:
अनिल बल्लेवार, कुलवंत भाटिया, राज आढ़तिया, प्रवीण तिवारी, मुकेश आढ़तिया, हरमन दुलई, रितेश जैन, राजेश पारख, जितेंद्र हासवानी, मंगल अग्रवाल, किरण भंडारी, उज्जवल पींचा, सत्येंद्र राजपूत, सुरेश जैन, पीयूष मालवीय, दीपक बंसल, विकास जायसवाल, मुकेश राठी, प्रभु दयाल उजाला, प्रमोद बाघ, सपन जैन, यतीन्द्र चावड़ा, जितेंद्र कारिया, बंसी अग्रवाल, अभिजीत पारख, मोहित अग्रवाल, चेतन जैन, दयाराम टांक, विनोद जैन एवं राकेश जैन।
इस पूरी टीम की मेहनत और लगन ने इस कार्यशाला को वास्तव में यादगार बना दिया।
Bhilai News: अंगदान की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल
Bhilai News की यह खबर केवल एक कार्यशाला की रिपोर्ट नहीं है — यह उस सामाजिक बदलाव की कहानी है जो भिलाई के नेहरू नगर से शुरू होकर पूरे छत्तीसगढ़ और देश में फैल सकती है।
ज्येष्ठ नागरिक मंच और नवदृष्टि फाउंडेशन की यह संयुक्त पहल यह साबित करती है कि उम्र कभी जागरूकता की बाधा नहीं बनती। जब 200 बुजुर्ग एकजुट होकर समाज को एक नई दिशा देने का संकल्प लेते हैं, तो वह अपने आप में एक क्रांति है।
अंगदान सिर्फ एक दान नहीं — यह जीवन का उपहार है। यह कार्यशाला समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक सराहनीय, प्रेरणादायक और ऐतिहासिक कदम सिद्ध हुई है।
