Custodial Death का मामला छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से सामने आया है, जहां चांपा थाना पुलिस की हिरासत में एक 35 वर्षीय व्यक्ति की तबीयत बिगड़ने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया।
मृतक की पहचान मेहंदीपारा निवासी शिव साहिस उर्फ मनीराम साहिस के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, उसे अवैध शराब बिक्री से जुड़े एक मामले में गुरुवार को हिरासत में लिया गया था। उसके पास से करीब 20 लीटर महुआ शराब जब्त किए जाने की बात पुलिस ने कही है।
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पुलिस हिरासत में कैसे बिगड़ी तबीयत?
पुलिस के मुताबिक, शिव साहिस को चांपा थाने में हिरासत में रखा गया था। रात करीब 10 बजे उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसे दौरा पड़ने की बात सामने आई।
इसके बाद उसे इलाज के लिए चांपा अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों की सलाह पर उसकी हालत को देखते हुए उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया।
इलाज के दौरान अगली सुबह उसकी मौत हो गई। घटना की जानकारी सामने आने के बाद परिवार और स्थानीय लोगों ने चांपा थाने को घेर लिया और पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
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Custodial Death पर परिवार के गंभीर आरोप
मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि शिव साहिस के साथ पुलिस हिरासत में मारपीट की गई और उसे कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया।
परिवार ने हिरासत में हुई मौत के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की। मामले को लेकर थाने के बाहर काफी तनाव की स्थिति बनी।
हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों को जांच का विषय बताया है। अभी यह साबित नहीं हुआ है कि मृतक के साथ हिरासत में मारपीट या किसी तरह की यातना हुई थी।
पुलिस ने Custodial Death पर क्या बताया?
पुलिस का कहना है कि शिव साहिस को दौरा पड़ा था। इसके बाद गिरने से उसके सिर में चोट लगने की बात पुलिस ने कही है।
पुलिस के अनुसार, इसी वजह से उसकी हालत बिगड़ती गई और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की निगरानी में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि मौत की वास्तविक परिस्थितियों और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच की जाएगी।
सिपाही निलंबित, मजिस्ट्रियल जांच के आदेश
घटना के बाद जांजगीर-चांपा के पुलिस अधीक्षक ने शुक्रवार को आदेश जारी कर चांपा थाने में पदस्थ कांस्टेबल ईश्वरी राठौर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
आदेश के अनुसार, कांस्टेबल को निलंबन अवधि के दौरान रिजर्व सेंटर, जांजगीर से संबद्ध किया गया है। नियमों के तहत उसे निर्वाह भत्ता मिलेगा।
पुलिस विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी दिए हैं। जांच का उद्देश्य हिरासत में व्यक्ति की तबीयत बिगड़ने और उसकी मौत की पूरी परिस्थितियों का पता लगाना है।
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जांच में किन सवालों के होंगे जवाब?
मजिस्ट्रियल जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि शिव साहिस की मौत की वास्तविक वजह क्या थी और हिरासत के दौरान उसके साथ किसी तरह की मारपीट या प्रताड़ना हुई थी या नहीं।
जांच में पुलिस हिरासत की परिस्थितियों, मेडिकल उपचार, अस्पताल में हुई कार्रवाई और मृतक के शरीर पर आई चोटों समेत मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा सकती है।
यदि जांच में किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही, अनुशासनहीनता या अन्य जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा में सामने आया Custodial Death का मामला अब मजिस्ट्रियल जांच के दायरे में है। एक तरफ पुलिस ने दौरे और गिरने से सिर में चोट को मौत की वजह बताया है, वहीं परिवार ने हिरासत में मारपीट और प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। ऐसे में जांच रिपोर्ट ही स्पष्ट करेगी कि शिव साहिस की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। सिपाही का निलंबन फिलहाल विभागीय कार्रवाई की शुरुआत है, जबकि अंतिम जिम्मेदारी जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय होगी।
