Skip to main content

4thnation

Bastar Tourism की बदलती तस्वीर

Bastar Tourism अब छत्तीसगढ़ की पर्यटन संभावनाओं को नई पहचान देने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हो रहा है। प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक कला, स्थानीय खान-पान और ग्रामीण जीवन बस्तर को सामान्य पर्यटन से अलग अनुभव प्रदान करते हैं।

चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, कुटुमसर और कैलाश गुफाएं, मां दंतेश्वरी मंदिर, दलपत सागर और बस्तर पैलेस जैसे स्थल यहां पर्यटन की विविधता को दिखाते हैं।

बस्तर में आने वाला पर्यटक सिर्फ प्राकृतिक स्थल नहीं देखता, बल्कि स्थानीय समुदाय की जीवनशैली, हस्तशिल्प, लोकनृत्य, संगीत और पारंपरिक भोजन से भी जुड़ता है। यही वजह है कि यहां इको-टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन और अनुभव आधारित पर्यटन की संभावनाएं बढ़ रही हैं।

देश-दुनिया और अपराध जगत की ताजा खबरों के लिए 4thnation WhatsApp Channel से जुड़ें

Bastar Tourism में कनेक्टिविटी का विस्तार

पर्यटन को बढ़ाने में बेहतर सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी की महत्वपूर्ण भूमिका है। Bastar 2.0 के प्रस्तावित रोडमैप में 228 नई सड़कों और 267 पुलों का प्रस्ताव शामिल है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत करने की योजना है।

जगदलपुर का मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट बस्तर को हवाई संपर्क उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वहीं रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना क्षेत्र की भविष्य की कनेक्टिविटी और पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बेहतर संपर्क का असर केवल पर्यटकों की आवाजाही तक सीमित नहीं रहेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के स्थानीय उत्पादों को बाजार, युवाओं को रोजगार और पर्यटन से जुड़े छोटे कारोबारों को नए ग्राहक मिल सकते हैं।

join 4thnation channel: 4thnation WhatsApp Channel

Bastar Tourism में होमस्टे का बढ़ता महत्व

ग्रामीण और जनजातीय होमस्टे बस्तर के पर्यटन मॉडल की महत्वपूर्ण कड़ी बन रहे हैं। छत्तीसगढ़ की होमस्टे नीति के तहत ग्रामीण परिवारों को अपने घरों को पर्यटकों के लिए होमस्टे के रूप में विकसित करने और इससे आय अर्जित करने का अवसर दिया जा रहा है। सरकारी जानकारी के अनुसार नए होमस्टे के निर्माण के लिए 1 लाख रुपये तक और मौजूदा आवास के नवीनीकरण के लिए 50 हजार रुपये तक सहायता का प्रावधान है।

होमस्टे मॉडल की खासियत यह है कि पर्यटकों से होने वाली आय सीधे स्थानीय परिवारों तक पहुंच सकती है। इसके साथ स्थानीय भोजन, गाइड सेवा, परिवहन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े अन्य लोगों को भी रोजगार के अवसर मिलते हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार की निवेश संबंधी जानकारी में होमस्टे के लिए अधिकतम नौ कमरों तक की अनुमति और पंजीयन से जुड़ी सुविधाओं का उल्लेख भी है।

यह भी पढ़ें: Saraipali Development को मिली बड़ी सौगात

Bastar Tourism को बस्तर पंडुम से नई पहचान

बस्तर की जनजातीय संस्कृति पर्यटन की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है। 2026 के बस्तर पंडुम ने इस सांस्कृतिक विरासत को बड़े मंच पर प्रस्तुत किया।

भारत सरकार के अनुसार बस्तर पंडुम 2026 में सात जिलों, 1,885 ग्राम पंचायतों और 32 जनपद मुख्यालयों से लगभग 55 हजार प्रतिभागियों ने 12 विधाओं में हिस्सा लिया। इनमें खान-पान, गीत, नृत्य, नाटक, वेशभूषा, परंपरा और वन औषधि जैसी विधाएं शामिल थीं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 7 फरवरी 2026 को जगदलपुर में बस्तर पंडुम का उद्घाटन किया था। इससे बस्तर की पारंपरिक कला और संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक मंच मिला।

धुड़मारास से एडवेंचर पर्यटन को बढ़ावा

बस्तर के धुड़मारास गांव ने भी पर्यटन के क्षेत्र में अलग पहचान बनाई है। भारत सरकार के 2024 Best Tourism Villages Competition में धुड़मारास को Adventure Tourism श्रेणी में चुना गया था।

इसके अलावा धुड़मारास को UN Tourism के Best Tourism Villages Upgrade Programme के लिए भी चुना गया था। कांगेर घाटी क्षेत्र में स्थित यह गांव प्रकृति, सामुदायिक पर्यटन और स्थानीय जीवन के अनुभव के लिए महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरा है।

बस्तर में एडवेंचर गतिविधियों, होमस्टे और इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलने से पर्यटन का दायरा प्रमुख झरनों और पर्यटन स्थलों से आगे गांवों तक पहुंच सकता है।

देश-दुनिया और अपराध जगत की ताजा खबरों के लिए 4thnation WhatsApp Channel से जुड़ें

Bastar Tourism से रोजगार की उम्मीद

बस्तर में पर्यटन का विस्तार स्थानीय युवाओं और समुदायों के लिए रोजगार के नए रास्ते खोल सकता है। पर्यटन गाइड, ड्राइवर, होमस्टे संचालक, भोजन सेवा, हस्तशिल्प विक्रेता और सांस्कृतिक कलाकार सीधे इससे जुड़ सकते हैं।

पर्यटन विकास को स्थानीय कौशल से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे पर्यटन केवल दर्शनीय स्थलों के विकास तक सीमित न रहकर स्थानीय उद्यमिता और आय का माध्यम बन सकता है।

Bastar Tourism अब प्रकृति और संस्कृति के साथ स्थानीय विकास को जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी, होमस्टे, इको-टूरिज्म, एडवेंचर गतिविधियां और बस्तर पंडुम जैसे सांस्कृतिक आयोजन इस बदलाव को गति दे रहे हैं। यदि पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और जनजातीय संस्कृति की मौलिकता को प्राथमिकता दी जाती है, तो बस्तर आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत पहचान बना सकता है।

One thought on “Bastar Tourism की बदलती तस्वीर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *