CGPSC Recruitment Scam में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व IAS अधिकारी और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करना हत्या से भी अधिक जघन्य अपराध है, क्योंकि इससे लाखों युवाओं के भविष्य और पूरे समाज पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
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CGPSC Recruitment Scam में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु ने बुधवार को यह आदेश सुनाया। उन्होंने 31 जुलाई को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।
जीवन किशोर ध्रुव को सितंबर 2025 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप है कि वर्ष 2020-2022 भर्ती प्रक्रिया के दौरान CGPSC के सचिव रहते हुए उन्होंने गोपनीय प्रश्नपत्र अपने पुत्र सुमित ध्रुव तक पहुंचाए।
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CGPSC Recruitment Scam: हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
अपने आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करने वाला व्यक्ति लाखों अभ्यर्थियों के सपनों और भविष्य से खिलवाड़ करता है।
कोर्ट ने कहा कि ऐसे छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत और रात-दिन पढ़ाई कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। यदि कोई अधिकारी गोपनीय प्रश्नपत्र लीक करता है तो उसका असर केवल कुछ लोगों पर नहीं बल्कि पूरे समाज पर पड़ता है।
अदालत ने टिप्पणी की कि “एक व्यक्ति की हत्या से एक परिवार प्रभावित होता है, लेकिन लाखों युवाओं का करियर बर्बाद करने वाला अपराध पूरे समाज को प्रभावित करता है।”
CBI के अनुसार क्या हैं आरोप?
CBI ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं कि जीवन किशोर ध्रुव ने अपने पद का दुरुपयोग किया।
जांच एजेंसी के अनुसार—
- 2021 मुख्य परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र अपने पास रखे।
- प्रश्नपत्र अपने पुत्र सुमित ध्रुव तक पहुंचाए।
- सुमित ध्रुव ने परीक्षा से पहले उन्हीं चार विषयों की विशेष तैयारी की, जो बाद में प्रश्नपत्र में आए।
- तलाशी के दौरान जनरल स्टडीज पेपर-7 तथा निबंध प्रश्न-पुस्तिका से जुड़े प्रश्न एवं उत्तरों की प्रतियां बरामद हुईं।
- दस्तावेजी साक्ष्य, गवाहों के बयान और अन्य बरामद सामग्री कथित साजिश की ओर संकेत करती है।
इन तथ्यों को देखते हुए अदालत ने माना कि आरोप गंभीर हैं और सार्वजनिक भर्ती प्रक्रिया की पवित्रता पर सीधा असर डालते हैं।
बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?
जीवन किशोर ध्रुव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर ने अदालत में कहा कि उन्हें केवल CGPSC सचिव होने के कारण फंसाया गया है।
उन्होंने दलील दी कि—
ध्रुव के पक्ष में दिए गए प्रमुख तर्क
- उनका नाम मूल FIR में नहीं था।
- उनके घर से कोई आपत्तिजनक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या दस्तावेज बरामद नहीं हुए, केवल मोबाइल फोन मिला।
- दोनों पुत्रों के परीक्षा में शामिल होने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने आयोग को सूचित कर गोपनीय कार्यों से स्वयं को अलग करने का अनुरोध किया था।
- आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि बाद में उन्हें परीक्षा संबंधी गोपनीय जिम्मेदारियां नहीं दी गईं।
- उनके एक पुत्र परीक्षा में सफल ही नहीं हुआ जबकि दूसरे की रैंक भी शीर्ष स्थान पर नहीं थी।
CBI ने जमानत का विरोध क्यों किया?
CBI के विशेष वकील वैभव ए. गोवर्धन ने अदालत में कहा कि यह मामला सार्वजनिक भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा है और हजारों अभ्यर्थियों का विश्वास प्रभावित हुआ है।
उन्होंने कहा कि जीवन किशोर ध्रुव ने तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष, परीक्षा नियंत्रक और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची, जिससे उनके पुत्र को अनुचित लाभ मिला।
CBI ने यह भी कहा कि जिन सह-आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली, उनकी स्थिति अलग थी क्योंकि वे सरकारी अधिकारी नहीं थे, जबकि ध्रुव पर परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने की संवैधानिक जिम्मेदारी थी।
मामले में किन-किन लोगों की गिरफ्तारी हुई?
CGPSC Recruitment Scam में अब तक कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें प्रमुख नाम हैं—
- पूर्व CGPSC अध्यक्ष तमन सिंह सोनवानी
- नितेश सोनवानी
- साहिल सोनवानी
- पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर
- उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल
- शशांक गोयल
- भूमिका कटियार
- जीवन किशोर ध्रुव
- सुमित ध्रुव
CBI इस पूरे भर्ती घोटाले की जांच कर रही है और मामले की सुनवाई जारी है।
CGPSC Recruitment Scam में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह फैसला भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत की सख्त टिप्पणी यह स्पष्ट करती है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक जैसे मामलों को न्यायपालिका अत्यंत गंभीर अपराध मान रही है। आने वाले दिनों में CBI की जांच और अदालत की सुनवाई इस बहुचर्चित भर्ती घोटाले की दिशा तय करेगी।
